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MP News: हाईकोर्ट ने प्रोबेशन अवधि के दौरान वेतन कटौती को असंवैधानिक बताया, सरकार को बकाया लौटाने के आदेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Thu, 08 Jan 2026 10:18 PM IST
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सार
राज्य सरकार द्वारा प्रोबेशन अवधि में कर्मचारियों के वेतन से की जाने वाली कटौती को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने इसे असंवैधानिक बताते हुए सरकार को यह राशि वापस करने का आदेश दिया है।
प्रोबेशन काल में दिया जाए पूर्ण वेतन
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विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रोबेशन अवधि के दौरान न्यूनतम वेतन में कटौती किए जाने को असंवैधानिक ठहराते हुए सरकार को यह राशि वापस करने का आदेश दिया है। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने स्पष्ट कहा कि तीन वर्षों के प्रोबेशन काल में भी कर्मचारियों को 100% वेतनमान दिया जाना चाहिए।
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याचिकाकर्ता स्वाति जैन, आदित्य मिश्रा सहित अन्य कर्मचारियों की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने दिसंबर 2019 में एक सर्कुलर जारी किया था। इस सर्कुलर के अनुसार प्रोबेशन अवधि के पहले, दूसरे और तीसरे वर्ष में न्यूनतम वेतनमान का क्रमशः 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन दिया जाना था। चौथे वर्ष से ही 100 प्रतिशत वेतनमान लागू होना था। इसी सर्कुलर के बाद कर्मचारियों के वेतन से उक्त कटौती शुरू कर दी गई थी।
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याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई में हाईकोर्ट ने वर्ष 2023 में ही वेतन से कटौती पर रोक लगा दी थी। आगे की सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि इंदौर खंडपीठ पहले ही इंदौर नगर निगम के एक मामले में यह स्पष्ट कर चुकी है कि जब कर्मचारियों से नियमित काम लिया जा रहा है तो प्रोबेशन अवधि में अलग-अलग स्लैब में कम सैलरी देने का कोई औचित्य नहीं है। समान काम के लिए समान वेतन के सिद्धांत के अनुसार कर्मचारी पूर्ण वेतनमान के हकदार हैं।
सुनवाई के बाद युगलपीठ ने कर्मचारियों के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए कटौती को अनुचित करार दिया और निर्देश दिया कि प्रोबेशन काल में भी 100 प्रतिशत वेतन दिया जाए तथा काटी गई पूरी राशि कर्मचारियों को लौटाई जाए।
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