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Jabalpur: कान्हा में बाघों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त, 2 हजार श्वानों का टीकाकरण; सरकार से मांगा पूरा एक्शन प्लान

Fri, 10 Jul 2026 01:45 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Fri, 10 Jul 2026 01:45 PM IST
सार

कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की संदिग्ध मौतों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। सरकार ने अदालत को बताया कि कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की रोकथाम के लिए कान्हा से लगे क्षेत्रों में 2 हजार श्वानों का टीकाकरण किया गया है।

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Dogs vaccinated at Kanha National Park to prevent Canine Distemper Virus
- फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कान्हा नेशनल पार्क में बाघों की संदिग्ध मौतों को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) की रोकथाम के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व से लगे सीमावर्ती क्षेत्रों में करीब 2 हजार श्वानों का टीकाकरण किया जा चुका है। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को तय की है।

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बाघों की मौत को लेकर दायर हुई थी जनहित याचिका
मुंबई के चेंबूर निवासी अधिवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा तय सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होने के कारण कान्हा में बाघों की मौत के मामले बढ़े हैं। याचिका में बताया गया कि अप्रैल में कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन सुनैना, बाघिन अमाही और उसके चार अर्धवयस्क शावकों की मौत हो गई थी। रिपोर्ट के अनुसार मौत से पहले उनकी शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ रही थी और इन मौतों के पीछे कैनाइन डिस्टेंपर वायरस होने की आशंका जताई गई।
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इसके अलावा 19 मई 2026 को युवा नर बाघ महावीर की भी मौत हुई, जिसकी वजह भी संभावित रूप से यही वायरस बताया गया। इसी दौरान बालाघाट और किसली क्षेत्र में दो अन्य वयस्क नर बाघ भी मृत पाए गए। याचिका में कहा गया कि सिर्फ एक महीने के भीतर कान्हा में आठ बाघों की मौत हुई, जो बेहद चिंताजनक है।
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हाईकोर्ट ने पहले भी दिए थे सुरक्षा के निर्देश
जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस वी.पी. शर्मा की खंडपीठ ने पहले ही केंद्र और राज्य सरकार को बाघों की सुरक्षा के लिए रोकथाम और उपचारात्मक उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। गुरुवार को हुई सुनवाई में सरकार ने अदालत को श्वानों के टीकाकरण की जानकारी दी।

सभी टाइगर रिजर्व में वैक्सीनेशन की मांग
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि यह वायरस प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व में भी फैल सकता है। इसलिए मध्य प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व के आसपास रहने वाले श्वानों का भी टीकाकरण कराया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने यह मुद्दा भी उठाया कि सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में टाइगर रिजर्व में खाली पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक रिक्त पद नहीं भरे गए हैं। साथ ही केंद्र सरकार द्वारा टाइगर रिजर्व के लिए पर्याप्त फंड जारी नहीं किए जाने का भी मुद्दा अदालत के सामने रखा गया।


तीन अहम मुद्दों पर मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार को तीन प्रमुख मुद्दों पर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इनमें अन्य टाइगर रिजर्व में श्वानों के टीकाकरण, खाली पदों पर नियुक्ति और टाइगर रिजर्व के लिए फंड उपलब्ध कराने का मामला शामिल है। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह और प्रतीक रूसिया ने पैरवी की।

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