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Indore News: इंदौर के 13 केंद्रों पर 5 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों ने दी एमपीपीएससी परीक्षा
Sun, 12 Jul 2026 09:17 PM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Sun, 12 Jul 2026 09:17 PM IST
सार
दो सत्रों में आयोजित हुई इस परीक्षा में कड़े नियमों का पालन कराया गया, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और जूते-मोजे पर प्रतिबंध शामिल था, जिसके बावजूद परीक्षार्थियों को कोई असुविधा नहीं हुई।
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इंदौर में आयोजित हुई परीक्षा। फोटो- जयेश मालवीय।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) द्वारा आयोजित सहायक प्राध्यापक परीक्षा-2025 रविवार 12 जुलाई को इंदौर में सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। परीक्षा के दौरान सभी 13 परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्थाएं चाक-चौबंद नजर आईं और परीक्षार्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा या समस्या का सामना नहीं करना पड़ा। संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े के निर्देशन में प्रशासन द्वारा किए गए पुख्ता इंतजामों के कारण परीक्षा का संचालन सुचारु और पारदर्शी रहा। परीक्षा में शामिल होने के लिए पंजीकृत 5,710 अभ्यर्थियों के लिए केंद्रों पर प्रवेश से लेकर परीक्षा समाप्ति तक सभी प्रक्रियाएं व्यवस्थित ढंग से पूरी की गईं।
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दो सत्रों में आयोजित हुई परीक्षा
यह महत्वपूर्ण परीक्षा रविवार को दो अलग-अलग सत्रों में आयोजित की गई थी। प्रथम सत्र सुबह 10 बजे से 11 बजे तक आयोजित हुआ, जबकि दूसरा सत्र दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक चला। प्रशासन और आयोग के कड़े नियमों के मुताबिक अभ्यर्थियों को परीक्षा शुरू होने के ठीक 15 मिनट पहले तक ही केंद्रों में प्रवेश दिया गया। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद किसी भी केंद्र पर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई, जिससे केंद्रों के बाहर अनावश्यक भीड़ या अव्यवस्था की स्थिति नहीं बनी। यह परीक्षा मुख्य रूप से छह विषयों संस्कृत, भूगोल, मनोविज्ञान, विधि, भूगर्भशास्त्र और योगिक विज्ञान के लिए आयोजित की गई थी।
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सुरक्षा और जांच के रहे कड़े इंतजाम
परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए परीक्षा कक्षों में मोबाइल फोन, स्मार्ट व डिजिटल घड़ी, ब्लूटूथ, कैलकुलेटर, पेन ड्राइव और ईयरफोन जैसे सभी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को पूरी तरह प्रतिबंधित रखा गया था। इसके साथ ही बेल्ट, पर्स, वॉलेट, धूप के चश्मे और हाथ में पहने जाने वाले धातु या चमड़े के बैंड जैसी सामग्री भी वर्जित रही। अभ्यर्थियों की गहन जांच के बाद ही उन्हें चप्पल या सैंडल पहनकर अंदर जाने दिया गया, जबकि जूते-मोजे पहनकर आने वाले परीक्षार्थियों को नियमानुसार प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।
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दो सत्रों में आयोजित हुई परीक्षा
यह महत्वपूर्ण परीक्षा रविवार को दो अलग-अलग सत्रों में आयोजित की गई थी। प्रथम सत्र सुबह 10 बजे से 11 बजे तक आयोजित हुआ, जबकि दूसरा सत्र दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक चला। प्रशासन और आयोग के कड़े नियमों के मुताबिक अभ्यर्थियों को परीक्षा शुरू होने के ठीक 15 मिनट पहले तक ही केंद्रों में प्रवेश दिया गया। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद किसी भी केंद्र पर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई, जिससे केंद्रों के बाहर अनावश्यक भीड़ या अव्यवस्था की स्थिति नहीं बनी। यह परीक्षा मुख्य रूप से छह विषयों संस्कृत, भूगोल, मनोविज्ञान, विधि, भूगर्भशास्त्र और योगिक विज्ञान के लिए आयोजित की गई थी।
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सुरक्षा और जांच के रहे कड़े इंतजाम
परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए परीक्षा कक्षों में मोबाइल फोन, स्मार्ट व डिजिटल घड़ी, ब्लूटूथ, कैलकुलेटर, पेन ड्राइव और ईयरफोन जैसे सभी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को पूरी तरह प्रतिबंधित रखा गया था। इसके साथ ही बेल्ट, पर्स, वॉलेट, धूप के चश्मे और हाथ में पहने जाने वाले धातु या चमड़े के बैंड जैसी सामग्री भी वर्जित रही। अभ्यर्थियों की गहन जांच के बाद ही उन्हें चप्पल या सैंडल पहनकर अंदर जाने दिया गया, जबकि जूते-मोजे पहनकर आने वाले परीक्षार्थियों को नियमानुसार प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।
