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Indore News: MP कॉलेज चुनाव में जयस की एंट्री, ABVP और NSUI के लिए त्रिकोणीय मुकाबला
Mon, 10 Aug 2026 09:48 AM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Mon, 10 Aug 2026 09:48 AM IST
सार
Indore News: मध्य प्रदेश में 9 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आयोजित होने जा रहे छात्रसंघ चुनावों में जयस की छात्र विंग जयस छात्र संगठन JCS ने भी सीधे उतरने की घोषणा कर दी है। संगठन ने राज्य के सभी कॉलेजों में प्रत्याशी उतारने का ऐलान किया है।
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संगठन के राष्ट्रीय प्रमुख लोकेश मुजाल्दे।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
मध्य प्रदेश की कॉलेज राजनीति में अब तक मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के बीच देखा जाता रहा है। हालांकि इस बार के छात्रसंघ चुनाव में स्थिति बदलने वाली है क्योंकि जयस की छात्र विंग जयस छात्र संगठन JCS भी सीधे तौर पर चुनाव मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है। संगठन ने राज्य के सभी महाविद्यालयों में अपने उम्मीदवार खड़ा करने की योजना बनाई है। इसके लिए विशेष रूप से आदिवासी समुदाय के युवाओं को चुनावी टिकट देने की रणनीति पर कार्य किया जा रहा है। लगभग 9 वर्षों के लंबे अंतराल के पश्चात् मध्य प्रदेश में छात्रसंघ के चुनाव आयोजित किए जाने की तैयारी चल रही है।
आदिवासी बहुल संस्थानों में बदल जाएगी स्थिति
जयस संगठन की छात्र राजनीति में इस नई पहल से उन सभी शिक्षण संस्थानों में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं जहां आदिवासी विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक है। अब तक इन युवाओं को अपने पक्ष में करने के लिए केवल 2 मुख्य संगठनों के मध्य प्रतिस्पर्धा रहती थी। अब जयस के प्रत्यक्ष रूप से चुनावी रण में आ जाने से इन दोनों ही स्थापित छात्र संगठनों के समक्ष आदिवासी छात्र-छात्राओं के बीच अपनी साख और प्रभाव को बनाए रखने की एक नई और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
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विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर चुनावी घोषणा
संगठन के राष्ट्रीय प्रमुख लोकेश मुजाल्दा ने अमर उजाला से बातचीत में स्पष्ट किया कि जयस अब परिसरों और कॉलेजों के भीतर भी आम विद्यार्थियों की बुलंद आवाज बनेगा तथा आगामी छात्रसंघ चुनावों में अपने प्रत्याशी उतारेगा। इसके साथ ही संगठन के प्रदेश प्रमुख बाबूलाल बघेल ने जानकारी दी कि उनका दल राज्य के प्रत्येक कॉलेज में मजबूती से चुनाव लड़ने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसके लिए अतिशीघ्र कॉलेज स्तर पर छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद और संपर्क अभियान आरंभ किया जाएगा।
मालवा और निमाड़ अंचल से जनसंपर्क अभियान की शुरुआत
संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी सबसे पहले मालवा और निमाड़ क्षेत्र के महाविद्यालयों का दौरा करेंगे क्योंकि इन अंचलों में आदिवासी छात्र-छात्राओं की बहुलता है। यहां विद्यार्थियों के साथ आमने-सामने चर्चा करके उनकी शैक्षणिक समस्याओं और स्थानीय प्राथमिकताओं को समझा जाएगा। इसके उपरांत राज्य के अन्य जिलों में भी इसी प्रकार का व्यापक अभियान संचालित होगा। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जयस पूरे प्रदेश में पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेगा। छात्रसंघ चुनाव की तैयारी लंबे समय से जारी है। जिस भी कॉलेज में आदिवासी छात्र अध्ययनरत हैं, वहां पहुंचकर उनसे संपर्क साधा जाएगा और संगठन को विश्वास है कि जहां भी छात्र पढ़ रहे हैं, वहां जीत हासिल होगी।
आदिवासी छात्र-छात्राओं पर विशेष ध्यान
जयस की संपूर्ण चुनावी रणनीति का मुख्य केंद्र बिंदु आदिवासी विद्यार्थी ही रहेंगे। राज्य के अनेक महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में आदिवासी समाज के छात्र बड़ी संख्या में नामांकित हैं। संगठन इन्हीं परिसरों में अपना जनाधार मजबूत करने में जुटा है। छात्रवृत्ति, रोजगार के नए अवसर, प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार, बैकलॉग पदों की पूर्ति और कॉलेजों की स्थानीय समस्याओं को इस पूरे अभियान में प्रमुखता से उठाया जाएगा।
रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं के मुद्दे
छात्र राजनीति में प्रवेश से पूर्व भी जयस युवाओं के मुद्दों पर मुखर होकर आवाज उठाता रहा है। सरकार से संगठन की प्रमुख मांगों में बैकलॉग के खाली पदों पर शीघ्र भर्ती और पटवारी परीक्षा में ऋणात्मक अंकन प्रणाली को समाप्त करना शामिल है। इंदौर और भोपाल समेत कई प्रमुख नगरों में संगठन इन विषयों को लेकर पूर्व में भी प्रदर्शन कर चुका है। अब इन मुद्दों को सीधे विद्यार्थियों के बीच ले जाया जाएगा।
त्रिकोणीय मुकाबले से बदले राजनीतिक समीकरण
राज्य के कॉलेजों में वर्षों से 2 प्रमुख संगठनों का वर्चस्व रहा है, जो छात्र राजनीति के माध्यम से अपना कैडर तैयार करते रहे हैं। जयस के आगमन से पहली बार एक तीसरा सशक्त विकल्प उभरेगा, जिसका सबसे व्यापक प्रभाव आदिवासी बहुल जिलों के परिसरों में देखने को मिल सकता है।
वर्ष 2013 में स्थापना और 2 वर्ष पूर्व छात्र इकाई का गठन
जय आदिवासी युवा शक्ति की स्थापना वर्ष 2013 में हुई थी। यह संगठन लंबे समय से सामाजिक एवं युवा मुद्दों पर कार्य कर रहा है। छात्र राजनीति का संचालन करने के लिए लगभग 2 वर्ष पूर्व एक समर्पित छात्र इकाई का निर्माण किया गया था।
सितंबर माह में चुनाव की संभावना
राज्य में वर्ष 2017 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए गए हैं। अब सितंबर माह में चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने की तैयारी है, यद्यपि अधिकृत तिथियों की घोषणा होना अभी शेष है।
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आदिवासी बहुल संस्थानों में बदल जाएगी स्थिति
जयस संगठन की छात्र राजनीति में इस नई पहल से उन सभी शिक्षण संस्थानों में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं जहां आदिवासी विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक है। अब तक इन युवाओं को अपने पक्ष में करने के लिए केवल 2 मुख्य संगठनों के मध्य प्रतिस्पर्धा रहती थी। अब जयस के प्रत्यक्ष रूप से चुनावी रण में आ जाने से इन दोनों ही स्थापित छात्र संगठनों के समक्ष आदिवासी छात्र-छात्राओं के बीच अपनी साख और प्रभाव को बनाए रखने की एक नई और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
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विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर चुनावी घोषणा
संगठन के राष्ट्रीय प्रमुख लोकेश मुजाल्दा ने अमर उजाला से बातचीत में स्पष्ट किया कि जयस अब परिसरों और कॉलेजों के भीतर भी आम विद्यार्थियों की बुलंद आवाज बनेगा तथा आगामी छात्रसंघ चुनावों में अपने प्रत्याशी उतारेगा। इसके साथ ही संगठन के प्रदेश प्रमुख बाबूलाल बघेल ने जानकारी दी कि उनका दल राज्य के प्रत्येक कॉलेज में मजबूती से चुनाव लड़ने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसके लिए अतिशीघ्र कॉलेज स्तर पर छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद और संपर्क अभियान आरंभ किया जाएगा।
मालवा और निमाड़ अंचल से जनसंपर्क अभियान की शुरुआत
संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी सबसे पहले मालवा और निमाड़ क्षेत्र के महाविद्यालयों का दौरा करेंगे क्योंकि इन अंचलों में आदिवासी छात्र-छात्राओं की बहुलता है। यहां विद्यार्थियों के साथ आमने-सामने चर्चा करके उनकी शैक्षणिक समस्याओं और स्थानीय प्राथमिकताओं को समझा जाएगा। इसके उपरांत राज्य के अन्य जिलों में भी इसी प्रकार का व्यापक अभियान संचालित होगा। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जयस पूरे प्रदेश में पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेगा। छात्रसंघ चुनाव की तैयारी लंबे समय से जारी है। जिस भी कॉलेज में आदिवासी छात्र अध्ययनरत हैं, वहां पहुंचकर उनसे संपर्क साधा जाएगा और संगठन को विश्वास है कि जहां भी छात्र पढ़ रहे हैं, वहां जीत हासिल होगी।
आदिवासी छात्र-छात्राओं पर विशेष ध्यान
जयस की संपूर्ण चुनावी रणनीति का मुख्य केंद्र बिंदु आदिवासी विद्यार्थी ही रहेंगे। राज्य के अनेक महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में आदिवासी समाज के छात्र बड़ी संख्या में नामांकित हैं। संगठन इन्हीं परिसरों में अपना जनाधार मजबूत करने में जुटा है। छात्रवृत्ति, रोजगार के नए अवसर, प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार, बैकलॉग पदों की पूर्ति और कॉलेजों की स्थानीय समस्याओं को इस पूरे अभियान में प्रमुखता से उठाया जाएगा।
रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं के मुद्दे
छात्र राजनीति में प्रवेश से पूर्व भी जयस युवाओं के मुद्दों पर मुखर होकर आवाज उठाता रहा है। सरकार से संगठन की प्रमुख मांगों में बैकलॉग के खाली पदों पर शीघ्र भर्ती और पटवारी परीक्षा में ऋणात्मक अंकन प्रणाली को समाप्त करना शामिल है। इंदौर और भोपाल समेत कई प्रमुख नगरों में संगठन इन विषयों को लेकर पूर्व में भी प्रदर्शन कर चुका है। अब इन मुद्दों को सीधे विद्यार्थियों के बीच ले जाया जाएगा।
त्रिकोणीय मुकाबले से बदले राजनीतिक समीकरण
राज्य के कॉलेजों में वर्षों से 2 प्रमुख संगठनों का वर्चस्व रहा है, जो छात्र राजनीति के माध्यम से अपना कैडर तैयार करते रहे हैं। जयस के आगमन से पहली बार एक तीसरा सशक्त विकल्प उभरेगा, जिसका सबसे व्यापक प्रभाव आदिवासी बहुल जिलों के परिसरों में देखने को मिल सकता है।
वर्ष 2013 में स्थापना और 2 वर्ष पूर्व छात्र इकाई का गठन
जय आदिवासी युवा शक्ति की स्थापना वर्ष 2013 में हुई थी। यह संगठन लंबे समय से सामाजिक एवं युवा मुद्दों पर कार्य कर रहा है। छात्र राजनीति का संचालन करने के लिए लगभग 2 वर्ष पूर्व एक समर्पित छात्र इकाई का निर्माण किया गया था।
सितंबर माह में चुनाव की संभावना
राज्य में वर्ष 2017 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए गए हैं। अब सितंबर माह में चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने की तैयारी है, यद्यपि अधिकृत तिथियों की घोषणा होना अभी शेष है।
