जिले के लालबर्रा वन परिक्षेत्र अंतर्गत बिहियाटिकुर बीट में बुधवार को एक नर बाघ का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। बाघ के शरीर पर चोट और दांतों के निशान मिले हैं। प्रारंभिक जांच में उसकी मौत आपसी क्षेत्रीय संघर्ष (टेरिटोरियल फाइट) के कारण होने की आशंका जताई जा रही है।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में लेकर डॉग स्क्वॉड की मदद से सर्चिंग अभियान चलाया। तलाशी के दौरान कोई भी संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई। जांच में बाघ के सभी अंग, नाखून, दांत और मूंछें सुरक्षित पाए गए। अधिकारियों ने घटनास्थल का पंचनामा तैयार कर फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए।
ये भी पढ़ें- एआई, डेटा साइंस, ब्लॉकचेन... नई इंजीनियरिंग ब्रांचों से छात्रों ने बनाई दूरी, सीएसई का दबदबा बरकरार
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के निर्धारित प्रोटोकॉल और भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार वन्यजीव चिकित्सकों की टीम ने बाघ का पोस्टमार्टम किया। इस दौरान रक्त, विसरा, ऊतक और बाल सहित आवश्यक जैविक नमूने वैज्ञानिक परीक्षण के लिए सुरक्षित कर सीलबंद किए गए। पोस्टमार्टम के बाद नियमानुसार बाघ के शव का अंतिम संस्कार किया गया।
वन्यजीव विशेषज्ञों और चिकित्सकों के अनुसार प्रथम दृष्टया बाघ का शव लगभग एक दिन पुराना प्रतीत होता है। उसके शरीर पर दांतों के निशान मिले हैं, जिससे क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई में मौत होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि फॉरेंसिक और अन्य वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल वन विभाग पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहा है और सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है।