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MP News: फर्जी चालानों से लाखों का खेल, पटवारी ने टैक्स की रकम डकारी, EOW ने कसा शिकंजा
Wed, 08 Jul 2026 10:12 AM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jul 2026 10:12 AM IST
सार
मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में एक पटवारी द्वारा टैक्स के नाम पर भू-स्वामियों से लाखों रुपये वसूलकर सरकारी खजाने में जमा करने के बजाय फर्जी चालान देने का मामला सामने आया है। जांच में करीब छह महीने के दौरान लगभग छह लाख रुपये के गबन का खुलासा हुआ है।
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विस्तार
मध्य प्रदेश में राजस्व विभाग से जुड़ा एक बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। सिवनी जिले में पदस्थ एक पटवारी पर भू-स्वामियों से टैक्स के नाम पर लाखों रुपये वसूलकर सरकारी खजाने में जमा करने की बजाय फर्जी चालान देने और रकम का गबन करने का आरोप लगा है। जांच में करीब छह महीने के भीतर लगभग छह लाख रुपये के गबन का खुलासा होने के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने आरोपी पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
भू-स्वामियों से टैक्स लेकर देता था फर्जी चालान
EOW से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी अरुण सनोडिया 1 मार्च से 31 अगस्त के बीच सिवनी जिले में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय के अधीन पटवारी के पद पर पदस्थ था। आरोप है कि इस दौरान उसने भू-स्वामियों से मकान और भूमि कर की राशि वसूली, लेकिन उसे सरकारी खाते में जमा करने के बजाय खुद हड़प लिया। बाद में टैक्स जमा होने का भरोसा दिलाने के लिए लोगों को फर्जी चालान थमा दिए।
ऑनलाइन जांच में खुली फर्जीवाड़े की पोल
सिवनी की एकता कॉलोनी निवासी राजकुमार साहू ने वर्ष 2007 से 2025 तक के मकान कर के रूप में 31 अगस्त को 5,400 रुपये आरोपी पटवारी को दिए थे। बदले में उन्हें 30 अगस्त की तारीख वाला चालान दिया गया। जब राजकुमार साहू ने सरकारी ऑनलाइन पोर्टल पर चालान का सत्यापन किया तो उसका कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने EOW में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर जांच शुरू हुई और आरोपी की कथित जालसाजी सामने आ गई। विभागीय कार्रवाई करते हुए उसे पहले ही निलंबित किया जा चुका था।
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जांच में सामने आए कई और पीड़ित
EOW की जांच में पता चला कि आरोपी ने रामकुमार कुशवाहा से 89,550 रुपये लेकर भी फर्जी चालान दिया था। इसके अलावा भू-स्वामी सुनील नाहर और शीतल चंद भूरा से भी टैक्स की राशि वसूलकर उन्हें नकली चालान थमा दिए गए। जांच में सामने आया कि आरोपी ने इस तरह कई लोगों से टैक्स की रकम लेकर सरकारी खाते में जमा नहीं की और उसका गबन करता रहा।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ मामला
प्रारंभिक जांच में करीब छह लाख रुपये के गबन की पुष्टि होने के बाद EOW ने निलंबित पटवारी अरुण सनोडिया के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। अब एजेंसी पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े में अन्य लोगों की भूमिका तो नहीं रही।
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भू-स्वामियों से टैक्स लेकर देता था फर्जी चालान
EOW से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी अरुण सनोडिया 1 मार्च से 31 अगस्त के बीच सिवनी जिले में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय के अधीन पटवारी के पद पर पदस्थ था। आरोप है कि इस दौरान उसने भू-स्वामियों से मकान और भूमि कर की राशि वसूली, लेकिन उसे सरकारी खाते में जमा करने के बजाय खुद हड़प लिया। बाद में टैक्स जमा होने का भरोसा दिलाने के लिए लोगों को फर्जी चालान थमा दिए।
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ऑनलाइन जांच में खुली फर्जीवाड़े की पोल
सिवनी की एकता कॉलोनी निवासी राजकुमार साहू ने वर्ष 2007 से 2025 तक के मकान कर के रूप में 31 अगस्त को 5,400 रुपये आरोपी पटवारी को दिए थे। बदले में उन्हें 30 अगस्त की तारीख वाला चालान दिया गया। जब राजकुमार साहू ने सरकारी ऑनलाइन पोर्टल पर चालान का सत्यापन किया तो उसका कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने EOW में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर जांच शुरू हुई और आरोपी की कथित जालसाजी सामने आ गई। विभागीय कार्रवाई करते हुए उसे पहले ही निलंबित किया जा चुका था।
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जांच में सामने आए कई और पीड़ित
EOW की जांच में पता चला कि आरोपी ने रामकुमार कुशवाहा से 89,550 रुपये लेकर भी फर्जी चालान दिया था। इसके अलावा भू-स्वामी सुनील नाहर और शीतल चंद भूरा से भी टैक्स की राशि वसूलकर उन्हें नकली चालान थमा दिए गए। जांच में सामने आया कि आरोपी ने इस तरह कई लोगों से टैक्स की रकम लेकर सरकारी खाते में जमा नहीं की और उसका गबन करता रहा।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ मामला
प्रारंभिक जांच में करीब छह लाख रुपये के गबन की पुष्टि होने के बाद EOW ने निलंबित पटवारी अरुण सनोडिया के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। अब एजेंसी पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े में अन्य लोगों की भूमिका तो नहीं रही।
