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Independence Day Special: 1857 में पान कर के खिलाफ अंग्रेजों से भिड़े रघुनाथ भिलाला, निमाड़ से आजादी का शंखनाद
Sat, 15 Aug 2026 07:30 AM IST
खरगोन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरगोन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरगोन
Published by: खरगोन ब्यूरो
Updated Sat, 15 Aug 2026 07:30 AM IST
सार
1857-58 में अंग्रेजों के पान कर के खिलाफ निमाड़ में किसानों की आवाज बुलंद करने वाले रघुनाथ भिलाला का इतिहास फिर चर्चा में है। उनके जन्मस्थान को लेकर अलग-अलग दावे सामने आने के बाद आधिकारिक जांच की मांग उठी है।
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अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ रघुनाथ भिलाला ने बजाया बिगुल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
निमाड़ में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उठी आवाजों में स्वतंत्रता सेनानी रघुनाथ भिलाला का नाम भी महत्वपूर्ण रूप से सामने आता है। 1857-58 के दौर में अंग्रेजों द्वारा पान की खेती पर लगाए गए टैक्स के खिलाफ किसानों और ग्रामीणों में असंतोष बढ़ा तो रघुनाथ भिलाला ने उनके विरोध को नेतृत्व दिया। यह संघर्ष केवल कर के खिलाफ आवाज नहीं था, बल्कि अंग्रेजी शासन की आर्थिक नीतियों और शोषण के खिलाफ स्थानीय जनप्रतिरोध का हिस्सा था।
पान की खेती से जुड़े किसानों पर कर का अतिरिक्त बोझ बढ़ने के बाद निमाड़ क्षेत्र के कई गांवों में विरोध के स्वर उठे। रघुनाथ भिलाला ने किसानों और ग्रामीणों को संगठित कर अंग्रेजी कर-व्यवस्था का विरोध किया। उनके इस संघर्ष को किसानों के अधिकार, आर्थिक स्वतंत्रता और अंग्रेजी शासन के खिलाफ प्रतिरोध से जोड़कर देखा जाता है।
ये भी पढ़ें: MP News: सीएम मोहन यादव का प्रदेश के नाम संदेश, कहा- आपसी सहयोग से निरंतर होगा प्रदेश का विकास
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जन्म स्थल के सत्यापन की उठी मांग
रघुनाथ भिलाला के क्रांतिकारी इतिहास के बीच अब उनके जन्मस्थान को लेकर अभिलेखीय सत्यापन की मांग उठी है। उनके वंशज डॉ. विजय सिंह मंडलोई और रघुनाथ भिलाला मंच के संरक्षक शिव भानु सिंह मंडलोई ने मध्य प्रदेश शासन से उनके जन्मस्थान की आधिकारिक जांच कराने की मांग की है। उनके अनुसार परिवार के पास उपलब्ध पुराने दस्तावेजों, पारिवारिक अभिलेखों और स्थानीय ऐतिहासिक जानकारी में रघुनाथ भिलाला का जन्मस्थान टांडा बरुड़, जिला खरगोन बताया गया है। वहीं स्वतंत्रता दिवस, जनजातीय कार्यक्रमों और विभिन्न प्रदर्शनियों में कई बार उनका संबंध बड़वानी जिले से दर्शाया जाता है। इससे उनके वास्तविक जन्मस्थान को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
दस्तावेजों के आधार पर हो सत्यापन
डॉ. विजय सिंह मंडलोई के अनुसार उन्होंने राजस्व अभिलेख, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संबंधी रिकॉर्ड, पुराने प्रशासनिक दस्तावेज, जिला गजेटियर और परिवार के पास उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर जन्मस्थान से संबंधित शोध किया है। उनका कहना है कि इन सभी अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कर शासन को तथ्य स्पष्ट करना चाहिए। यदि जांच में टांडा बरुड़ को रघुनाथ भिलाला का प्रमाणित जन्मस्थान पाया जाता है तो सरकारी रिकॉर्ड, पुस्तकों, वेबसाइटों और प्रदर्शनी सामग्री में आवश्यक संशोधन किया जाना चाहिए। जनजातीय सेनानियों का बने प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड रघुनाथ भिलाला मंच ने संस्कृति विभाग, जनजातीय कार्य विभाग, संबंधित अभिलेखीय संस्थाओं और जिला प्रशासन से संयुक्त जांच की मांग की है। साथ ही प्रदेश के सभी जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के जन्मस्थान, जन्मतिथि, पैतृक ग्राम और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान का जिला-वार प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की मांग की गई है।
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पान की खेती से जुड़े किसानों पर कर का अतिरिक्त बोझ बढ़ने के बाद निमाड़ क्षेत्र के कई गांवों में विरोध के स्वर उठे। रघुनाथ भिलाला ने किसानों और ग्रामीणों को संगठित कर अंग्रेजी कर-व्यवस्था का विरोध किया। उनके इस संघर्ष को किसानों के अधिकार, आर्थिक स्वतंत्रता और अंग्रेजी शासन के खिलाफ प्रतिरोध से जोड़कर देखा जाता है।
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जन्म स्थल के सत्यापन की उठी मांग
रघुनाथ भिलाला के क्रांतिकारी इतिहास के बीच अब उनके जन्मस्थान को लेकर अभिलेखीय सत्यापन की मांग उठी है। उनके वंशज डॉ. विजय सिंह मंडलोई और रघुनाथ भिलाला मंच के संरक्षक शिव भानु सिंह मंडलोई ने मध्य प्रदेश शासन से उनके जन्मस्थान की आधिकारिक जांच कराने की मांग की है। उनके अनुसार परिवार के पास उपलब्ध पुराने दस्तावेजों, पारिवारिक अभिलेखों और स्थानीय ऐतिहासिक जानकारी में रघुनाथ भिलाला का जन्मस्थान टांडा बरुड़, जिला खरगोन बताया गया है। वहीं स्वतंत्रता दिवस, जनजातीय कार्यक्रमों और विभिन्न प्रदर्शनियों में कई बार उनका संबंध बड़वानी जिले से दर्शाया जाता है। इससे उनके वास्तविक जन्मस्थान को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
दस्तावेजों के आधार पर हो सत्यापन
डॉ. विजय सिंह मंडलोई के अनुसार उन्होंने राजस्व अभिलेख, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संबंधी रिकॉर्ड, पुराने प्रशासनिक दस्तावेज, जिला गजेटियर और परिवार के पास उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर जन्मस्थान से संबंधित शोध किया है। उनका कहना है कि इन सभी अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कर शासन को तथ्य स्पष्ट करना चाहिए। यदि जांच में टांडा बरुड़ को रघुनाथ भिलाला का प्रमाणित जन्मस्थान पाया जाता है तो सरकारी रिकॉर्ड, पुस्तकों, वेबसाइटों और प्रदर्शनी सामग्री में आवश्यक संशोधन किया जाना चाहिए। जनजातीय सेनानियों का बने प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड रघुनाथ भिलाला मंच ने संस्कृति विभाग, जनजातीय कार्य विभाग, संबंधित अभिलेखीय संस्थाओं और जिला प्रशासन से संयुक्त जांच की मांग की है। साथ ही प्रदेश के सभी जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के जन्मस्थान, जन्मतिथि, पैतृक ग्राम और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान का जिला-वार प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की मांग की गई है।
