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Jabalpur News: नर्सिंग कॉलेजों में 100% महिला आरक्षण की आपत्ति याचिका पर सुनवाई, पुरुषों के लिए आवेदन खुले

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Wed, 07 Jan 2026 09:34 PM IST
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सार

शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में महिलाओं को 100 प्रतिशत आरक्षण देने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। कर्मचारी चयन मंडल द्वारा पुरुष उम्मीदवारों के लिए आवेदन का संशोधित विज्ञापन जारी किए जाने के बाद कोर्ट ने याचिकाओं का निराकरण कर दिया।

Jabalpur News: HC hears plea against 100% women reservation in nursing colleges; recruitment opened for men
मप्र हाईकोर्ट
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विस्तार
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और अन्य पदों पर महिलाओं को 100 प्रतिशत आरक्षण देने के खिलाफ दायर आधा दर्जन याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने अदालत को बताया कि भर्ती प्रक्रिया के लिए संशोधित विज्ञापन जारी कर दिया गया है और पुरुष उम्मीदवारों के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 13 जनवरी निर्धारित की गई है।
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जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने मंडल द्वारा प्रस्तुत जानकारी को रिकॉर्ड में लेते हुए याचिकाओं का निराकरण कर दिया।

जबलपुर निवासी नौशाद अली सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिकाओं में कहा था कि एमपी कर्मचारी चयन मंडल की ग्रुप-1 सब-ग्रुप-2 संयुक्त भर्ती परीक्षा 2025 के विज्ञापन में असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर तथा सिस्टर ट्यूटर के कुल 286 पदों पर महिलाओं को 100 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था। इसमें 40 एसोसिएट प्रोफेसर, 28 असिस्टेंट प्रोफेसर और 218 सिस्टर ट्यूटर के पद शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इस विज्ञापन से पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर कर दिया गया था।
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याचिका में आरोप लगाया गया था कि लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा की जा रही भर्ती संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन करती है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंद्रा साहनी मामले में तय 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का भी प्रयोग नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत महिलाओं को अधिकतम 35 प्रतिशत आरक्षण ही दिया जा सकता है और इंडियन नर्सिंग काउंसिल के नियम भी लिंग आधारित भेदभाव की अनुमति नहीं देते।

उनका कहना था कि संविधान के अनुच्छेद 16(2) के तहत केवल लिंग के आधार पर किसी नागरिक को सरकारी नौकरी से वंचित करना भेदभाव माना जाता है। सरकार की ओर से पेश जानकारी को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने पैरवी की।

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