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Jabalpur News: शादी का झांसा देकर दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज करवाने वाली निकली पत्नी, पति को मिली अग्रिम जमानत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jun 2026 08:55 AM IST
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सार
भोपाल के फराज खान को दुष्कर्म मामले में हाईकोर्ट से सशर्त अग्रिम जमानत मिली। सुनवाई में आवेदक ने शिकायतकर्ता को अपनी पत्नी बताते हुए उसका पासपोर्ट पेश किया। अदालत ने दस्तावेजों और तथ्यों पर विचार करते हुए जमानत दी तथा चार्जशीट दाखिल होने तक नियमित रूप से थाने में हाजिरी लगाने के निर्देश दिए।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दुष्कर्म के आरोप में दर्ज अपराध में अग्रिम जमानत की सुनवाई के दौरान आवेदन की तरफ से हाईकोर्ट को बताया गया कि एफआईआर दर्ज करवाने वाली उसकी पत्नी है। पत्नी का आरोप है कि शादी का झांसा देकर वह गत चार साल से उसका दैहिक शोषण कर रहा था। आवेदक की तरफ से सुनवाई के दौरान पत्नी का पासपोर्ट भी पेश किया गया। इसका विरोध सरकार की तरफ से नहीं किया गया। हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा ने एकलपीठ ने सुनवाई के बाद आवेदक को सशर्त अग्रिम जमानत का लाभ प्रदान किया है।
भोपाल निवासी फराज खान की तरफ से दायर किए गए आवेदन में कहा गया था कि शाहजहांनाबाद पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ 376 ए,323 ए, 506 और 376 (2) के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है। एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता का आरोप है कि शादी का झांसा देकर आवेदक ने गत 2022 से 2026 तक उसका दैहिक शोषण किया। आवेदक की तरफ से तर्क दिया गया कि शिकायतकर्ता उसकी पत्नी है। आवेदक ने इस संबंध में दस्तावेज के रूप में शिकायतकर्ता का पासपोर्ट भी पेश किया गया।
ये भी पढ़ें- जबलपुर में खौफनाक हादसा: दो डंपरों के बीच फंसी स्कॉर्पियो में लगी आग, बाहर भी नहीं निकलने सके; दो जिंदा जले
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शासकीय अधिवक्ता तथा आपत्तिकर्ता की तरफ से अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए एकलपीठ को बताया कि आवेदक आदतन अपराधी है। उसके खिलाफ दो आपराधिक मामले दर्ज हैं। सुनवाई के दौरान वह इस तथ्य का खंडन नहीं कर सके कि कथित अपराध 2022 से 2026 तक जारी रहा। इसके अलावा दस्तावेज के तौर पर पेश किए गए पासपोर्ट से संकेत मिलता है कि शिकायतकर्ता वर्तमान आवेदक की पत्नी है। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद आवेदक को सशर्त जमानत का लाभ प्रदान किया। एकलपीठ ने आवेदक को निर्देशित किया है कि चार्ज.शीट दाखिल होने तक हर महीने के पहले हफ्ते में संबंधित पुलिस स्टेशन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराए और जांच में सहयोग करे। सहयोग न करने की स्थिति में जमानत अपने आप रद्द हो जाएगी।
भोपाल निवासी फराज खान की तरफ से दायर किए गए आवेदन में कहा गया था कि शाहजहांनाबाद पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ 376 ए,323 ए, 506 और 376 (2) के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है। एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता का आरोप है कि शादी का झांसा देकर आवेदक ने गत 2022 से 2026 तक उसका दैहिक शोषण किया। आवेदक की तरफ से तर्क दिया गया कि शिकायतकर्ता उसकी पत्नी है। आवेदक ने इस संबंध में दस्तावेज के रूप में शिकायतकर्ता का पासपोर्ट भी पेश किया गया।
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शासकीय अधिवक्ता तथा आपत्तिकर्ता की तरफ से अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए एकलपीठ को बताया कि आवेदक आदतन अपराधी है। उसके खिलाफ दो आपराधिक मामले दर्ज हैं। सुनवाई के दौरान वह इस तथ्य का खंडन नहीं कर सके कि कथित अपराध 2022 से 2026 तक जारी रहा। इसके अलावा दस्तावेज के तौर पर पेश किए गए पासपोर्ट से संकेत मिलता है कि शिकायतकर्ता वर्तमान आवेदक की पत्नी है। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद आवेदक को सशर्त जमानत का लाभ प्रदान किया। एकलपीठ ने आवेदक को निर्देशित किया है कि चार्ज.शीट दाखिल होने तक हर महीने के पहले हफ्ते में संबंधित पुलिस स्टेशन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराए और जांच में सहयोग करे। सहयोग न करने की स्थिति में जमानत अपने आप रद्द हो जाएगी।

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