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Jabalpur News: केंद्र सरकार ने निरस्त किया राइफल एसोसिएशन का लाइसेंस, अब हाईकोर्ट में पेश करना होगा आदेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Fri, 20 Feb 2026 10:05 PM IST
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सार
भोपाल में शूटरों के कारतूस कोटा घटाने के खिलाफ याचिका पर हाईकोर्ट ने प्रत्येक को 1000 कारतूस देने के निर्देश दिए। सुनवाई में बताया गया कि राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया का लाइसेंस रद्द हुआ है। आदेश पेश करने और अगली सुनवाई 23 फरवरी तय की गई।
मप्र हाईकोर्ट
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विस्तार
भोपाल कलेक्टर द्वारा शूटरों को अभ्यास के लिए प्रदान किए जाने वाले कारतूसों की संख्या कम किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान एकलपीठ को बताया गया कि केन्द्र सरकार ने राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने इस संबंध में आदेश पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिका पर अगली सुनवाई 23 फरवरी को निर्धारित की गई है।
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भोपाल निवासी इब्राहिम जावेद खान सहित अन्य तीन की तरफ से उक्त याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ता इब्राहिम जावेद खान एक मशहूर शूटर है और अन्य याचिकाकर्ता शूटर बनना चाहते हैं। उन्हें आर्म्स रूल्स, 2016 के नियमों के तहत कारतूस देने के लिए कोटा निर्धारित किया है। जिला कलेक्टर ने निर्धारित कोटे को घटाकर सिर्फ 500 कारतूस कर दिया है। याचिका में कहा गया था कि कलेक्टर द्वारा पारित विवादित आदेश के कारण याचिकाकर्ता आने वाले समय में प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की स्थिति में नहीं हैं।
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प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए अभ्यास करने की आवश्यकता है और उनके पास कारतूस नहीं है। सरकार की तरफ से एकलपीठ को बताया गया कि जनहित में कोटा बढ़ाने का फैसला लिया जा सकता है। जाने-माने शूटर तथा उभरते शूटर को एक हजार कारतूस दिए जाएंगे। जिससे वह आने वाली प्रतियोगिता की तैयारी कर सकें। वह बता सकें कि सभी कारतूस ट्रेनिंग में समाप्त हो गए हैं तो उन्हे एक हजार कारतूस का कोटा रिन्यू कर दिया जाएगा।
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि शूटरों को एक-एक हजार कारतूस का कोटा आवंटित किया जाए। ताकि वह आने वाली प्रतियोगिता की तैयारी कर सके। कारतूस का कोटा खत्म होने पर वह जिला कलेक्टर को रिपोर्ट करेंगे। जिला कलेक्टर कारतूस के इस्तेमाल की जांच करने के बाद अभ्यास के लिए कारतूस जारी करना सुरक्षित करें। इसके अलावा स्पोर्ट कैटेगरी के हथियारों के इस्तेमाल के बारे में भारत सरकार की राय और खिलाड़ियों को दिए जाने वाली कारतूस की संख्या के संबंध में भी हाईकोर्ट में पेश की जाए।
केन्द्र सरकार के अधिवक्ता की तरफ से बताया गया कि राइफल एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया का लाइसेंस कैंसल कर दिया गया है। उनके द्वारा इस संबंध में कोई आदेश पेश नहीं किया गया। एकलपीठ ने केन्द्र सरकार के अधिवक्ता को उक्त आदेश पेश करने के निर्देश जारी किए हैं। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को केंद्र के गृह विभाग को अनावेदक बनाने के निर्देश भी एकलपीठ ने जारी किए हैं। याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता विशाल डेनियल ने पैरवी की।

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