Jabalpur: महाधिवक्ता कार्यालय में नियुक्तियों पर हाईकोर्ट सख्त, जवाब के लिए अंतिम मौका; अगली सुनवाई 19 जून को
याचिकाकर्ता के अनुसार, वर्ष 2013 की राजपत्र अधिसूचना में सरकारी वकीलों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित की गई है, लेकिन महाधिवक्ता कार्यालय ने उसका पालन नहीं किया।
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महाधिवक्ता कार्यालय में विधि अधिकारियों की नियुक्तियों में नियमों के पालन नहीं किए जाने को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। मामले की सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता कार्यालय की ओर से जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा गया। इस पर हाईकोर्ट की युगलपीठ, जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस आरसीएस विसेन ने अंतिम अवसर देते हुए अगली सुनवाई 19 जून निर्धारित की है।
मप्र हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव योगेश सोनी की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि महाधिवक्ता कार्यालय में कुल 157 लॉ ऑफिसर्स की नियुक्ति के लिए 25 दिसंबर को सूची जारी की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह मनमानी और पक्षपातपूर्ण रही।
याचिकाकर्ता के अनुसार, वर्ष 2013 की राजपत्र अधिसूचना में सरकारी वकीलों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित की गई है, लेकिन महाधिवक्ता कार्यालय ने उसका पालन नहीं किया। अधिसूचना के अनुसार सरकारी अधिवक्ता बनने के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की प्रैक्टिस अनिवार्य है, जबकि कई नियुक्त अधिवक्ताओं का अनुभव इससे कम बताया गया है।
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याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रत्येक पद के लिए तीन नाम भेजने का प्रावधान था, लेकिन विज्ञापन में पदों की संख्या तक स्पष्ट नहीं की गई। साथ ही चयन प्रक्रिया का भी कोई उल्लेख नहीं किया गया। याचिकाकर्ता ने पूरी चयन सूची निरस्त कर नई प्रक्रिया से नियुक्तियां करने की मांग की है। सोमवार को हुई सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता कार्यालय को जवाब पेश करने के लिए अंतिम अवसर दिया है।

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