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Indore: इंदौर के पिपलियाहाना तालाब को खत्म करने की तैयारी, किनारों पर डाली सैकड़ों टन मिट्टी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Fri, 20 Feb 2026 06:00 PM IST
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सार

इंदौर का पिपलियाहाना तालाब कभी साल भर लबालब रहकर क्षेत्र में हरियाली और शीतलता बिखेरता था। इस बार  फरवरी की शुरुआत में ही आधे से ज्यादा खाली होकर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। मलबे के ढेर और गंदगी किनारों पर लहरों की जगह बिखरी पड़ी है। 

Indore: Preparations underway to destroy Indore's Pipliyahana pond, hundreds of tons of soil dumped on its ban
पिपलियाहाना तालाब अभी से सूखने लगा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

इंदौर के पूर्वी क्षेत्र में आसपास के इलाकों का भूजल स्तर बढ़ाने वाला पिपलियाहाना तालाब वर्षभर लबालब रहा करता था, लेकिन अब फरवरी में ही तालाब आधे से ज्यादा खाली हो गया है। तालाब में हर दिन पांच लाख लीटर पानी देने वाला ट्रीटमेंट प्लांट भी पूरी क्षमता से नहीं चलता और ज्यादातर समय बंद रहता है।

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इसका असर भी तालाब की संग्रहण क्षमता पर पड़ रहा है। तालाब का जिस हिस्से से प्राकृतिक बहाव आता है, वहां इंदौर विकास प्राधिकरण स्कीम-140 विकसित कर चुका है। इसके अलावा तालाब से सटाकर जिला कोर्ट की नई बिल्डिंग भी बनाई गई है। बिल्डिंग का सैकड़ों टन मलबा भी तालाब के किनारों पर डाल दिया गया है, जिस कारण इस साल तालाब बारिश में भी पूरा नहीं भर पाएगा।

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ग्रीन ट्रिब्यूनल ने तालाब के जलभराव क्षेत्र को मुक्त रखने का निर्देश दिया था, इसके बावजूद कोर्ट परिसर के निर्माण के लिए पहले तालाब के बीच में बनाई गई 12 फुट चौड़ी दीवार भी नहीं तोड़ी गई। एक अच्छे-खासे तालाब को मैदान में तब्दील करने की तैयारी की जा रही है।

इस तालाब के समीप जिला कोर्ट की नई बिल्डिंग का निर्माण भी लगभग पूरा होने को है। इसके लिए पहले तालाब की जमीन पर ही निर्माण शुरू कर दिया गया था। जन आक्रोश के कारण बिल्डिंग तो पीछे खिसक गई, लेकिन जो घाव तालाब को अब मलबे के ढेर और गंदगी के मिल रहे है। उन्हें भरने वाला कोई नहीं है। तालाब की जमीन तो बच गई, लेकिन उसे सहेजने के लिए नगर निगम की ओर से पहल नहीं हो रही है।

तालाब के समीप आधा एमएलडी क्षमता का ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया है। इस प्लांट से दो पाइप तालाब से जोड़े गए हैं, जो पांच लाख लीटर पानी पहुंचाने के लिए हैं, लेकिन इतना पानी पहुंचता नहीं है।पूर्व पार्षद समीर चिटनीस ने इस तालाब को बचाने और संवारने के लिए काफी प्रयास किए थे, लेकिन उनके निधन के बाद जनप्रतिनिधियों ने तालाब की तरफ ध्यान देना बंद कर दिया। आईडीए की स्कीम-140 में कई प्लॉट तालाब के कैचमेंट एरिया में काट दिए गए हैं। चार लेन सड़क के निर्माण के कारण दूसरी तरफ का पानी भी तालाब में आना बंद हो गया है, जिससे तालाब अब जल्दी सूख जाता है।

इनका कहना है...
पिपलियाहाना तालाब में उपचारित जल को छोड़ा जाता है। इसके लिए तालाब के पास ही एक ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया है। इसके अलावा वर्षा जल तालाब में जाए, इसकी व्यवस्था भी की गई है।
- राजेंद्र राठौर, जनकार्य व पर्यावरण समिति प्रभारी, इंदौर नगर निगम

तालाब बचाने की जिम्मेदारी नगर निगम की
हमने इस तालाब को बचाने की लड़ाई लड़ी थी। कोर्ट के निर्देश पर जिला कोर्ट की बिल्डिंग पीछे बनाई गई। इस तालाब के प्राकृतिक बहाव को बरकरार रखने की जिम्मेदारी नगर निगम की है, क्योंकि इस तालाब के कारण आसपास की कॉलोनी का भूजल स्तर अच्छा रहता है। 
- किशोर कोडवानी, सामाजिक कार्यकर्ता, इंदौर

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