MP: एक सप्ताह में दूसरा तेंदुआ सड़क हादसे का शिकार, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल; अब तक दो की हो गई है मौत
पुनासा-सतवास-भोपाल मार्ग पर अज्ञात वाहन की टक्कर से एक तेंदुए की मौत हो गई। एक सप्ताह में यह दूसरी घटना है। वन्यजीव प्रेमियों ने सड़क किनारे जालियां, स्पीड कंट्रोल और चेतावनी संकेत लगाने की मांग करते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
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पुनासा-सतवास-भोपाल मार्ग पर एक बार फिर तेज रफ्तार वाहनों ने वन्यजीव की जान ले ली। वन परिक्षेत्र चांदगढ़ के हनुमान मंदिर के समीप अज्ञात वाहन की टक्कर से एक तेंदुए की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी और अमला मौके पर पहुंचा तथा जांच शुरू कर दी गई।
चिंताजनक बात यह है कि इसी वन परिक्षेत्र में एक सप्ताह पहले भी एक तेंदुआ सड़क दुर्घटना का शिकार हुआ था। लगातार दो तेंदुओं की मौत ने वन्यजीव संरक्षण की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेंदुआ भारत के प्रमुख वन्यजीवों में शामिल है। जंगलों की लगातार कटाई, प्राकृतिक आवास में कमी और बढ़ते मानव हस्तक्षेप के कारण इनकी संख्या पहले से ही प्रभावित हो रही है। ऐसे में सड़क दुर्घटनाओं में दुर्लभ वन्यजीवों की मौत वन संपदा के लिए अपूरणीय क्षति है।
पुनासा-सतवास-भोपाल मार्ग घने जंगलों से होकर गुजरता है। रात के समय तथा सुबह-शाम वन्यजीव भोजन और पानी की तलाश में अक्सर सड़क पार करते हैं। इसी दौरान तेज गति से गुजरने वाले वाहन उनके लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए गए हैं, जिसके कारण ऐसी दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। वन विभाग के अनुसार, इंदौर से विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के पहुंचने के बाद मृत तेंदुए का पोस्टमार्टम किया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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वन्यजीव प्रेमी प्रदीप ठाकुर ने वन विभाग से मांग की है कि घने जंगलों से गुजरने वाले मार्गों पर निर्धारित गति सीमा का सख्ती से पालन कराया जाए। साथ ही सड़क के दोनों ओर सुरक्षा जालियां लगाई जाएं तथा चेतावनी संकेतक, रिफ्लेक्टर, स्पीड ब्रेकर और वन्यजीव पारगमन मार्ग विकसित किए जाएं, ताकि वन्यजीव सुरक्षित रूप से आवागमन कर सकें।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक तेंदुए की मृत्यु नहीं, बल्कि प्रकृति के संतुलन को लगी गंभीर चोट है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में अनेक दुर्लभ वन्यजीव सड़क दुर्घटनाओं की भेंट चढ़ते रहेंगे। प्रशासन, वन विभाग और वाहन चालकों को मिलकर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस प्रयास करने होंगे। इस संबंध में वन विभाग के अधिकारियों से चर्चा करने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी भी अधिकारी ने फोन रिसीव नहीं किया

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