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Somvati Amavasya: लाखों श्रद्धालुओं ने नर्मदा में लगाई डुबकी, ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के किए दर्शन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
Published by: Dinesh Sharma
Updated Mon, 15 Jun 2026 09:55 AM IST
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सार
अधिक मास में 30 वर्षों बाद आए दुर्लभ सोमवती अमावस्या संयोग पर ओंकारेश्वर में लाखों श्रद्धालुओं ने नर्मदा स्नान कर भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर के दर्शन किए। भीषण गर्मी के बावजूद घाटों और मंदिरों में भारी भीड़ रही। प्रशासन ने विशेष यातायात और दर्शन व्यवस्था लागू कर श्रद्धालुओं की सुविधाएं सुनिश्चित कीं।
ओंकारेश्वर में नर्मदा स्नान के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अधिक मास में लगभग 30 वर्षों बाद आए दुर्लभ संयोग वाली सोमवती अमावस्या पर धर्मनगरी ओंकारेश्वर में आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र नर्मदा नदी में स्नान कर भगवान ओंकारेश्वर एवं भगवान ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। भीषण गर्मी और 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुके तापमान के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह और श्रद्धा में कोई कमी दिखाई नहीं दी।
रविवार रात से ही श्रद्धालुओं के ओंकारेश्वर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो सोमवार देर शाम तक लगातार जारी रहा। धर्मनगरी की सड़कें, घाट, मंदिर परिसर और प्रमुख मार्ग श्रद्धालुओं से खचाखच भरे रहे। नगर का ऐसा कोई स्थान नहीं था जहां श्रद्धालुओं की उपस्थिति नजर न आ रही हो।
अधिक मास और सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग
प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित अशोक दुबे ने बताया कि अधिक मास में आने वाली सोमवती अमावस्या का यह दुर्लभ संयोग लगभग तीन दशक बाद बना है। हिंदू धर्म में अधिक मास को अत्यंत पुण्यदायी और आध्यात्मिक साधना का विशेष काल माना जाता है। शास्त्रों में इसका महत्व सावन मास के समान बताया गया है। ऐसे में अधिक मास और सोमवती अमावस्या का एक साथ पड़ना इस पर्व की धार्मिक महत्ता को और अधिक बढ़ा देता है। उन्होंने बताया कि इस शुभ अवसर पर नर्मदा स्नान, दान-पुण्य, जप-तप एवं भगवान शिव के दर्शन का विशेष फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि दूर-दूर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में ओंकारेश्वर पहुंचे।
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घाटों पर दिनभर रही श्रद्धालुओं की भीड़
सोमवती अमावस्या पर नर्मदा नदी के प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सबसे अधिक भीड़ नर्मदा-कावेरी संगम घाट, नगर घाट, अभय घाट एवं खेड़ी घाट पर देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने ब्रह्ममुहूर्त से ही स्नान प्रारंभ कर पूजा-अर्चना की और भगवान शिव का अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।
ये भी पढ़ें- सोमवती अमावस्या पर भांग का शृंगार, मस्तक पर श्रीगणेश; भस्म रमाने से पहले त्रिनेत्र से सजे महाकाल
मंदिर दर्शन व्यवस्था में किए गए विशेष बदलाव
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर ट्रस्ट द्वारा मंदिर क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों के कारण श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए विशेष व्यवस्था बनाई गई। मंदिर के समीप सुखदेव द्वार और जूना द्वार क्षेत्र में निर्माण कार्य जारी होने के कारण नए झूला पुल से आवागमन बंद रखा गया। श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए पुराने झूला पुल से मंदिर तक पहुंचाया गया।
यातायात व्यवस्था संभालने में प्रशासन को करना पड़ा विशेष प्रबंध
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण प्रशासन और पुलिस को यातायात व्यवस्था बनाए रखने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। ओंकारेश्वर थाना प्रभारी अनूप सिंधिया ने बताया कि बड़ी संख्या में छोटे वाहनों के पहुंचने से नगर क्षेत्र में यातायात का दबाव अत्यधिक बढ़ गया था। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए बड़े वाहनों का प्रवेश इंदौर-खंडवा-इच्छापुर मार्ग पर प्रतिबंधित किया गया तथा नगर के कई मार्गों पर वन-वे व्यवस्था लागू की गई। पुलिस, प्रशासन और स्वयंसेवकों की टीम दिनभर श्रद्धालुओं को नियंत्रित करने तथा सुचारु दर्शन व्यवस्था बनाए रखने में जुटी रही।
आस्था के आगे फीकी पड़ी भीषण गर्मी
निमाड़ अंचल में गर्मी बरकरार है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखाई दी। सुबह से लेकर दोपहर और शाम तक श्रद्धालु नर्मदा स्नान और ज्योतिर्लिंग दर्शन के लिए कतारों में खड़े रहे। सोमवती अमावस्या के इस पावन अवसर पर ओंकारेश्वर में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने धर्मनगरी को पूर्णतः आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर कर दिया।
रविवार रात से ही श्रद्धालुओं के ओंकारेश्वर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो सोमवार देर शाम तक लगातार जारी रहा। धर्मनगरी की सड़कें, घाट, मंदिर परिसर और प्रमुख मार्ग श्रद्धालुओं से खचाखच भरे रहे। नगर का ऐसा कोई स्थान नहीं था जहां श्रद्धालुओं की उपस्थिति नजर न आ रही हो।
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अधिक मास और सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग
प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित अशोक दुबे ने बताया कि अधिक मास में आने वाली सोमवती अमावस्या का यह दुर्लभ संयोग लगभग तीन दशक बाद बना है। हिंदू धर्म में अधिक मास को अत्यंत पुण्यदायी और आध्यात्मिक साधना का विशेष काल माना जाता है। शास्त्रों में इसका महत्व सावन मास के समान बताया गया है। ऐसे में अधिक मास और सोमवती अमावस्या का एक साथ पड़ना इस पर्व की धार्मिक महत्ता को और अधिक बढ़ा देता है। उन्होंने बताया कि इस शुभ अवसर पर नर्मदा स्नान, दान-पुण्य, जप-तप एवं भगवान शिव के दर्शन का विशेष फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि दूर-दूर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में ओंकारेश्वर पहुंचे।
घाटों पर दिनभर रही श्रद्धालुओं की भीड़
सोमवती अमावस्या पर नर्मदा नदी के प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सबसे अधिक भीड़ नर्मदा-कावेरी संगम घाट, नगर घाट, अभय घाट एवं खेड़ी घाट पर देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने ब्रह्ममुहूर्त से ही स्नान प्रारंभ कर पूजा-अर्चना की और भगवान शिव का अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।
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मंदिर दर्शन व्यवस्था में किए गए विशेष बदलाव
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर ट्रस्ट द्वारा मंदिर क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों के कारण श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए विशेष व्यवस्था बनाई गई। मंदिर के समीप सुखदेव द्वार और जूना द्वार क्षेत्र में निर्माण कार्य जारी होने के कारण नए झूला पुल से आवागमन बंद रखा गया। श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए पुराने झूला पुल से मंदिर तक पहुंचाया गया।
यातायात व्यवस्था संभालने में प्रशासन को करना पड़ा विशेष प्रबंध
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण प्रशासन और पुलिस को यातायात व्यवस्था बनाए रखने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। ओंकारेश्वर थाना प्रभारी अनूप सिंधिया ने बताया कि बड़ी संख्या में छोटे वाहनों के पहुंचने से नगर क्षेत्र में यातायात का दबाव अत्यधिक बढ़ गया था। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए बड़े वाहनों का प्रवेश इंदौर-खंडवा-इच्छापुर मार्ग पर प्रतिबंधित किया गया तथा नगर के कई मार्गों पर वन-वे व्यवस्था लागू की गई। पुलिस, प्रशासन और स्वयंसेवकों की टीम दिनभर श्रद्धालुओं को नियंत्रित करने तथा सुचारु दर्शन व्यवस्था बनाए रखने में जुटी रही।
आस्था के आगे फीकी पड़ी भीषण गर्मी
निमाड़ अंचल में गर्मी बरकरार है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखाई दी। सुबह से लेकर दोपहर और शाम तक श्रद्धालु नर्मदा स्नान और ज्योतिर्लिंग दर्शन के लिए कतारों में खड़े रहे। सोमवती अमावस्या के इस पावन अवसर पर ओंकारेश्वर में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने धर्मनगरी को पूर्णतः आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर कर दिया।

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