{"_id":"6a4fd9162a4732ef06048977","slug":"the-high-court-has-deemed-the-arrest-process-of-three-congress-it-cell-workers-from-bhopal-as-illegal-detention-jabalpur-news-c-1-1-noi1229-4485467-2026-07-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jabalpur News: कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट सख्त, अवैध हिरासत मानकर जांच के दिए आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jabalpur News: कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट सख्त, अवैध हिरासत मानकर जांच के दिए आदेश
Fri, 10 Jul 2026 01:09 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jul 2026 01:09 PM IST
सार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी प्रक्रिया को अवैध हिरासत मानते हुए अहम आदेश जारी किए हैं। अदालत ने भोपाल पुलिस को पीड़ितों के बयान के आधार पर दर्ज एफआईआर की विधिवत जांच करने और राजस्थान पुलिस के संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच तार्किक निष्कर्ष तक जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
कांग्रेस आईटी सेल गिरफ्तारी केस में हाईकोर्ट की सख्ती
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को राजस्थान पुलिस द्वारा भोपाल साइबर क्राइम सेल के सहयोग से हिरासत में लेने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने गिरफ्तारी की पूरी प्रक्रिया को अवैध हिरासत माना है। हाईकोर्ट ने भोपाल पुलिस को पीड़ितों के बयान के आधार पर दर्ज एफआईआर की विधिवत जांच करने और राजस्थान पुलिस के संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच तार्किक निष्कर्ष तक जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने कहा- याचिका का उद्देश्य पूरा हुआ
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करने का उद्देश्य काफी हद तक पूरा हो चुका है। इसी आधार पर अदालत ने याचिकाओं का निराकरण करते हुए जांच संबंधी जरूरी निर्देश जारी किए।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के नाम से वायरल हुए कथित फर्जी पत्र से जुड़ा है। इस मामले में राजस्थान पुलिस ने मध्य प्रदेश पुलिस के सहयोग से कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े खिजर खान सहित तीन युवकों को हिरासत में लिया था। तीनों की ओर से हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर आरोप लगाया गया कि उन्हें 19 अप्रैल की रात से 20 अप्रैल की रात और अगले दिन दोपहर तक भोपाल साइबर क्राइम थाने में अवैध रूप से रखा गया। इस दौरान उन्हें किसी भी मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया।
विज्ञापन
राजस्थान और भोपाल पुलिस ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि राजस्थान पुलिस की मौखिक सूचना पर तीनों युवकों को पूछताछ के लिए साइबर क्राइम थाने बुलाया गया था। पूछताछ के बाद उन्हें परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। बाद में राजस्थान पुलिस ने फोन पर एफआईआर दर्ज होने की जानकारी दी। अगले दिन तीनों को दोबारा साइबर सेल बुलाया गया और राजस्थान पुलिस के पहुंचने पर उन्हें सौंप दिया गया।
सीसीटीवी फुटेज और बयान मंगाए गए
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित थाने की सीसीटीवी फुटेज तलब की थी। साथ ही मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जबलपुर को तीनों युवकों के अलग-अलग बयान दर्ज करने के निर्देश दिए थे। बयान में तीनों युवकों ने राजस्थान और मध्य प्रदेश पुलिस की ओर से पेश की गई कहानी को गलत बताया। इसके बाद हाईकोर्ट ने पीड़ितों के बयान को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत शिकायत मानते हुए भोपाल पुलिस को कानून के मुताबिक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
एफआईआर दर्ज, विभागीय जांच भी जारी
सुनवाई के दौरान भोपाल पुलिस ने अदालत को बताया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज बयानों के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। वहीं राजस्थान पुलिस के अधिकारियों ने अदालत को बताया कि प्रारंभिक जांच में प्रक्रिया का पालन नहीं करने के कारण पुलिसकर्मी सज्जन सिंह के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
हाईकोर्ट के अंतिम निर्देश
खंडपीठ ने कहा कि भोपाल पुलिस एफआईआर की निष्पक्ष और विधिवत जांच जारी रखे। वहीं जयपुर में संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय जांच कानून के अनुसार तार्किक निष्कर्ष तक जारी रहे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संबंधित व्यक्ति चाहे तो कथित गैर-कानूनी हिरासत के आधार पर मुआवजा या अन्य राहत के लिए सक्षम अदालत या उचित मंच का दरवाजा खटखटा सकता है। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता हरजस सिंह छाबड़ा ने पैरवी की।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने कहा- याचिका का उद्देश्य पूरा हुआ
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करने का उद्देश्य काफी हद तक पूरा हो चुका है। इसी आधार पर अदालत ने याचिकाओं का निराकरण करते हुए जांच संबंधी जरूरी निर्देश जारी किए।
विज्ञापन
क्या है पूरा मामला?
यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के नाम से वायरल हुए कथित फर्जी पत्र से जुड़ा है। इस मामले में राजस्थान पुलिस ने मध्य प्रदेश पुलिस के सहयोग से कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े खिजर खान सहित तीन युवकों को हिरासत में लिया था। तीनों की ओर से हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर आरोप लगाया गया कि उन्हें 19 अप्रैल की रात से 20 अप्रैल की रात और अगले दिन दोपहर तक भोपाल साइबर क्राइम थाने में अवैध रूप से रखा गया। इस दौरान उन्हें किसी भी मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया।
विज्ञापन
राजस्थान और भोपाल पुलिस ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि राजस्थान पुलिस की मौखिक सूचना पर तीनों युवकों को पूछताछ के लिए साइबर क्राइम थाने बुलाया गया था। पूछताछ के बाद उन्हें परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। बाद में राजस्थान पुलिस ने फोन पर एफआईआर दर्ज होने की जानकारी दी। अगले दिन तीनों को दोबारा साइबर सेल बुलाया गया और राजस्थान पुलिस के पहुंचने पर उन्हें सौंप दिया गया।
सीसीटीवी फुटेज और बयान मंगाए गए
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित थाने की सीसीटीवी फुटेज तलब की थी। साथ ही मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जबलपुर को तीनों युवकों के अलग-अलग बयान दर्ज करने के निर्देश दिए थे। बयान में तीनों युवकों ने राजस्थान और मध्य प्रदेश पुलिस की ओर से पेश की गई कहानी को गलत बताया। इसके बाद हाईकोर्ट ने पीड़ितों के बयान को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत शिकायत मानते हुए भोपाल पुलिस को कानून के मुताबिक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
एफआईआर दर्ज, विभागीय जांच भी जारी
सुनवाई के दौरान भोपाल पुलिस ने अदालत को बताया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज बयानों के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। वहीं राजस्थान पुलिस के अधिकारियों ने अदालत को बताया कि प्रारंभिक जांच में प्रक्रिया का पालन नहीं करने के कारण पुलिसकर्मी सज्जन सिंह के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
हाईकोर्ट के अंतिम निर्देश
खंडपीठ ने कहा कि भोपाल पुलिस एफआईआर की निष्पक्ष और विधिवत जांच जारी रखे। वहीं जयपुर में संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय जांच कानून के अनुसार तार्किक निष्कर्ष तक जारी रहे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संबंधित व्यक्ति चाहे तो कथित गैर-कानूनी हिरासत के आधार पर मुआवजा या अन्य राहत के लिए सक्षम अदालत या उचित मंच का दरवाजा खटखटा सकता है। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता हरजस सिंह छाबड़ा ने पैरवी की।
