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MP News: हाईकोर्ट ने दिए पिता को नशा मुक्ति केंद्र में बंद रखने पर मेडिकल जांच के साथ पेश करने के आदेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Mon, 16 Mar 2026 10:21 PM IST
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सार
जबलपुर हाईकोर्ट ने संपत्ति विवाद और पारिवारिक मतभेद के चलते पुत्र द्वारा पिता को नशा मुक्ति केंद्र में बंधक बनाए जाने की याचिका पर सुनवाई की। युगलपीठ ने वृद्ध की विस्तृत मेडिकल जांच के साथ कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया।
(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
संपत्ति विवाद और पारिवारिक मतभेद के कारण पिता को पुत्र द्वारा नशा मुक्ति केंद्र में बंधक बनाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर जबलपुर हाईकोर्ट ने अहम आदेश जारी किए हैं। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने वृद्ध को मेडिकल रिपोर्ट के साथ न्यायालय में पेश करने का आदेश दिया है। याचिका पर अगली सुनवाई 25 मार्च को निर्धारित की गई है।
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका
जबलपुर निवासी अक्षय चौधरी ने याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि वह दुर्गेश पटेल के पास काम करता है और उनके पुत्र रूपेश पटेल ने पिता को जबरन नशा मुक्ति केंद्र में बंद कर रखा है। 26 फरवरी को कोर्ट के आदेश पर तिलवारा पुलिस ने वृद्ध को हाईकोर्ट में पेश किया था। वृद्ध ने युगलपीठ को बताया कि वह कोई साइकोट्रोपिक पदार्थ नहीं लेते हैं और उन्हें प्रॉपर्टी विवाद के चलते नशा मुक्ति केंद्र में रखा गया है।
पक्षों के दावे और विवाद
याचिका पर अनावेदक पुत्र की तरफ से कहा गया कि वृद्ध साइकोट्रोपिक पदार्थ लेते हैं और वे भू-माफिया के प्रभाव में हैं, जो संपत्ति पर कब्जा करना चाहते हैं। कोर्ट ने पुलिस जांच अधिकारी को वृद्ध की विस्तृत मेडिकल जांच कराने का आदेश दिया।
मेडिकल रिपोर्ट का निष्कर्ष
पिछली सुनवाई में प्रस्तुत मेडिकल रिपोर्ट में बताया गया कि वृद्ध कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं और उनकी विस्तृत जांच आवश्यक है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हॉस्पिटल में नशा मुक्ति केंद्र ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, नई दिल्ली के सहयोग से चलाया जाता है। रिपोर्ट में सिफारिश की गई कि वृद्ध को मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया जाए।
ये भी पढ़ें: Ujjain News: बेटी के प्रेम विवाह से आहत पिता ने लगाई फांसी, सुसाइड नोट में लिखी दिल दहला देने वाली बात
कोर्ट का आदेश और आगे की कार्रवाई
सभी पक्षों की सहमति के बाद युगलपीठ ने वृद्ध को नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर में भर्ती कराने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान बताया गया कि वृद्ध मानसिक रूप से ठीक हैं, लेकिन कई बीमारियों से ग्रस्त हैं। पुत्र, पत्नी और बेटी का दावा था कि पिता को नशे की लत है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेजा और अधिवक्ता विशाल बघेल ने पैरवी की।
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बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका
जबलपुर निवासी अक्षय चौधरी ने याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि वह दुर्गेश पटेल के पास काम करता है और उनके पुत्र रूपेश पटेल ने पिता को जबरन नशा मुक्ति केंद्र में बंद कर रखा है। 26 फरवरी को कोर्ट के आदेश पर तिलवारा पुलिस ने वृद्ध को हाईकोर्ट में पेश किया था। वृद्ध ने युगलपीठ को बताया कि वह कोई साइकोट्रोपिक पदार्थ नहीं लेते हैं और उन्हें प्रॉपर्टी विवाद के चलते नशा मुक्ति केंद्र में रखा गया है।
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पक्षों के दावे और विवाद
याचिका पर अनावेदक पुत्र की तरफ से कहा गया कि वृद्ध साइकोट्रोपिक पदार्थ लेते हैं और वे भू-माफिया के प्रभाव में हैं, जो संपत्ति पर कब्जा करना चाहते हैं। कोर्ट ने पुलिस जांच अधिकारी को वृद्ध की विस्तृत मेडिकल जांच कराने का आदेश दिया।
मेडिकल रिपोर्ट का निष्कर्ष
पिछली सुनवाई में प्रस्तुत मेडिकल रिपोर्ट में बताया गया कि वृद्ध कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं और उनकी विस्तृत जांच आवश्यक है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हॉस्पिटल में नशा मुक्ति केंद्र ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, नई दिल्ली के सहयोग से चलाया जाता है। रिपोर्ट में सिफारिश की गई कि वृद्ध को मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया जाए।
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कोर्ट का आदेश और आगे की कार्रवाई
सभी पक्षों की सहमति के बाद युगलपीठ ने वृद्ध को नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर में भर्ती कराने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान बताया गया कि वृद्ध मानसिक रूप से ठीक हैं, लेकिन कई बीमारियों से ग्रस्त हैं। पुत्र, पत्नी और बेटी का दावा था कि पिता को नशे की लत है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेजा और अधिवक्ता विशाल बघेल ने पैरवी की।

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