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Indore News: बाल विवाह रोकने के लिए उड़न दस्तों ने संभाली कमान, अक्षय तृतीया के कार्यक्रमों पर प्रशासन की नजर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Tue, 07 Apr 2026 06:33 AM IST
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सार
Indore News: अक्षय तृतीया पर होने वाले बाल विवाहों को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी जिलों में कंट्रोल रूम और उड़न दस्ते बनाने के निर्देश दिए हैं।
बाल विवाह पर प्रशासन की पैनी नजर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगामी अक्षय तृतीया के पर्व को देखते हुए राज्य सरकार ने इंदौर समेत पूरे प्रदेश में बाल विवाह की कुप्रथा पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए कमर कस ली है। सामूहिक विवाह सम्मेलनों की आड़ में होने वाले बाल विवाहों को रोकने के लिए सभी जिलों में कंट्रोल रूम और उड़न दस्ते तैनात करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव जी.वी. रश्मि ने इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए जिला स्तर पर व्यापक अभियान चलाया जाए।
अक्षय तृतीया के कार्यक्रमों पर प्रशासन की नजर
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि मंत्रालय द्वारा संचालित बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में ऐसी घटनाओं को शून्य पर लाना और किशोरियों को सशक्त बनाना है। हालांकि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) की रिपोर्ट दर्शाती है कि प्रदेश में बाल विवाह की दरों में गिरावट आई है, लेकिन अभी भी कई जिलों में यह चिंता का विषय बना हुआ है। इस वर्ष 20 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया का योग बन रहा है, जिस दिन बड़ी संख्या में सामूहिक विवाह आयोजित किए जाते हैं। इसी संभावना को देखते हुए प्रशासन को विशेष सतर्कता और कड़ी निगरानी बरतने के लिए कहा गया है।
स्कूलों और कॉलेजों में होंगे जागरूकता कार्यक्रम
प्रशासनिक रणनीति के अनुसार, इंदौर के स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों को कम उम्र में विवाह करने के शारीरिक और मानसिक दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। 20 अप्रैल को ग्रामीण और नगरीय निकायों में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें पंच, सरपंच, सचिव और पार्षद सामूहिक रूप से बाल विवाह न होने देने की शपथ लेंगे। इसके साथ ही पंचायत और वार्ड स्तर पर कार्यालयों में पोस्टर और बैनर के माध्यम से इसका प्रचार किया जाएगा। आंगनबाड़ी और स्कूल के बच्चों द्वारा जागरूकता रैलियां भी निकाली जाएंगी ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए।
मैदानी अमले को सौंपी गई बड़ी जिम्मेदारी
ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के माध्यम से परिवारों को जागरूक किया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, ग्राम कोटवारों और पंचायत सचिवों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने क्षेत्र की 18 वर्ष से कम उम्र की किशोरियों की सूची तैयार करें। इन परिवारों को प्रशासन द्वारा समझाइश दी जाएगी और उन पर विशेष नजर रखी जाएगी। सूचना देने के लिए 181, 1098 और 112 जैसे हेल्पलाइन नंबरों का प्रचार किया जाएगा, साथ ही बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल पर भी शिकायतें दर्ज की जा सकेंगी।
सूचना दलों का गठन किया जा रहा
प्रत्येक गांव और वार्ड में विशेष सूचना दल बनाए जा रहे हैं, जिनमें शिक्षक, एएनएम, आशा कार्यकर्ता और स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। सचिव रश्मि ने निर्देश दिए हैं कि स्थानीय मीडिया, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, व्हाट्सएप ग्रुप और दीवारों पर लेखन के जरिए लोगों को विवाह की सही आयु के महत्व के बारे में बताया जाए। सरकार का लक्ष्य है कि समाज के हर वर्ग तक कम उम्र में विवाह के खतरों की जानकारी पहुंचे और इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म किया जा सके।
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अक्षय तृतीया के कार्यक्रमों पर प्रशासन की नजर
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि मंत्रालय द्वारा संचालित बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में ऐसी घटनाओं को शून्य पर लाना और किशोरियों को सशक्त बनाना है। हालांकि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) की रिपोर्ट दर्शाती है कि प्रदेश में बाल विवाह की दरों में गिरावट आई है, लेकिन अभी भी कई जिलों में यह चिंता का विषय बना हुआ है। इस वर्ष 20 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया का योग बन रहा है, जिस दिन बड़ी संख्या में सामूहिक विवाह आयोजित किए जाते हैं। इसी संभावना को देखते हुए प्रशासन को विशेष सतर्कता और कड़ी निगरानी बरतने के लिए कहा गया है।
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स्कूलों और कॉलेजों में होंगे जागरूकता कार्यक्रम
प्रशासनिक रणनीति के अनुसार, इंदौर के स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों को कम उम्र में विवाह करने के शारीरिक और मानसिक दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। 20 अप्रैल को ग्रामीण और नगरीय निकायों में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें पंच, सरपंच, सचिव और पार्षद सामूहिक रूप से बाल विवाह न होने देने की शपथ लेंगे। इसके साथ ही पंचायत और वार्ड स्तर पर कार्यालयों में पोस्टर और बैनर के माध्यम से इसका प्रचार किया जाएगा। आंगनबाड़ी और स्कूल के बच्चों द्वारा जागरूकता रैलियां भी निकाली जाएंगी ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए।
मैदानी अमले को सौंपी गई बड़ी जिम्मेदारी
ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के माध्यम से परिवारों को जागरूक किया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, ग्राम कोटवारों और पंचायत सचिवों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने क्षेत्र की 18 वर्ष से कम उम्र की किशोरियों की सूची तैयार करें। इन परिवारों को प्रशासन द्वारा समझाइश दी जाएगी और उन पर विशेष नजर रखी जाएगी। सूचना देने के लिए 181, 1098 और 112 जैसे हेल्पलाइन नंबरों का प्रचार किया जाएगा, साथ ही बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल पर भी शिकायतें दर्ज की जा सकेंगी।
सूचना दलों का गठन किया जा रहा
प्रत्येक गांव और वार्ड में विशेष सूचना दल बनाए जा रहे हैं, जिनमें शिक्षक, एएनएम, आशा कार्यकर्ता और स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। सचिव रश्मि ने निर्देश दिए हैं कि स्थानीय मीडिया, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, व्हाट्सएप ग्रुप और दीवारों पर लेखन के जरिए लोगों को विवाह की सही आयु के महत्व के बारे में बताया जाए। सरकार का लक्ष्य है कि समाज के हर वर्ग तक कम उम्र में विवाह के खतरों की जानकारी पहुंचे और इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म किया जा सके।

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