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Indore News: घने जंगलों और बहते झरनों के बीच दौड़ेगी हेरिटेज ट्रेन, अगले शनिवार से शुरू हो सकता है रोमांचक सफर
Sun, 16 Aug 2026 04:27 PM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Sun, 16 Aug 2026 04:27 PM IST
सार
Indore News: पातालपानी-कालाकुंड की वादियों की सैर कराने वाली हेरिटेज ट्रेन का रैक बीकानेर से मरम्मत के बाद इंदौर के लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन पहुंच गया है। जल्द ही इसे पातालपानी लाकर क्रेन से ट्रैक पर उतारा जाएगा और ट्रायल रन होगा।
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पातालपानी-कालाकुंड हेरिटेज ट्रेन
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
बारिश का सुहावना मौसम, पहाड़ों से गिरते झरने, चारों तरफ फैली हरियाली और बादलों से ढकी वादियां... ऐसे खूबसूरत मौसम में पातालपानी-कालाकुंड की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने वाले पर्यटकों के लिए बेहद राहत भरी खबर है। इस प्रसिद्ध और खूबसूरत घाट सेक्शन में एक बार फिर हेरिटेज ट्रेन दौड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रेन का पूरा रैक मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद बीकानेर से मालगाड़ी पर सवार होकर रविवार सुबह इंदौर के लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन पहुंच गया है। अब इस रैक को यहां से पातालपानी तक ले जाया जाएगा। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि अगले सप्ताह से यह ट्रेन यात्रियों को लेकर वादियों की सैर कराने के लिए पटरी पर उतर सकती है।
रेलवे जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन से हेरिटेज ट्रेन के रैक को महू के रास्ते पातालपानी स्टेशन तक पहुंचाया जाएगा। यहां इसे विशेष क्रेन की सहायता से ट्रैक पर उतारा जाएगा। इसके बाद ट्रेन के इंजन के साथ सभी डिब्बों का अलाइनमेंट किया जाएगा। इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद सबसे पहले ट्रायल रन आयोजित किया जाएगा। ट्रायल रन के दौरान ट्रेन के रैक, रेलवे ट्रैक, संचालन व्यवस्था और सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच की जाएगी। यदि सब कुछ सामान्य और सुरक्षित पाया गया, तो जल्द ही आम यात्रियों के लिए ट्रेन का नियमित संचालन शुरू कर दिया जाएगा। ऐसा अनुमान है कि अगले सप्ताह शनिवार से हेरिटेज ट्रेन फिर से पातालपानी से कालाकुंड की खूबसूरत वादियों में दौड़ती हुई दिखाई देगी।
155 साल पुराना है इस ऐतिहासिक रेल ट्रैक का इतिहास
पातालपानी-कालाकुंड का यह लगभग 9.5 किलोमीटर लंबा मीटरगेज रेल ट्रैक न केवल बेहद खूबसूरत है, बल्कि अपने आप में 155 साल पुराना समृद्ध इतिहास भी समेटे हुए है। इस ऐतिहासिक रेल लाइन की योजना 19वीं सदी में इंदौर रियासत के महाराजा तुकोजीराव होलकर द्वितीय ने तैयार की थी। वर्ष 1870 में इस रेल लाइन के निर्माण के लिए पहल की गई थी और वर्ष 1878 तक होलकर स्टेट रेलवे के अंतर्गत इसका निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया। बाद में यह रेल लाइन राजपूताना-मालवा रेलवे का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई। पातालपानी रेलवे स्टेशन का निर्माण भी उसी दौर में वर्ष 1874 से वर्ष 1878 के बीच किया गया था। समय बीतने के साथ-साथ आसपास की अधिकांश मीटरगेज लाइनों को ब्रॉडगेज में बदल दिया गया, लेकिन पातालपानी-कालाकुंड का यह चुनौतीपूर्ण और कठिन पहाड़ी हिस्सा अपनी मूल पहचान के साथ बचा रहा। अत्यधिक कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इसे ब्रॉडगेज में बदलना आसान काम नहीं था। इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने वर्ष 2018 में इस हिस्से को संरक्षित घोषित किया और यहां हेरिटेज ट्रेन का संचालन शुरू करने का निर्णय लिया। देश की पहली ऐसी हेरिटेज ट्रेन का औपचारिक संचालन 25 दिसंबर 2018 को शुरू किया गया था।
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4 सुरंगें, 24 तीखे मोड़ और दर्जनों पुलों से भरा रोमांचक सफर
इस छोटे से रेल सफर में रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। इस 9.5 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर 4 सुरंगें, लगभग 24 तीखे मोड़, 6 बड़े पुल और 35 छोटे पुल मौजूद हैं। ट्रेन की खिड़की से एक तरफ ऊंचे पहाड़ और घने जंगल दिखाई देते हैं, तो दूसरी तरफ गहरी घाटियां और कल-कल बहते झरने इस सफर को अविस्मरणीय बना देते हैं। बारिश के मौसम में पातालपानी का विशाल झरना और चारों ओर पसरी हरियाली इस सफर की खूबसूरती में चार चांद लगा देती है।
पिछले साल 26 जुलाई से 16 नवंबर तक हुआ था संचालन
पिछले वर्ष भी मानसून के सीजन के दौरान हेरिटेज ट्रेन का सफल संचालन किया गया था। यह ट्रेन 26 जुलाई से 16 नवंबर 2025 तक हर सप्ताह शुक्रवार से रविवार के बीच चलाई गई थी। हालांकि इस वर्ष ट्रेन के रैक की आवश्यक मरम्मत और देखभाल कार्य में अधिक समय लगने के कारण इसके संचालन में थोड़ा विलंब हुआ है। अब रैक के इंदौर पहुंच जाने से पर्यटकों का इंतजार खत्म होने जा रहा है।
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रेलवे जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन से हेरिटेज ट्रेन के रैक को महू के रास्ते पातालपानी स्टेशन तक पहुंचाया जाएगा। यहां इसे विशेष क्रेन की सहायता से ट्रैक पर उतारा जाएगा। इसके बाद ट्रेन के इंजन के साथ सभी डिब्बों का अलाइनमेंट किया जाएगा। इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद सबसे पहले ट्रायल रन आयोजित किया जाएगा। ट्रायल रन के दौरान ट्रेन के रैक, रेलवे ट्रैक, संचालन व्यवस्था और सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच की जाएगी। यदि सब कुछ सामान्य और सुरक्षित पाया गया, तो जल्द ही आम यात्रियों के लिए ट्रेन का नियमित संचालन शुरू कर दिया जाएगा। ऐसा अनुमान है कि अगले सप्ताह शनिवार से हेरिटेज ट्रेन फिर से पातालपानी से कालाकुंड की खूबसूरत वादियों में दौड़ती हुई दिखाई देगी।
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155 साल पुराना है इस ऐतिहासिक रेल ट्रैक का इतिहास
पातालपानी-कालाकुंड का यह लगभग 9.5 किलोमीटर लंबा मीटरगेज रेल ट्रैक न केवल बेहद खूबसूरत है, बल्कि अपने आप में 155 साल पुराना समृद्ध इतिहास भी समेटे हुए है। इस ऐतिहासिक रेल लाइन की योजना 19वीं सदी में इंदौर रियासत के महाराजा तुकोजीराव होलकर द्वितीय ने तैयार की थी। वर्ष 1870 में इस रेल लाइन के निर्माण के लिए पहल की गई थी और वर्ष 1878 तक होलकर स्टेट रेलवे के अंतर्गत इसका निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया। बाद में यह रेल लाइन राजपूताना-मालवा रेलवे का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई। पातालपानी रेलवे स्टेशन का निर्माण भी उसी दौर में वर्ष 1874 से वर्ष 1878 के बीच किया गया था। समय बीतने के साथ-साथ आसपास की अधिकांश मीटरगेज लाइनों को ब्रॉडगेज में बदल दिया गया, लेकिन पातालपानी-कालाकुंड का यह चुनौतीपूर्ण और कठिन पहाड़ी हिस्सा अपनी मूल पहचान के साथ बचा रहा। अत्यधिक कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इसे ब्रॉडगेज में बदलना आसान काम नहीं था। इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने वर्ष 2018 में इस हिस्से को संरक्षित घोषित किया और यहां हेरिटेज ट्रेन का संचालन शुरू करने का निर्णय लिया। देश की पहली ऐसी हेरिटेज ट्रेन का औपचारिक संचालन 25 दिसंबर 2018 को शुरू किया गया था।
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4 सुरंगें, 24 तीखे मोड़ और दर्जनों पुलों से भरा रोमांचक सफर
इस छोटे से रेल सफर में रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। इस 9.5 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर 4 सुरंगें, लगभग 24 तीखे मोड़, 6 बड़े पुल और 35 छोटे पुल मौजूद हैं। ट्रेन की खिड़की से एक तरफ ऊंचे पहाड़ और घने जंगल दिखाई देते हैं, तो दूसरी तरफ गहरी घाटियां और कल-कल बहते झरने इस सफर को अविस्मरणीय बना देते हैं। बारिश के मौसम में पातालपानी का विशाल झरना और चारों ओर पसरी हरियाली इस सफर की खूबसूरती में चार चांद लगा देती है।
पिछले साल 26 जुलाई से 16 नवंबर तक हुआ था संचालन
पिछले वर्ष भी मानसून के सीजन के दौरान हेरिटेज ट्रेन का सफल संचालन किया गया था। यह ट्रेन 26 जुलाई से 16 नवंबर 2025 तक हर सप्ताह शुक्रवार से रविवार के बीच चलाई गई थी। हालांकि इस वर्ष ट्रेन के रैक की आवश्यक मरम्मत और देखभाल कार्य में अधिक समय लगने के कारण इसके संचालन में थोड़ा विलंब हुआ है। अब रैक के इंदौर पहुंच जाने से पर्यटकों का इंतजार खत्म होने जा रहा है।
