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Indore: इंजीनियरिंग के छात्रों से मिले यशवंतराव होल्कर, अहिल्याबाई के समय हुए नवाचारों के रोचक किस्से सुनाए
Thu, 06 Aug 2026 03:04 PM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Thu, 06 Aug 2026 03:04 PM IST
सार
कार्यक्रम में आचार्य रत्न दास ने मानसिक नियंत्रण पर व्याख्यान दिया, वहीं उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने छात्रों को आत्मनिर्भर और विकसित भारत 2047 के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
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इंजीनियरिंग छात्रों के लिए SGSITS में खास सत्र
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
"अभियांत्रिकी केवल तकनीक नहीं, समाज के लिए समाधान खोजने की कला है। जब ज्ञान, नवाचार और सेवा एक साथ चलते हैं, तभी विकसित भारत का सशक्त भविष्य आकार लेता है।" इसी विचार के साथ श्री गोविंदराम सेकसरिया प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (SGSITS), इंदौर में आयोजित 'उद्भव-2026' प्रथम चरण इंडक्शन कार्यक्रम के द्वितीय दिवस पर विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को केंद्र में रखते हुए विविध प्रेरणादायी सत्र आयोजित किए गए।
कार्यक्रम का शुभारंभ अक्षय पात्र फाउंडेशन के आचार्य रत्न दास द्वारा 'Art of Mind Control' विषय पर प्रेरक व्याख्यान से हुआ, जिसमें विद्यार्थियों को मानसिक संतुलन, सकारात्मक सोच एवं आत्मानुशासन का महत्व बताया गया। इसके पश्चात संस्थान की छात्र गतिविधियों, एलुमनी एसोसिएशन, स्टूडेंट्स सोशल सोसाइटी, सांस्कृतिक एवं तकनीकी मंचों तथा विभिन्न छात्र क्लबों का परिचय कराया गया, जिससे नवप्रवेशित विद्यार्थी संस्थान की समृद्ध छात्र संस्कृति से परिचित हो सके।
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अहिल्याबाई के जीवन पर आधारित प्रस्तुतियां दी गई
इस अवसर पर अहिल्या लोक-कल्याण मंच द्वारा लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के जीवन, उनके आदर्शों, सुशासन, लोककल्याण, सांस्कृतिक विरासत एवं राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर आधारित प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम के दौरान एक छात्रा ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की अमर कृति 'रश्मिरथी' का ओजपूर्ण पाठ प्रस्तुत किया, जिसने सभागार में राष्ट्रभक्ति एवं आत्मगौरव का वातावरण निर्मित कर दिया।
भारत की आत्मनिर्भरता को आज पूरी दुनिया देख रही
मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की प्राचीन अभियांत्रिकी परंपरा आज देश की आधुनिक आधारभूत संरचना में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। विकसित होती सड़कें, पुल, रेलवे, मेट्रो तथा अन्य अधोसंरचनाएं नए भारत की प्रगति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता एवं कौशल विकास के माध्यम से 'विकसित भारत-2047' तथा 'विश्वगुरु भारत' के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि यशवंतराव होल्कर ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के सेवा, सुशासन और मानवीय मूल्यों पर आधारित जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उन्होंने होलकर काल में हुए नवाचारों की भी जानकारी दी। वहीं बी.एच. पाठक ने युवाओं को सामाजिक उत्तरदायित्व, महिला सशक्तिकरण एवं राष्ट्रहित में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान 'उद्भव' पत्रिका का भी विमोचन किया गया। साथ ही विद्यार्थियों को विवेकानंद नवाचार मंच, केशव पूर्वा छात्र मंडल, एकलव्य खेल स्पर्धा मंच तथा विक्रमादित्य विविध कला मंच जैसी संस्थान की प्रमुख गतिविधियों से परिचित कराया गया, जिससे वे अपनी तकनीकी दक्षता के साथ-साथ नेतृत्व, खेल, संस्कृति और नवाचार के क्षेत्रों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें। कार्यक्रम में संस्थान के वरिष्ठ प्राध्यापक, अधिकारीगण, छात्र समन्वयक, बड़ी संख्या में नवप्रवेशित विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम का शुभारंभ अक्षय पात्र फाउंडेशन के आचार्य रत्न दास द्वारा 'Art of Mind Control' विषय पर प्रेरक व्याख्यान से हुआ, जिसमें विद्यार्थियों को मानसिक संतुलन, सकारात्मक सोच एवं आत्मानुशासन का महत्व बताया गया। इसके पश्चात संस्थान की छात्र गतिविधियों, एलुमनी एसोसिएशन, स्टूडेंट्स सोशल सोसाइटी, सांस्कृतिक एवं तकनीकी मंचों तथा विभिन्न छात्र क्लबों का परिचय कराया गया, जिससे नवप्रवेशित विद्यार्थी संस्थान की समृद्ध छात्र संस्कृति से परिचित हो सके।
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अहिल्याबाई के जीवन पर आधारित प्रस्तुतियां दी गई
इस अवसर पर अहिल्या लोक-कल्याण मंच द्वारा लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के जीवन, उनके आदर्शों, सुशासन, लोककल्याण, सांस्कृतिक विरासत एवं राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर आधारित प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम के दौरान एक छात्रा ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की अमर कृति 'रश्मिरथी' का ओजपूर्ण पाठ प्रस्तुत किया, जिसने सभागार में राष्ट्रभक्ति एवं आत्मगौरव का वातावरण निर्मित कर दिया।
भारत की आत्मनिर्भरता को आज पूरी दुनिया देख रही
मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की प्राचीन अभियांत्रिकी परंपरा आज देश की आधुनिक आधारभूत संरचना में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। विकसित होती सड़कें, पुल, रेलवे, मेट्रो तथा अन्य अधोसंरचनाएं नए भारत की प्रगति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता एवं कौशल विकास के माध्यम से 'विकसित भारत-2047' तथा 'विश्वगुरु भारत' के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि यशवंतराव होल्कर ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के सेवा, सुशासन और मानवीय मूल्यों पर आधारित जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उन्होंने होलकर काल में हुए नवाचारों की भी जानकारी दी। वहीं बी.एच. पाठक ने युवाओं को सामाजिक उत्तरदायित्व, महिला सशक्तिकरण एवं राष्ट्रहित में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान 'उद्भव' पत्रिका का भी विमोचन किया गया। साथ ही विद्यार्थियों को विवेकानंद नवाचार मंच, केशव पूर्वा छात्र मंडल, एकलव्य खेल स्पर्धा मंच तथा विक्रमादित्य विविध कला मंच जैसी संस्थान की प्रमुख गतिविधियों से परिचित कराया गया, जिससे वे अपनी तकनीकी दक्षता के साथ-साथ नेतृत्व, खेल, संस्कृति और नवाचार के क्षेत्रों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें। कार्यक्रम में संस्थान के वरिष्ठ प्राध्यापक, अधिकारीगण, छात्र समन्वयक, बड़ी संख्या में नवप्रवेशित विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक उपस्थित रहे।
