MP Budget 2026: निवेश के दावे बड़े, जमीनी रोजगार छोटे, मध्य प्रदेश के विकास मॉडल पर सवाल; क्या बोले विशेषज्ञ?
MP Budget 2026: मध्य प्रदेश में आय और निवेश प्रस्ताव बढ़े हैं, लेकिन शिक्षा, रोजगार, पर्यटन और कृषि में जमीनी चुनौतियां बरकरार हैं। बढ़ते कर्ज और वित्तीय दबाव के बीच सरकार को आय बढ़ाने, खर्च नियंत्रित करने और रोजगार आधारित विकास पर फोकस करना होगा। पढ़ें
विस्तार
मध्य प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, पर्यटन, सड़क निर्माण, ग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र पर विशेष फोकस किया गया है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय और सरकार की कुल आय में वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वर्ष सरकार को टैक्स संग्रह में लगभग 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी प्राप्त हुई, जो आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत देती है। इसके बावजूद कई ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ अपेक्षित सुधार अभी भी धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा है।
पर्यटन के क्षेत्र में मध्य प्रदेश में अपार संभावनाएँ मौजूद हैं। टेंपल टूरिज्म, रिवर टूरिज्म, एजुकेशन टूरिज्म और हेल्थ टूरिज्म जैसे क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाइयाँ दे सकते हैं। इसके बावजूद पर्यटक जिस गति से प्रदेश में आने चाहिए, उस स्तर की वृद्धि देखने को नहीं मिल रही है। यह भी एक तथ्य है कि मध्य प्रदेश के नागरिक स्वयं पर्यटन के लिए प्रदेश से बाहर या विदेश जाना अधिक पसंद कर रहे हैं। यदि इस क्षेत्र में योजनाबद्ध निवेश, प्रभावी प्रचार-प्रसार और प्रशासनिक सक्रियता लाई जाए तो पर्यटन बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का माध्यम बन सकता है।
शिक्षा व्यवस्था की स्थिति अभी भी चिंता का विषय है। प्रदेश के स्कूलों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। कई विश्वविद्यालयों में लगभग 80 प्रतिशत तक प्राध्यापकों के पद रिक्त हैं और कुछ विभाग बिना स्थायी प्राध्यापक के संचालित हो रहे हैं। इसका सीधा प्रभाव शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। परिणामस्वरूप छात्रों की संख्या में कमी आ रही है और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए भोपाल, इंदौर या अन्य राज्यों की ओर रुख कर रहे हैं। यदि शिक्षा ढाँचे को सुदृढ़ नहीं किया गया तो यह दीर्घकालिक विकास को प्रभावित करेगा।
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रोजगार और निवेश के संदर्भ में सरकार ने बड़े दावे किए हैं। राज्य सरकार के अनुसार अब तक 32 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे लगभग 23 लाख नए रोजगार सृजित होने की संभावना व्यक्त की गई है। 8.57 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों के धरातल पर आने की बात कही गई है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 26 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव और 17 लाख नए रोजगार की घोषणा की गई।
रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव में भी बड़े निवेश और रोजगार सृजन के दावे किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा विभिन्न इंटरैक्टिव सत्रों और वैश्विक यात्राओं के माध्यम से निवेश आकर्षित करने के प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय हैं, किंतु इन प्रस्तावों का व्यापक क्रियान्वयन और वास्तविक रोजगार सृजन अभी अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं देता। सरकारी उद्योगों और कारखानों में वर्षों से नियुक्तियाँ नहीं हुई हैं, जिससे रोजगार का दायित्व लगभग पूरी तरह निजी क्षेत्र पर आ गया है।
सरकारी खरीद के बाद भुगतान में देरी भी
कृषि मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आधार है। राज्य की लगभग 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है और जीएसडीपी में प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 44 प्रतिशत से अधिक है। कृषि उत्पादन में वृद्धि अवश्य हुई है, लेकिन किसानों को समय पर खाद, बीज और बिजली उपलब्ध न होना बड़ी चुनौती बना हुआ है। सरकारी खरीद के बाद भुगतान में देरी भी किसानों की परेशानी बढ़ाती है। कृषि आधारित उद्योगों का विकास अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पाया है, जबकि यही क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायित्व और रोजगार प्रदान कर सकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं में पिछले दो वर्षों में विस्तार देखने को मिला है। नए मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं और विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को लाभ मिला है। फिर भी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी और निजी अस्पतालों में मरीजों के शोषण की शिकायतें बनी हुई हैं। स्वास्थ्य ढाँचे के विस्तार के साथ मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
राज्य पर कुल कर्ज लगभग 4.64 लाख करोड़ रुपये
राज्य की वित्तीय स्थिति पर दृष्टि डालें तो वर्ष 2025-26 का बजट लगभग 4.21 लाख करोड़ रुपये का है, जबकि राज्य पर कुल कर्ज लगभग 4.64 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच चुका है। राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का लगभग 4.7 प्रतिशत है। सरकार को अपने बजट का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान में खर्च करना पड़ता है। हालांकि जीएसडीपी और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हुई है, लेकिन कर्ज में निरंतर बढ़ोतरी चिंता का विषय है। सिंचाई परियोजनाओं, ऊर्जा परियोजनाओं और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर बढ़ा हुआ व्यय इसका प्रमुख कारण बताया जाता है।
इन परिस्थितियों में आवश्यक है कि सरकार वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता दे, अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखे और रोजगार आधारित विकास मॉडल को बढ़ावा दे। शिक्षा में शिक्षक भर्ती, कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना, पर्यटन का सुनियोजित विकास, आईटी और रियल एस्टेट क्षेत्र को प्रोत्साहन तथा ग्राम आधारित अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को मजबूत कर शहरी पलायन को रोका जा सकता है।
आगामी बजट ऐसा होना चाहिए जो केवल व्यय आधारित न होकर आय सृजन आधारित हो। युवाओं, शिक्षा और रोजगार को केंद्र में रखकर यदि विकास की रणनीति तैयार की जाती है, तो मध्य प्रदेश आर्थिक रूप से अधिक सशक्त और संतुलित विकास की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

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