MP: पुरुष अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश, नर्सिंग ऑफिसर में 100% महिला आरक्षण मामला
मप्र हाईकोर्ट ने नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में पुरुष अभ्यर्थियों को शामिल करने के निर्देश दिए। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने 100% महिला आरक्षण पर सवाल उठाते हुए सरकार व कर्मचारी चयन मंडल से जवाब मांगा। परिणाम अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगे।
विस्तार
मप्र हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के पदों पर होने वाली भर्ती प्रक्रिया में पुरुष अभ्यर्थियों को शामिल करने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने उक्त अंतरिम आदेश देते हुए आवेदकों के परीक्षा परिणाम याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रखने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही मामले में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग सहित मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। उक्त पदों में महिलाओं को सौ फीसदी आरक्षण दिए जाने को चुनौती दी गई थी।
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दरअसल संतोष कुमार लोधी व अन्य पुरुष अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर हाल ही में जारी नर्सिंग ऑफिसर के भर्ती विज्ञापन को चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने बताया कि कर्मचारी चयन मंडल के विज्ञापन (नर्सिंग ऑफिसर एवं सिस्टर ट्यूटर भर्ती परीक्षा-2026) में नर्सिंग ऑफिसर के पदों को 100 प्रतिशत केवल महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कर दिया गया है। इससे योग्य पुरुष अभ्यर्थी आवेदन करने से पूरी तरह वंचित हो गए हैं। दलील दी गई कि मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा (अराजपत्रित) सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2023 के तहत नर्सिंग ऑफिसर के पद के लिए कोई जेंडर आधारित प्रतिबंध नहीं है। मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के भर्ती विज्ञापन में किया गया यह प्रावधान संवैधानिक नियमों के विपरीत है। तर्क दिया गया है कि पुरुष और महिला दोनों एक ही पाठ्यक्रम (बीएससी नर्सिंग-जीएनएम) पढ़ते हैं और उनके पास समान योग्यता व पंजीकरण होता है। केवल जेंडर के आधार पर सार्वजनिक रोजगार से पूर्णत: बाहर करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन है। सुनवाई पश्चात न्यायालय ने उक्त अंतरिम आदेश देते हुए अनावेदकों को जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

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