{"_id":"6a4e83797569b5f39c09db0d","slug":"ken-betwa-project-amid-heavy-rains-displaced-people-enter-river-pyre-movement-rages-on-for-the-sixth-day-2026-07-08","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"केन-बेतवा परियोजना: भारी बारिश के बीच नदी में उतरे विस्थापित, 'चिता आंदोलन' छठे दिन उग्र; जल सत्याग्रह शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केन-बेतवा परियोजना: भारी बारिश के बीच नदी में उतरे विस्थापित, 'चिता आंदोलन' छठे दिन उग्र; जल सत्याग्रह शुरू
Wed, 08 Jul 2026 10:36 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 08 Jul 2026 10:36 PM IST
सार
केन-बेतवा समेत विभिन्न परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापितों का चिता आंदोलन छठे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने जल सत्याग्रह शुरू किया और उचित मुआवजा, पुनर्वास तथा भ्रष्टाचार की जांच की मांग दोहराई। भारी बारिश और बढ़ते जलस्तर के बीच आंदोलनकारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ गई है।
विज्ञापन
केन बेतवा लिंक परियोजना का विरोध कर रहे लोग
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित मझगाय, रूंझ, नेगुवा और एनटीपीसी परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापित परिवारों का 'चिता आंदोलन' बुधवार को छठे दिन भी जारी रहा। जय किसान संगठन के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन में भारी बारिश के बावजूद आदिवासी, किसान और ग्रामीण अपने आंदोलन पर डटे रहे। आंदोलन को और तेज करते हुए बुधवार से प्रदर्शनकारी नदी में उतरकर जल सत्याग्रह भी कर रहे हैं। हालांकि लगातार बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच यह आंदोलन खतरे से खाली नहीं माना जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश होने पर अचानक नदी में बाढ़ आने और किसी बड़ी अनहोनी की आशंका भी बनी हुई है।
आंदोलन स्थल पर "न्याय दो या मार दो" के नारों के बीच सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनका अनशन तीसरे दिन में पहुंच गया है, जबकि ग्रामीणों का मिट्टी सत्याग्रह दूसरे दिन जारी रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक विस्थापितों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होगा।
दूषित पानी पीने को मजबूर
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने आंदोलन स्थल पर उपलब्ध पेयजल की व्यवस्था बंद कर दी है। इसके चलते महिलाएं, बच्चे और अन्य आंदोलनकारी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे कई लोगों की तबीयत बिगड़ रही है। उनका कहना है कि प्रशासन उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- HC की फर्जी वीडियो बनाकर वायरल करना पड़ा भारी, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर गिरफ्तार, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त
विज्ञापन
आंदोलन स्थल पर "न्याय दो या मार दो" के नारों के बीच सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनका अनशन तीसरे दिन में पहुंच गया है, जबकि ग्रामीणों का मिट्टी सत्याग्रह दूसरे दिन जारी रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक विस्थापितों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होगा।
विज्ञापन
दूषित पानी पीने को मजबूर
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने आंदोलन स्थल पर उपलब्ध पेयजल की व्यवस्था बंद कर दी है। इसके चलते महिलाएं, बच्चे और अन्य आंदोलनकारी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे कई लोगों की तबीयत बिगड़ रही है। उनका कहना है कि प्रशासन उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- HC की फर्जी वीडियो बनाकर वायरल करना पड़ा भारी, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर गिरफ्तार, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त
केन बेतवा लिंक परियोजना का विरोध कर रहे लोग
- फोटो : अमर उजाला
तनाव की स्थिति भी बनी
आंदोलन के दौरान बिजावर तहसीलदार अभिनय शर्मा, सटई तहसीलदार इंद्र कुमार गौतम और किशनगढ़ थाना प्रभारी कमलजीत सिंह मवई मौके पर पहुंचे, जिसके बाद कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति भी बनी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही सरकारी कार्यालयों में कथित भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के भी आरोप लगाए गए।
सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन करने का अधिकार देता है। उनका कहना है कि जब तक वास्तविक विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और न्याय नहीं मिलेगा तथा परियोजनाओं में कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में सभी प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा एवं पुनर्वास, परियोजनाओं में कथित भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई तथा विस्थापितों के कथित उत्पीड़न पर रोक शामिल है। फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है, जबकि आंदोलन के बीच नदी में बढ़ते जलस्तर को लेकर सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
आंदोलन के दौरान बिजावर तहसीलदार अभिनय शर्मा, सटई तहसीलदार इंद्र कुमार गौतम और किशनगढ़ थाना प्रभारी कमलजीत सिंह मवई मौके पर पहुंचे, जिसके बाद कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति भी बनी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही सरकारी कार्यालयों में कथित भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के भी आरोप लगाए गए।
सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन करने का अधिकार देता है। उनका कहना है कि जब तक वास्तविक विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और न्याय नहीं मिलेगा तथा परियोजनाओं में कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में सभी प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा एवं पुनर्वास, परियोजनाओं में कथित भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई तथा विस्थापितों के कथित उत्पीड़न पर रोक शामिल है। फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है, जबकि आंदोलन के बीच नदी में बढ़ते जलस्तर को लेकर सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
