MP में दो दिन में 25 लोगों की मौत: धार और जबलपुर में हादसों ने खोली सिस्टम की पोल, जानें कैसे हुईं इतनी मौतें
MP Two Major Incident: मध्य प्रदेश में धार और जबलपुर में दो दिनों में 25 मौतों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। दोनों जगह हादसे कैसे हुए? कैसे इतने लोगों की मौत हो गई? सुरक्षा व्यवस्था क्यों इतनी लचर थी? आइए आज के इस एक्सप्लेनर में समझते हैं।
विस्तार
मध्य प्रदेश में बीते दो दिन, बुधवार और गुरुवार, मानो हादसों की काली छाया लेकर आए। इन 48 घंटों के भीतर दो अलग-अलग घटनाओं में कुल 25 लोगों की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोरकर रख दिया। पहली घटना धार जिले में सामने आई, जहां मजदूरों से भरा एक पिकअप वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया। इस हादसे में कई मजदूरों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि कुछ ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही जिंदगी की जंग हार दी। दूसरी और उससे भी ज्यादा भयावह घटना जबलपुर में हुई, जहां पर्यटन के लिए निकली एक क्रूज बरगी डैम में खराब मौसम के कारण डूब गई। हंसी-खुशी के पल बिताने निकले पर्यटक देखते ही देखते हादसे का शिकार बन गए। कई लोग पानी में डूब गए, कुछ को बचा लिया गया, लेकिन कई जिंदगियां हमेशा के लिए खत्म हो गईं।
इन दोनों घटनाओं के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर इन मौतों के पीछे जिम्मेदार कौन है? क्या यह सिर्फ एक हादसा था या फिर सिस्टम की लापरवाही का नतीजा? क्या वाहन में ओवरलोडिंग थी? क्या सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया? क्या क्रूज में पर्याप्त लाइफ जैकेट और सुरक्षा इंतजाम मौजूद थे? अगर इन सवालों पर गौर करें, तो तस्वीर साफ होती है कि ये महज दुर्घटनाएं नहीं, बल्कि कई स्तरों पर हुई चूक का परिणाम हो सकती हैं। सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी, वाहनों की फिटनेस पर ढिलाई और पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा मानकों की कमी ये सभी कारक मिलकर इन हादसों को जन्म देते हैं। आइए इन दोनों मामलों को समझते हैं।
हादसे का पहला दिन (धार का तिरला बायपास)
मध्य प्रदेश के धार जिले के तिरला बायपास पर बुधवार रात एक हृदयविदारक सड़क हादसा सामने आया है, जिसमें 16 लोगों की मौत की हो गई। यह दर्दनाक दुर्घटना चिकलिया स्थित रिलायंस पेट्रोल पंप के पास हुई, जब मजदूरों से भरा एक पिकअप वाहन अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पिकअप वाहन में क्षमता से अधिक करीब 40 से 45 मजदूर सवार थे। वाहन के पलटते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई और अफरातफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी।
पढ़ें: धार हादसे में मृतकों का आंकड़ा 16 पहुंचा; पीएम ने जताया दुख, PMNRF से मिलेगा मुआवजा
इस हादसे पर कलेक्टर क्या बोले?
घटना को लेकर धार के कलेक्टर अभिषेक चौधरी ने बताया कि सिरला के पास पिकअप वाहन से एक हादसा हुआ था। जब घटना की सूचना मिली, तभी पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और सभी घायलों को तत्काल जिला अस्पताल लाया गया। जिसके बाद प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल कुछ मरीजों को बेहतर इलाज के लिए इंदौर रेफर किया गया, जबकि अन्य का उपचार यहीं जारी था। मौके पर प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम मौजूद थी और सभी घायलों को बेहतर से बेहतर इलाज मिले, इसके लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही थी।
क्या बोले विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों के अनुसार सड़कों की उचित ट्रैफिक इंजीनियरिंग का अभाव हादसों का मुख्य कारण है। कई स्थानों पर ढाबा संचालकों ने सड़क पर अवैध कट बना दिए हैं, जिससे वाहनों की आवाजाही बढ़ती है और दुर्घटनाओं का खतरा रहता है। मानपुर से मांडू और रतलाम जाने वाले मार्ग पर भारी ट्रैफिक रहता है, लेकिन वहां बहुत संकरा कट दिया गया है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना अधिक रहती है। इसके अलावा घुमावदार मोड़, तीखी ढलान और तेज रफ्तार भी हादसों की बड़ी वजह हैं। जिले में रेल सुविधा न होने के कारण सड़क यातायात पर दबाव ज्यादा है, और रात में बड़ी संख्या में यात्री बसें भी इन मार्गों पर चलती हैं।
हादसे का दूसरा दिन (जबलपुर का बरगी डैम)
मध्य प्रदेश के जबलपुर के बरगी डैम में गुरुवार को एक झकझोर देने वाली घटना सामने आई। यहां करीब शाम करीब 5 बजे पर्यटन विभाग का एक क्रूज खराब मौसम के कारण डूब गया। जिसमें अब तक 9 लोगों की मौत हो गई है। 28 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। बाकी छह अभी लापता हैं। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त क्रूज में लगभग 43 पर्यटक सवार थे। बरगी सिटी सीएसपी अंजुल मिश्रा ने बताया कि शुरुआती रेस्क्यू में SDRF ने कई लोगों को बचाया, लेकिन अंधेरा और खराब मौसम से राहत कार्य प्रभावित हुआ। शुक्रवार सुबह फिर से रेस्क्यू जारी है।
क्या बोले एमपी के मंत्री?
घटना को लेकर मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि बचाव अभियान लगातार चल रहा है। कल हालात खराब थे। बारिश हो रही थी, अंधेरा था और पानी बहुत गहरा था, इसलिए बचाव अभियान पूरा नहीं हो सका था। एनडीआरएफ की टीम भी आ गई है, आर्मी की कुछ टीमें भी आ गई हैं जो ऐसे मामलों में माहिर हैं। अब तक नौ शव निकाले जा चुके हैं। हालात बहुत मुश्किल हैं, चुनौतियां हैं, इसलिए सिर्फ़ एक्सपर्ट टीमें ही बचाव कर पा रही हैं।
पढे़ं: मां के सीने से लिपटा मिला बच्चे का शव, बरघी में क्रूज के अंदर फंसे रह गए थे दोनों
कोलकाता से अर्धसैनिक बल की टीम भी जबलपुर पहुंची
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीमें लगातार मौके पर जुटी हैं। इनके साथ भारतीय सेना के जवान भी राहत और बचाव कार्य में लगे हुए हैं। इसके अलावा, हैदराबाद से विशेष रेस्क्यू टीम और हेलीकॉप्टर भेजा गया है, जबकि कोलकाता से अर्धसैनिक बल की टीम भी जबलपुर पहुंच चुकी है।


कमेंट
कमेंट X