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सावन विशेष: राजबाड़ा के समीप है नागेश्वर महादेव मंदिर, नागपंचमी पर होता है विशेष पूजन
Mon, 17 Aug 2026 09:01 AM IST
इंदौर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
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Published by: इंदौर ब्यूरो
Updated Mon, 17 Aug 2026 09:01 AM IST
सार
इंदौर के राजबाड़ा के समीप वनखंडी राम मंदिर परिसर में स्थित नागेश्वर महादेव मंदिर करीब 114 वर्ष पुराना है। वर्ष 1912 में तुकोजीराव तृतीय के कार्यकाल में मंदिर का निर्माण हुआ था। मान्यता के अनुसार, मंदिर निर्माण से पहले नाग-नागिन का जोड़ा रामजी की मूर्ति के समीप आकर बैठा था, जिसके बाद यहां नागेश्वर महादेव मंदिर बनाने का निर्णय लिया गया।
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नागेश्वर महादेव मंदिर
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
दसवीं-ग्यारहवीं शताब्दी में निर्मित उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की तीसरी मंजिल स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर वर्ष में एक बार खुलता है। इसके दर्शन करने के लिए भक्तों की रात से ही भीड़ एकत्र हो जाती है। नागपंचमी पर शिवजी के प्रिय नाग देवता के मंदिर में दर्शन का विशेष महत्व है। एक संयोग है कि 23 साल बाद सावन सोमवार और नागपंचमी एक साथ मनाई जाएगी।
इंदौर के महाराजा मल्हारराव होलकर की पुत्रवधू देवी अहिल्याबाई शिव भक्त थीं, इसलिए रियासत में कई प्राचीन शिव मंदिर स्थित हैं। इंदौर शहर के हृदय स्थल राजबाड़ा के समीप प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर, बांके बिहारी मंदिर, गोपाल मंदिर, हनुमान और दुर्गा देवी मंदिर स्थित हैं। राजबाड़े के सामने स्थित वनखंडी राम मंदिर परिसर में नागेश्वर महादेव मंदिर नगर का प्राचीन शिव मंदिर है।
यह मंदिर शहर के व्यस्त क्षेत्र में होने और आसपास दुकानों की अधिकता होने के कारण अब चारों ओर से खुला नहीं है। मंदिर का द्वार काफी छोटा है। नागेश्वर महादेव का यह मंदिर 114 वर्ष प्राचीन है और समीप के दुकानदारों की आस्था का केंद्र है। इस मंदिर में भी नागपंचमी पर विशेष पूजन किया जाता है।
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सर्प का जोड़ा आकर बैठ गया था
मंदिर में पूजन कार्य करने वाली तीसरी पीढ़ी के 84 वर्षीय पुजारी पंडित हरिशंकर त्रिवेदी का कहना है कि पीढ़ियों से उनका परिवार मंदिर की पूजा का दायित्व निभा रहा है। त्रिवेदी के अनुसार, 1912 में मंदिर निर्माण का निर्णय लिया गया, इसलिए भवन तोड़ना पड़ा था। उसी दौरान नाग-नागिन का जोड़ा रामजी की मूर्ति के समीप आकर बैठ गया था। पूजन के बाद निर्णय लिया गया कि रामजी की प्रतिमा के समीप ही नागेश्वर शिव मंदिर का निर्माण किया जाएगा।
हालांकि, कुछ समय बाद सर्प का जोड़ा चला गया। सभी की सहमति से 1912 में नागेश्वर महादेव की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। शहर के मध्य से बहने वाली कान्ह नदी के समीप घने वन थे। इसलिए यहां पेड़ों की अधिकता के कारण मंदिर का नामकरण वनखंडी राम मंदिर रखा गया था। विकास और निर्माण कार्यों के कारण अब इस क्षेत्र में पेड़ दुर्लभ हो गए हैं।
ये भी पढ़ें- MP: पिस्टल के साथ फोटो वायरल हुई तो घर पहुंची पुलिस, अलमारी खोली तो मिले तीन करोड़ रुपये; जांच शुरू
देवी अहिल्या की प्रतिमा भी लगी
यह मंदिर प्राचीन होने के कारण समय-समय पर इसका जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन मंदिर की दीवारें प्राचीन हैं, जो काफी मोटी हैं। मंदिर की दीवारों में आलिये (कुछ रखने का स्थान) अधिक संख्या में हैं, जिनमें मूर्तियां रखी हैं। एक आलिये में देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा स्थापित है।
1912 में तुकोजीराव तृतीय के कार्यकाल में हुआ निर्माण
नागेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण 1912 में हुआ। मंदिर जिस वक्त निर्मित हुआ, उस समय होलकर रियासत के प्रमुख तुकोजीराव तृतीय थे। तुकोजीराव तृतीय ने जब राज्य की कमान संभाली, तब उनकी आयु मात्र 12 वर्ष थी। इसलिए राज्य का संचालन एक परिषद करती थी, जिसके प्रमुख प्रधानमंत्री नानकचंद थे। मंदिर निर्माण में राज परिवार का सहयोग रहा। बाद में मंदिर को लेकर कई विवाद भी हुए। बारह वर्ष तक न्यायालय में विवाद चला, लेकिन रामजी और नागेश्वर का मंदिर होने के कारण वे विजयी रहे और मंदिर अपने स्थान पर आज भी कायम है।
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इंदौर के महाराजा मल्हारराव होलकर की पुत्रवधू देवी अहिल्याबाई शिव भक्त थीं, इसलिए रियासत में कई प्राचीन शिव मंदिर स्थित हैं। इंदौर शहर के हृदय स्थल राजबाड़ा के समीप प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर, बांके बिहारी मंदिर, गोपाल मंदिर, हनुमान और दुर्गा देवी मंदिर स्थित हैं। राजबाड़े के सामने स्थित वनखंडी राम मंदिर परिसर में नागेश्वर महादेव मंदिर नगर का प्राचीन शिव मंदिर है।
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यह मंदिर शहर के व्यस्त क्षेत्र में होने और आसपास दुकानों की अधिकता होने के कारण अब चारों ओर से खुला नहीं है। मंदिर का द्वार काफी छोटा है। नागेश्वर महादेव का यह मंदिर 114 वर्ष प्राचीन है और समीप के दुकानदारों की आस्था का केंद्र है। इस मंदिर में भी नागपंचमी पर विशेष पूजन किया जाता है।
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सर्प का जोड़ा आकर बैठ गया था
मंदिर में पूजन कार्य करने वाली तीसरी पीढ़ी के 84 वर्षीय पुजारी पंडित हरिशंकर त्रिवेदी का कहना है कि पीढ़ियों से उनका परिवार मंदिर की पूजा का दायित्व निभा रहा है। त्रिवेदी के अनुसार, 1912 में मंदिर निर्माण का निर्णय लिया गया, इसलिए भवन तोड़ना पड़ा था। उसी दौरान नाग-नागिन का जोड़ा रामजी की मूर्ति के समीप आकर बैठ गया था। पूजन के बाद निर्णय लिया गया कि रामजी की प्रतिमा के समीप ही नागेश्वर शिव मंदिर का निर्माण किया जाएगा।
हालांकि, कुछ समय बाद सर्प का जोड़ा चला गया। सभी की सहमति से 1912 में नागेश्वर महादेव की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। शहर के मध्य से बहने वाली कान्ह नदी के समीप घने वन थे। इसलिए यहां पेड़ों की अधिकता के कारण मंदिर का नामकरण वनखंडी राम मंदिर रखा गया था। विकास और निर्माण कार्यों के कारण अब इस क्षेत्र में पेड़ दुर्लभ हो गए हैं।
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देवी अहिल्या की प्रतिमा भी लगी
यह मंदिर प्राचीन होने के कारण समय-समय पर इसका जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन मंदिर की दीवारें प्राचीन हैं, जो काफी मोटी हैं। मंदिर की दीवारों में आलिये (कुछ रखने का स्थान) अधिक संख्या में हैं, जिनमें मूर्तियां रखी हैं। एक आलिये में देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा स्थापित है।
1912 में तुकोजीराव तृतीय के कार्यकाल में हुआ निर्माण
नागेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण 1912 में हुआ। मंदिर जिस वक्त निर्मित हुआ, उस समय होलकर रियासत के प्रमुख तुकोजीराव तृतीय थे। तुकोजीराव तृतीय ने जब राज्य की कमान संभाली, तब उनकी आयु मात्र 12 वर्ष थी। इसलिए राज्य का संचालन एक परिषद करती थी, जिसके प्रमुख प्रधानमंत्री नानकचंद थे। मंदिर निर्माण में राज परिवार का सहयोग रहा। बाद में मंदिर को लेकर कई विवाद भी हुए। बारह वर्ष तक न्यायालय में विवाद चला, लेकिन रामजी और नागेश्वर का मंदिर होने के कारण वे विजयी रहे और मंदिर अपने स्थान पर आज भी कायम है।
