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Jabalpur News: चालान में देरी पर हाईकोर्ट की फटकार, 60 दिन की समय-सीमा तय; दो साल से लंबित था केस

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर/मंडला Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Tue, 10 Feb 2026 08:49 PM IST
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सार

मंडला जिले से जुड़े एक आपराधिक मामले में समय पर चालान पेश नहीं किए जाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस अधीक्षक को 60 दिनों के भीतर न्यायालय में चालान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

The Superintendent of Police should present the challan before the court within two months.
जबलपुर हाईकोर्ट।
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विस्तार

मंडला पुलिस द्वारा दो वर्ष पूर्व दर्ज किए गए एक आपराधिक प्रकरण में न्यायालय के समक्ष समय पर चालान पेश नहीं किए जाने को चुनौती देते हुए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ के न्यायमूर्ति बी. पी. शर्मा की एकलपीठ ने पुलिस अधीक्षक, मंडला को निर्देश दिए हैं कि संबंधित आपराधिक प्रकरण में 60 दिनों के भीतर न्यायालय के समक्ष चालान प्रस्तुत किया जाए।

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मंडला जिले की जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पिंडरई के सरपंच संदीप मरकाम की ओर से दायर याचिका में बताया गया कि उप सरपंच आलोक तिवारी एवं अन्य आरोपियों द्वारा 22 लाख 45 हजार रुपये के कथित घोटाले के संबंध में सितंबर 2023 में नैनपुर थाने में मामला दर्ज किया गया था। मामले में आरोपियों द्वारा दायर अग्रिम जमानत आवेदन को हाईकोर्ट ने पूर्व में निरस्त कर दिया था।

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इसके पश्चात, जनवरी 2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने आरोपियों को सशर्त अग्रिम जमानत का लाभ प्रदान किया था। आदेश में यह शर्त रखी गई थी कि यदि आरोपी जांच और ट्रायल में सहयोग करेंगे, तो उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।


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याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित आपराधिक प्रकरण में निर्धारित समय-सीमा के भीतर चालान प्रस्तुत नहीं किया गया। इस संबंध में पुलिस अधिकारियों को कई बार अभ्यावेदन दिए गए, लेकिन इसके बावजूद नैनपुर थाना पुलिस द्वारा अब तक चालान पेश नहीं किया गया, जिससे विवेचना लंबित बनी हुई है। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए पुलिस अधीक्षक, मंडला को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे 60 दिनों के भीतर चालान न्यायालय में प्रस्तुत कराना सुनिश्चित करें। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गोपाल सिंह बघेल ने पैरवी की।

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