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एमपी में हादसा: नर्मदा में डूब रहे छह कांवड़ियों को गोताखोरों ने बचाया, कुछ देर होती तो जा सकती थीं छह जानें

Mon, 10 Aug 2026 01:32 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर Published by: शबाहत हुसैन Updated Mon, 10 Aug 2026 01:32 PM IST
सार

ओंकारेश्वर के नावघाटखेड़ी नर्मदा घाट पर सोमवार को दो अलग-अलग घटनाओं में डूब रहे छह कांवड़ यात्रियों को स्थानीय गोताखोरों ने सुरक्षित बचा लिया। तेज बहाव के बावजूद समय पर किए गए रेस्क्यू से बड़ा हादसा टल गया।

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Accident in MP: Divers rescue six Kanwariyas drowning in the Narmada; a slight delay could have cost six lives
नर्मदा नदी में हादसा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रावण माह में नर्मदा स्नान और कांवड़ यात्रा के लिए उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच सोमवार को नावघाटखेड़ी स्थित नर्मदा घाट पर बड़ा हादसा टल गया। अलग-अलग दो घटनाओं में नर्मदा नदी के गहरे और तेज बहाव वाले पानी में डूब रहे छह कांवड़ यात्रियों को स्थानीय गोताखोरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सुरक्षित बचा लिया। समय रहते गोताखोर नहीं पहुंचते तो बड़ा हादसा हो सकता था।

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बड़वाह-इंदौर-खंडवा-इच्छापुर मार्ग पर मोरटक्का नर्मदा पुल के दक्षिणी तट पर स्थित नावघाटखेड़ी घाट इन दिनों कांवड़ यात्रियों के लिए प्रमुख जलभराव स्थल बना हुआ है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां नर्मदा का जल भरकर उज्जैन स्थित भगवान महाकाल को अर्पित करने के लिए कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से घाट पर स्नान करने वालों की भी भीड़ रहती है।

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सोमवार दोपहर करीब 12 बजे पहली घटना हुई। इंदौर से आए दो युवा कांवड़ यात्री स्नान के दौरान नर्मदा के गहरे और तेज बहाव वाले हिस्से में चले गए और डूबने लगे। घाट पर मौजूद गोताखोर बाबूलाल मंगले ने बिना देर किए नदी में छलांग लगाई और ट्यूब की मदद से दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

कुछ ही देर बाद दूसरी घटना में इंदौर के चार अन्य कांवड़ यात्री भी स्नान करते समय गहरे पानी में पहुंच गए और डूबने लगे। स्थिति को भांपते हुए स्थानीय गोताखोरों ने तुरंत बचाव अभियान चलाया और चारों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस तरह कुछ ही समय के अंतराल में दो अलग-अलग घटनाओं में छह कांवड़ यात्रियों की जान बचा ली गई।

गोताखोर बाबूलाल मंगले ने बताया कि श्रद्धालुओं और कांवड़ यात्रियों को लगातार गहरे पानी में नहीं जाने की चेतावनी दी जाती है, लेकिन कई लोग उत्साह में नदी के अंदर तक चले जाते हैं। तेज बहाव और अचानक बढ़ती गहराई के कारण वे संतुलन खो देते हैं और डूबने लगते हैं। उन्होंने कहा कि नर्मदा का बहाव कई स्थानों पर बेहद तेज है। ऊपर से पानी सामान्य दिखाई देता है, लेकिन कुछ दूरी पर गहराई काफी अधिक हो जाती है। इसलिए श्रद्धालुओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

ओंकारेश्वर, खेड़ीघाट और नावघाटखेड़ी क्षेत्र के स्थानीय गोताखोर वर्षों से नर्मदा में डूबने वाले श्रद्धालुओं की जान बचा रहे हैं। कई बार उन्हें बिना आधुनिक सुरक्षा उपकरणों के ही तेज बहाव में उतरना पड़ता है। उनके पास बचाव के लिए केवल ट्यूब जैसे सामान्य साधन उपलब्ध होते हैं। डूब रहा व्यक्ति घबराहट में बचाने वाले को पकड़ लेता है, जिससे गोताखोर की जान पर भी खतरा बढ़ जाता है। इसके बावजूद वे दूसरों की जान बचाने के लिए बिना हिचक नदी में छलांग लगा देते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार हरिश्चंद्र शर्मा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की है कि नर्मदा तटों पर वर्षों से बचाव कार्य कर रहे स्थानीय गोताखोरों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि इन्हें शासन स्तर पर विधिवत नियुक्त कर बचाव कार्य की जिम्मेदारी सौंपी जाए, ताकि श्रद्धालुओं को प्रशिक्षित बचाव दल मिल सके और गोताखोरों को स्थायी रोजगार भी प्राप्त हो। साथ ही उन्हें जीवन बीमा, सुरक्षा उपकरण, लाइफ जैकेट, रस्सियां, मोटरबोट और अन्य आवश्यक बचाव सामग्री उपलब्ध कराई जाए तथा नियमित प्रशिक्षण भी दिया जाए।

उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले ओंकारेश्वर में डूबते व्यक्ति को बचाने के प्रयास में एक नाविक-गोताखोर की मौत हो गई थी। ऐसे में दूसरों की जान बचाने वाले इन जांबाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी है। साथ ही घाटों पर गहरे पानी की सीमा चिन्हित करने, चेतावनी बोर्ड लगाने और पर्याप्त प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती की भी आवश्यकता है।

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