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MP News: पानी के लिए सड़कों पर उतरे किसान, बैलगाड़ियों से जाम हुआ हाईवे, सिंचाई संकट पर बढ़ा आक्रोश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरगोन
Published by: खरगोन ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jun 2026 10:27 PM IST
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सार
खरगोन जिले में मानसून की देरी और जल स्रोतों के सूखने से किसानों के सामने सिंचाई और पशुओं के लिए पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। गोगांवा क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने पिपलई तालाब से पानी छोड़ने की मांग को लेकर बिलाली के पास खंडवा-बड़ौदा राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैलगाड़ियां खड़ी कर चक्काजाम किया।
पानी के लिए सड़कों पर उतरा किसान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
खरगोन जिले में मानसून की देरी और जल स्रोतों के सूख जाने से किसानों के सामने सिंचाई और पशुओं के लिए पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। लंबे समय से पानी की मांग कर रहे किसानों का शुक्रवार को गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा। गोगांवा थाना क्षेत्र के बिलाली के पास सैकड़ों किसानों ने बैलगाड़ियां खड़ी कर खंडवा-बड़ौदा राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया। वहीं रायबिड़पुरा के किसानों ने भी सिंचाई का पानी नहीं मिलने पर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और जल्द समाधान नहीं होने पर हाईवे जाम करने की चेतावनी दी।
जलधाराएं सूखने से बढ़ी किसानों की परेशानी
गोगांवा थाना क्षेत्र के लाखी, बिलाली और आसपास के गांवों के किसानों का कहना है कि क्षेत्र में पर्याप्त बारिश नहीं होने से वेदा, कुंदा और खारक जैसी जलधाराएं पूरी तरह सूख चुकी हैं। इससे खेतों की सिंचाई प्रभावित हो रही है और पशुओं के लिए भी पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। किसानों के अनुसार वे पिछले करीब 15 दिनों से पिपलई तालाब से नाले में पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं, ताकि आसपास के गांवों को राहत मिल सके। इसके बावजूद उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासन पर अनदेखी का आरोप, हाईवे पर किया चक्काजाम
किसानों ने आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर समस्या से अवगत कराया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे नाराज होकर करीब 200 से अधिक किसानों ने बिलाली के पास खंडवा-बड़ौदा राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैलगाड़ियां खड़ी कर चक्काजाम कर दिया। आंदोलन के चलते हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया।
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अधिकारियों के आश्वासन के बाद खत्म हुआ आंदोलन
चक्काजाम की सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार हेमलता चौहान, गोगांवा थाना प्रभारी दीपक यादव और एनवीडीए के कार्यपालन यंत्री एसएस सोलंकी सहित प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं और पिपलई तालाब से पानी छोड़ने का आश्वासन दिया। करीब एक घंटे तक चले आंदोलन के बाद किसानों ने चक्काजाम समाप्त कर दिया।
रायबिड़पुरा के किसानों ने कलेक्टर कार्यालय में किया प्रदर्शन
दूसरी ओर रायबिड़पुरा गांव के किसानों ने भी सिंचाई के पानी की मांग को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि नाईक ने कहा कि राज्य सरकार सिंचाई परियोजनाओं को कागजों में पूर्ण बताकर किसानों तक पानी पहुंचाने के दावे कर रही है, जबकि हकीकत में कई गांवों के किसान आज भी पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
फसलें बर्बाद होने की कगार पर
रायबिड़पुरा के सरपंच प्रतिनिधि जितेंद्र मंडलोई ने बताया कि नागलवाड़ी परियोजना का पानी आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच चुका है, लेकिन उनके गांव के किसानों को अब तक इसका लाभ नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि गांव में सैकड़ों एकड़ में लगी सफेद मूसली और मिर्च की फसलें पानी की कमी के कारण बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। किसानों का कहना है कि यदि अगले एक-दो दिनों में सिंचाई का पानी उपलब्ध नहीं कराया गया तो वे खंडवा-बड़ौदा मार्ग पर चक्काजाम कर आंदोलन करेंगे।
सिर्फ आश्वासन नहीं, समाधान चाहते हैं किसान
कलेक्टर कार्यालय पहुंचे किसानों को डिप्टी कलेक्टर अगस्या ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर समस्या के जल्द समाधान का भरोसा दिलाया। हालांकि किसानों ने साफ कहा कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। यदि समय रहते पानी की व्यवस्था नहीं की गई तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। जिले में लगातार बढ़ रहे जल संकट ने किसानों के साथ-साथ प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है। अब किसानों की नजर प्रशासन की ओर है कि उन्हें राहत कब तक मिलती है।
जलधाराएं सूखने से बढ़ी किसानों की परेशानी
गोगांवा थाना क्षेत्र के लाखी, बिलाली और आसपास के गांवों के किसानों का कहना है कि क्षेत्र में पर्याप्त बारिश नहीं होने से वेदा, कुंदा और खारक जैसी जलधाराएं पूरी तरह सूख चुकी हैं। इससे खेतों की सिंचाई प्रभावित हो रही है और पशुओं के लिए भी पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। किसानों के अनुसार वे पिछले करीब 15 दिनों से पिपलई तालाब से नाले में पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं, ताकि आसपास के गांवों को राहत मिल सके। इसके बावजूद उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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प्रशासन पर अनदेखी का आरोप, हाईवे पर किया चक्काजाम
किसानों ने आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर समस्या से अवगत कराया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे नाराज होकर करीब 200 से अधिक किसानों ने बिलाली के पास खंडवा-बड़ौदा राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैलगाड़ियां खड़ी कर चक्काजाम कर दिया। आंदोलन के चलते हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया।
अधिकारियों के आश्वासन के बाद खत्म हुआ आंदोलन
चक्काजाम की सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार हेमलता चौहान, गोगांवा थाना प्रभारी दीपक यादव और एनवीडीए के कार्यपालन यंत्री एसएस सोलंकी सहित प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं और पिपलई तालाब से पानी छोड़ने का आश्वासन दिया। करीब एक घंटे तक चले आंदोलन के बाद किसानों ने चक्काजाम समाप्त कर दिया।
रायबिड़पुरा के किसानों ने कलेक्टर कार्यालय में किया प्रदर्शन
दूसरी ओर रायबिड़पुरा गांव के किसानों ने भी सिंचाई के पानी की मांग को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि नाईक ने कहा कि राज्य सरकार सिंचाई परियोजनाओं को कागजों में पूर्ण बताकर किसानों तक पानी पहुंचाने के दावे कर रही है, जबकि हकीकत में कई गांवों के किसान आज भी पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
फसलें बर्बाद होने की कगार पर
रायबिड़पुरा के सरपंच प्रतिनिधि जितेंद्र मंडलोई ने बताया कि नागलवाड़ी परियोजना का पानी आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच चुका है, लेकिन उनके गांव के किसानों को अब तक इसका लाभ नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि गांव में सैकड़ों एकड़ में लगी सफेद मूसली और मिर्च की फसलें पानी की कमी के कारण बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। किसानों का कहना है कि यदि अगले एक-दो दिनों में सिंचाई का पानी उपलब्ध नहीं कराया गया तो वे खंडवा-बड़ौदा मार्ग पर चक्काजाम कर आंदोलन करेंगे।
सिर्फ आश्वासन नहीं, समाधान चाहते हैं किसान
कलेक्टर कार्यालय पहुंचे किसानों को डिप्टी कलेक्टर अगस्या ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर समस्या के जल्द समाधान का भरोसा दिलाया। हालांकि किसानों ने साफ कहा कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। यदि समय रहते पानी की व्यवस्था नहीं की गई तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। जिले में लगातार बढ़ रहे जल संकट ने किसानों के साथ-साथ प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है। अब किसानों की नजर प्रशासन की ओर है कि उन्हें राहत कब तक मिलती है।
