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MP: मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी में मादा तेंदुआ की मौत, तीन दिन बाद सामने आई जानकारी; पन्ना से लाई गई थी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैहर Published by: मैहर ब्यूरो Updated Mon, 05 Jan 2026 07:35 PM IST
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सार

Maihar: मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी में 20 वर्षीय मादा तेंदुआ की 2 जनवरी को उम्रजनित कमजोरी से मौत हो गई। चौंकाने वाली बात यह रही कि सफारी प्रबंधन ने करीब तीन दिन बाद यह जानकारी सार्वजनिक की, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठे।

maihar Female leopard dies at Maihar Mukundpur White Tiger Safari, breathes her last at the age of 20
तेंदुए की मौत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्यप्रदेश की शान और वन्यजीव संरक्षण का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। सफारी में संरक्षित मादा तेंदुआ की 2 जनवरी की सुबह करीब 6:48 बजे मौत हो गई। तेंदुआ की उम्र लगभग 20 वर्ष बताई जा रही है, जो वन्यजीवों की औसत आयु के लिहाज से काफी अधिक मानी जाती है। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सफारी प्रबंधन ने करीब तीन दिन तक तेंदुआ की मौत की जानकारी सार्वजनिक नहीं की, जिससे प्रबंधन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थी मादा तेंदुआ
सफारी प्रबंधन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मादा तेंदुआ पिछले कुछ दिनों से लगातार सुस्त नजर आ रही थी। उसकी गतिविधियों में कमी देखी जा रही थी और भोजन भी सामान्य से कम कर दिया था। वन विभाग की चिकित्सकीय टीम उसकी सेहत पर नजर बनाए हुए थी और नियमित परीक्षण भी किए जा रहे थे। हालांकि उम्र अधिक होने के कारण तेंदुआ में उम्रजनित कमजोरी बढ़ती चली गई, जिसके चलते उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और आखिरकार 2 जनवरी की रात उसने दम तोड़ दिया।
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पन्ना टाइगर रिजर्व से लाई गई थी मुकुंदपुर
प्रबंधन के मुताबिक, मादा तेंदुआ को वर्ष 2020 में पन्ना टाइगर रिजर्व से मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी लाया गया था। यहां वह लंबे समय तक पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी रही। तेंदुआ ने न सिर्फ सफारी की शोभा बढ़ाई, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और जैव-विविधता संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पर्यटकों के बीच उसकी मौजूदगी सफारी की पहचान बन चुकी थी, जिससे सफारी को अच्छी ख्याति भी मिली।

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पोस्टमार्टम के बाद किया गया अंतिम संस्कार
मादा तेंदुआ की मौत के बाद उसके शव का नियमों के तहत पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद वन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। सफारी प्रबंधन का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही की जाएगी।

जानकारी छिपाने को लेकर उठे सवाल
हालांकि तेंदुआ की उम्र अधिक होना एक प्राकृतिक कारण माना जा रहा है, लेकिन तीन दिन तक मौत की जानकारी छिपाए रखने को लेकर सफारी प्रबंधन की भूमिका सवालों के घेरे में है। वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण से जुड़े संगठनों का कहना है कि ऐसे मामलों में समय रहते सही जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि संरक्षण व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहे। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से अधिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता की उम्मीद की जाती है।

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