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Jabalpur News: यूनियन कार्बाइड परिसर में बनेगा भोपाल गैस मेमोरियल, हाईकोर्ट में सरकार ने दी जानकारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Fri, 13 Mar 2026 10:39 PM IST
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सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सरकार ने जानकारी दी कि भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर में भोपाल गैस मेमोरियल बनाया जाएगा। इसके लिए परिसर की सफाई, टॉक्सिक वेस्ट हटाने और डिटॉक्सिफिकेशन के लिए शॉर्ट टेंडर जारी करने का निर्णय लिया गया है।

Bhopal Gas Memorial to be constructed in Union Carbide campus
जबलपुर हाईकोर्ट।
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विस्तार

भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर में भोपाल गैस मेमोरियल बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस संबंध में आयोजित बैठक में परिसर की सफाई, टॉक्सिक वेस्ट को हटाने, आसपास की प्रदूषित मिट्टी और भूजल के सुधार के साथ ही खराब प्लांट स्ट्रक्चर के डिटॉक्सिफिकेशन और डीकंटैमिनेशन पर चर्चा की गई।

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बैठक में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा पर्यावरण संरक्षण नियम-2025 के तहत इन कार्यों के लिए शॉर्ट टेंडर जारी करने का निर्णय लिया गया है। इस मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से यह जानकारी पेश की गई।

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हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक कुमार सिंह और जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की युगलपीठ ने सुनवाई के बाद सरकार को निर्देश दिया कि निर्धारित प्रक्रिया को जारी रखा जाए और कार्ययोजना की विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए।


जानें कब और किसने दायर की थी याचिका
गौरतलब है कि वर्ष 2004 में आलोक प्रताप सिंह ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के निस्तारण की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई स्वतः संज्ञान याचिका के रूप में कर रहा है। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश रिपोर्ट में बताया गया था कि न्यायालय के आदेश के अनुसार यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का निस्तारण पीथमपुर स्थित सुविधा केंद्र में सफलतापूर्वक कर दिया गया है। जहरीले कचरे से करीब 900 मीट्रिक टन राख और अवशेष एकत्रित हुए हैं।

इस बीच हाईकोर्ट में दायर एक अन्य याचिका में कहा गया था कि जहरीले कचरे से निकली राख और अवशेषों में रेडियोएक्टिव तत्व सक्रिय हो सकते हैं, जो चिंता का विषय है। याचिका में यह भी कहा गया था कि राख में मरकरी मौजूद है, जिसे नष्ट करने की तकनीक फिलहाल केवल जापान और जर्मनी के पास है। साथ ही यह आरोप भी लगाया गया कि आबादी वाले क्षेत्र से मात्र 500 मीटर की दूरी पर लैंडफिलिंग की जा रही है।

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हाईकोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई मुख्य याचिका के साथ करने के निर्देश दिए थे। सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने 8 अक्टूबर 2025 को जारी अपने आदेश में आबादी से मात्र 500 मीटर दूर लैंडफिलिंग के लिए तय स्थान पर रोक लगा दी थी। हालांकि बाद में सरकार के आवेदन पर अदालत ने यह आदेश वापस ले लिया था।

पिछली सुनवाई में सरकार ने अदालत को बताया था कि जहरीले कचरे से निकली राख की लैंडफिलिंग का कार्य पूरा कर लिया गया है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान भी सरकार की ओर से इसी संबंध में विस्तृत जानकारी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई।

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