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विधायक सप्रे का बड़ा बयान: बोलीं- उमंग सिंघार 300 करोड़ दें और बीना को जिला बनवाएं तो कांग्रेस में लौट आऊंगी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
Published by: सागर ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2026 07:46 PM IST
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सार
बीना विधायक निर्मला सप्रे ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे 300 करोड़ रुपये दिलाकर बीना को जिला बनवा दें तो वह कांग्रेस में लौट जाएंगी। सदस्यता विवाद पर उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला कोर्ट करेगा और वही उन्हें स्वीकार होगा।
बीना विधायक निर्मला सप्रे
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश की राजनीति में दलबदल और विधानसभा सदस्यता को लेकर जारी खींचतान के बीच बीना विधायक निर्मला सप्रे ने एक बेहद चौंकाने वाला बयान दिया है। सागर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचीं विधायक सप्रे ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे उन्हें 300 करोड़ रुपये दिला दें और बीना को जिला घोषित करवा दें, तो वो वापस कांग्रेस जॉइन कर लेंगी। विधायक के इस बयान ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज कर दी है।
अपनी सदस्यता को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई पर बात करते हुए निर्मला सप्रे ने कहा कि जनता पहले ही अपना फैसला सुना चुकी है और अब मामला न्यायालय में लंबित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोर्ट जो भी तय करेगा, उन्हें वही मंजूर होगा और कोर्ट के आदेशानुसार ही वह तय करेंगी कि उन्हें किस पार्टी में रहना है। सप्रे ने आगे कहा कि वह वर्तमान में केवल जनता के काम कर रही हैं और क्षेत्र में हुए 300 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रभारी मंत्री का आभार भी व्यक्त किया।
ये भी पढ़ें- दिल्ली दौरे पर सीएम मोहन, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और केंद्रीय नेताओं और मंत्रियों से की मुलाकात
पार्टी का नहीं, कांग्रेस के ही कुछ लोगों का षड्यंत्र
कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी पर निशाना साधते हुए विधायक ने आरोप लगाया कि यह पार्टी का नहीं बल्कि कांग्रेस के ही कुछ लोगों का षड्यंत्र है। उन्होंने कहा कि पार्टी के कुछ नेता नहीं चाहते कि बीना विधायक क्षेत्र की जनता की सुनें और काम करें। सप्रे का दावा है कि बीना में पिछले 15 से 20 साल में जो विकास कार्य नहीं हो पाए थे, वे अब उनके कार्यकाल में पूरे हो रहे हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि वह कोर्ट नहीं गई थीं बल्कि उमंग सिंघार उनके खिलाफ याचिका लेकर गए हैं, इसलिए संशय भी उन्हें ही दूर करना चाहिए।
जिला बनाने के वादे पर क्या बोलीं
बीना को जिला बनाने के पुराने वादे और भाजपा सरकार की भूमिका पर जब उनसे सवाल किया गया, तो सप्रे ने चतुराई से बात को टाल दिया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि जिला बनाने की मांग उनकी प्रमुख प्राथमिकता रही है और यह काम सरकार के स्तर का है, जिस पर फैसला भोपाल और दिल्ली से होना है।
क्यों चर्चा में हैंं निर्मला सप्रे
गौरतलब है कि निर्मला सप्रे ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था लेकिन बाद में उन्होंने भाजपा के पक्ष में अपनी सक्रियता बढ़ा दी, जिसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए याचिका दायर की थी। तभी से सप्रे अपनी पार्टी की सदस्यता को लेकर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट जवाब देने से बचती आ रही हैं।
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अपनी सदस्यता को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई पर बात करते हुए निर्मला सप्रे ने कहा कि जनता पहले ही अपना फैसला सुना चुकी है और अब मामला न्यायालय में लंबित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोर्ट जो भी तय करेगा, उन्हें वही मंजूर होगा और कोर्ट के आदेशानुसार ही वह तय करेंगी कि उन्हें किस पार्टी में रहना है। सप्रे ने आगे कहा कि वह वर्तमान में केवल जनता के काम कर रही हैं और क्षेत्र में हुए 300 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रभारी मंत्री का आभार भी व्यक्त किया।
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कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी पर निशाना साधते हुए विधायक ने आरोप लगाया कि यह पार्टी का नहीं बल्कि कांग्रेस के ही कुछ लोगों का षड्यंत्र है। उन्होंने कहा कि पार्टी के कुछ नेता नहीं चाहते कि बीना विधायक क्षेत्र की जनता की सुनें और काम करें। सप्रे का दावा है कि बीना में पिछले 15 से 20 साल में जो विकास कार्य नहीं हो पाए थे, वे अब उनके कार्यकाल में पूरे हो रहे हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि वह कोर्ट नहीं गई थीं बल्कि उमंग सिंघार उनके खिलाफ याचिका लेकर गए हैं, इसलिए संशय भी उन्हें ही दूर करना चाहिए।
जिला बनाने के वादे पर क्या बोलीं
बीना को जिला बनाने के पुराने वादे और भाजपा सरकार की भूमिका पर जब उनसे सवाल किया गया, तो सप्रे ने चतुराई से बात को टाल दिया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि जिला बनाने की मांग उनकी प्रमुख प्राथमिकता रही है और यह काम सरकार के स्तर का है, जिस पर फैसला भोपाल और दिल्ली से होना है।
क्यों चर्चा में हैंं निर्मला सप्रे
गौरतलब है कि निर्मला सप्रे ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था लेकिन बाद में उन्होंने भाजपा के पक्ष में अपनी सक्रियता बढ़ा दी, जिसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए याचिका दायर की थी। तभी से सप्रे अपनी पार्टी की सदस्यता को लेकर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट जवाब देने से बचती आ रही हैं।
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