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Jabalpur News: हाईकोर्ट ने एकल पीठ की टिप्पणी को अनुचित करार दिया, रजिस्ट्रार को एसएलपी दायर करने के निर्देश

न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: प्रिया वर्मा Updated Wed, 24 Sep 2025 10:16 AM IST
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सार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की युगल पीठ ने ग्वालियर एकल पीठ की टिप्पणी को अनुचित करार देते हुए रजिस्ट्रार को एसएलपी दायर करने का निर्देश दिया।

Jabalpur News: High Court Declares Single Bench Remark Improper, Directs Registrar to File SLP
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य बेंच ने ग्वालियर बेंच की एकल पीठ द्वारा पारित आदेश में शिवपुरी जिले के सत्र न्यायाधीश के खिलाफ की गई टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की है। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगल पीठ ने इस टिप्पणी को निराशाजनक और अनुचित करार दिया।
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युगल पीठ ने अपने आदेश में कहा कि ऐसी टिप्पणियां करने से बचने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, और उक्त आदेश उनके उल्लंघन के दायरे में आते हैं। युगल पीठ ने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वे सर्वोच्च न्यायालय में एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करें, ताकि सर्वोच्च न्यायालय एकल न्यायाधीश पीठ के आदेशों पर निर्णय कर सके।
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गौरतलब है कि ग्वालियर की एकल पीठ ने कथित धोखाधड़ी के आरोपियों द्वारा दायर दो अलग-अलग जमानत याचिकाओं पर विचार करते हुए आदेश दिया था कि इसकी एक प्रति मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर के प्रधान रजिस्ट्रार (सतर्कता) को भेजी जाए और मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत की जाए। आदेश में शिवपुरी के प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (विवेक शर्मा) के खिलाफ जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुमति मांगी गई, जिन्होंने मामले के तथ्यों पर विचार किए बिना और आवेदक को जमानत का लाभ दिलाने के लिए अन्य धाराओं के तहत अभियुक्त को बरी कर दिया।

युगल पीठ ने कहा कि यह आदेश चौंकाने वाला है और एकल पीठ द्वारा दी गई टिप्पणियों से यह प्रतीत होता है कि प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश का गुप्त उद्देश्य केवल अभियुक्त को अनुचित लाभ पहुंचाना था। युगल पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि गलत आदेशों की आलोचना और न्यायिक अधिकारी की आलोचना में अंतर होता है।

युगल पीठ ने कहा कि जमानत मामलों में पारित आदेश अपीलीय क्षेत्राधिकार में नहीं आते। उन्होंने निर्देश दिया कि रजिस्ट्रार जनरल 10 दिनों के भीतर सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर करें। याचिका पर अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी।

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