Jabalpur: पीएससी पास प्रोफेसर को देर से मिली पदोन्नति! नियमितीकरण विवाद में हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
नियमितीकरण और पदोन्नति में कथित भेदभाव के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। खंडवा के एक प्रोफेसर की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर तय की है।
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नियमितीकरण और पदोन्नति में कथित भेदभाव के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद अगली सुनवाई 15 सितंबर निर्धारित की है।
खंडवा के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर पदस्थ डॉ. सोमपाल सिंह की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि उनकी नियुक्ति वर्ष 1989 में सहायक प्रोफेसर के पद पर हुई थी। इसके बाद उन्होंने वर्ष 1993 में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की परीक्षा उत्तीर्ण की और वर्ष 1994 में उन्हें सहायक प्रोफेसर के पद पर नियमित किया गया। हालांकि, उन्हें नियमितीकरण और पदोन्नति का लाभ बाद की तिथि से दिया गया।
याचिका में कहा गया है कि एक अन्य प्रोफेसर, जिन्होंने एमपीपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की थी, उन्हें नियुक्ति की मूल तिथि से नियमितीकरण का लाभ देते हुए 1 जनवरी 2006 से प्रोफेसर पद पर पदोन्नति दे दी गई। जबकि याचिकाकर्ता ने एमपीपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बावजूद उन्हें 1 जनवरी 2008 से प्रोफेसर पद पर पदोन्नति का लाभ दिया गया।
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याचिकाकर्ता ने मांग की है कि उन्हें भी वर्ष 1989 से नियमितीकरण का लाभ दिया जाए और उसी आधार पर पदोन्नति सहित अन्य सभी सेवा लाभ प्रदान किए जाएं। याचिका में प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, संचालक उच्च शिक्षा, मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) के सचिव तथा डॉ. अविनाश दुबे को पक्षकार बनाया गया है। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
