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नर्मदापुरम के युवाओं की पहल: पक्षियों की प्यास बुझाने पेड़ों पर बांधे सैकड़ों सकोरे, खाने की भी करते हैं व्यवस्था
Thu, 24 Mar 2022 02:05 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नर्मदापुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नर्मदापुरम
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Thu, 24 Mar 2022 02:05 PM IST
सार
नर्मदापुरम के कुछ युवा गर्मियों में पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए पहल कर रहे हैं। ये युवाओं की टोली शहरभर के पेड़ों पर सकोरे बांध रहे हैं और उनमें पानी भर रहे हैं। दाने-पानी का खर्च भी युवा मिलकर वहन कर रहे हैं।
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पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए युवा आगे आ रहे हैं।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
इन दिनों नर्मदापुरम में जमकर गर्मी पड़ रही है। बुधवार को 41 डिग्री पर तापमान था। ऐसे में पक्षियों की पानी की कमी से मौत न हो, उसके लिए शहर के युवाओं ने पहल की है। ऐसे ही प्रयास में लगे युवा राकेश रघुवंशी ने बताया कि भीषण गर्मी में पक्षियों को भी पानी की बेहद जरूरत होती है। हमारे साथियों ने मिलकर इस पर विचार किया गया और सड़क किनारे लगे पेड़ों पर सकोरे (पक्षियों के लिए पानी से भरा कटोरा) लगाए हैं। प्लास्टिक के बाउल नुमा इन सकोरों में रस्सी बांधकर पेड़ों पर लटकाया जा रहा है। इनमें पक्षियों के लिए पानी और दाना डाला जाता है। यहां पक्षी झुंड बनाकर आते हैं और सकोर के ऊपर बैठकर दाना पानी लेते हैं। राकेश ने बताया कि यूं तो लोग घरों में सकोरे रखकर पक्षियों के पानी की व्यवस्था करते हैं, लेकिन यह बहुत कम संख्या में होती है। यह मुहिम जून तक चलाएंगे।
दोपहर में जहां लोग गर्मी से बचने के लिए कूलर-एसी के पास पहुंच जाते हैं। वहीं युवाओं की यह टोली बोतलों में पानी लेकर सड़कों पर निकल जाती है। बोतलों के पानी से पेड़ों पर बांधे गए सकोरे भरे जाते हैं। सकोरों में दाना भी डाला जाता है। राकेश ने बताया कि सकोरों में पानी भरने के लिए हमारी टोली के सदस्यों के अलावा लोग भी जिम्मेदारी ले रहे हैं। बाजार में लगे सकोरों में निरंतर पानी भरने दाना रखने के लिए आसपास के दुकानदार भी आगे आए हैं।
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दोपहर में जहां लोग गर्मी से बचने के लिए कूलर-एसी के पास पहुंच जाते हैं। वहीं युवाओं की यह टोली बोतलों में पानी लेकर सड़कों पर निकल जाती है। बोतलों के पानी से पेड़ों पर बांधे गए सकोरे भरे जाते हैं। सकोरों में दाना भी डाला जाता है। राकेश ने बताया कि सकोरों में पानी भरने के लिए हमारी टोली के सदस्यों के अलावा लोग भी जिम्मेदारी ले रहे हैं। बाजार में लगे सकोरों में निरंतर पानी भरने दाना रखने के लिए आसपास के दुकानदार भी आगे आए हैं।
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