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MP: समन-वारंट की तामील पर डीजीपी ने जारी किए आवश्यक दिशा-निर्देश, रीवा में 11 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई

Sat, 25 Jul 2026 10:36 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Sat, 25 Jul 2026 10:36 PM IST
सार

रीवा लोकायुक्त प्रकरण की सुनवाई में हाईकोर्ट ने समन-वारंट की तामील पर पुलिस की कार्यप्रणाली की समीक्षा की। डीजीपी के शपथ-पत्र में रीवा में 11 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और प्रदेशभर की निगरानी व्यवस्था का ब्यौरा दिया गया, जिससे कोर्ट संतुष्ट हुआ। 

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Essential guidelines issued regarding the service of summons and warrants
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रीवा लोकायुक्त द्वारा दर्ज आपराधिक प्रकरण को निरस्त कराने की मांग को लेकर दायर याचिका की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने न्यायालय से जारी समन, वारंट और गिरफ्तारी वारंटों की तामील में पुलिस की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को शपथ-पत्र के माध्यम से प्रदेशभर में न्यायालयीन प्रक्रियाओं की तामील, निगरानी व्यवस्था और लापरवाही पर की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।

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जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने डीजीपी द्वारा प्रस्तुत विस्तृत शपथ-पत्र पर संतोष व्यक्त करते हुए रीवा के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) से संबंधित आपराधिक प्रकरण का 30 दिन के भीतर निर्णय करने का अनुरोध किया। इसके साथ ही याचिका का निराकरण कर दिया गया।

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क्या है मामला?
दरअसल, वर्ष 2006 में लोकायुक्त द्वारा दर्ज प्रकरण में आरोपी बनाए गए 26 लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि न्यायालय द्वारा जारी समन, वारंट और गिरफ्तारी वारंटों की समय पर तामील नहीं हो रही है। इस पर कोर्ट ने डीजीपी से पांच बिंदुओं पर विस्तृत हलफनामा मांगा था।

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प्रारंभ में डीजीपी की ओर से केवल संबंधित प्रकरण की जानकारी प्रस्तुत की गई थी। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि प्रदेशभर में लंबित मामलों में समन, वारंट और गिरफ्तारी वारंटों की तामील की स्थिति तथा निगरानी व्यवस्था की जानकारी भी प्रस्तुत की जाए।

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता यश सोनी ने डीजीपी का विस्तृत शपथ-पत्र पेश किया। इसमें बताया गया कि न्यायालयीन समन और वारंटों की समयबद्ध तामील सुनिश्चित करने के लिए पुलिस मुख्यालय समय-समय पर परिपत्र जारी करता है और वरिष्ठ अधिकारी इसकी नियमित निगरानी करते हैं।

शपथ-पत्र में यह भी बताया गया कि रीवा जिले के संबंधित प्रकरण में लापरवाही पाए जाने पर 11 पुलिसकर्मियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। साथ ही, हाईकोर्ट के निर्देशानुसार प्रदेशभर में लंबित जमानती और गिरफ्तारी वारंटों का वर्षवार विवरण प्रस्तुत किया गया। इसमें 22 फरवरी 2022 को जारी परिपत्र के अनुपालन की रिपोर्ट तथा विभिन्न पुलिस जोनों से प्राप्त जानकारी भी शामिल की गई।

राज्य शासन ने हाईकोर्ट को यह भी अवगत कराया कि लोकायुक्त द्वारा दर्ज संबंधित प्रकरण में ट्रायल पूरा हो चुका है। सभी अभियोजन साक्षियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और अब केवल अंतिम बहस शेष है। इस पर युगलपीठ ने रीवा के जेएमएफसी से 30 दिन के भीतर निर्णय करने का अनुरोध करते हुए याचिका का निराकरण कर दिया।

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