MP News: जिस घर को बचाने की लड़ाई लड़ रहे थे, वही बना मां-बेटे की कब्र, आवास योजना पर उठे सवाल
नीमच जिले के सिंगोली नगर में एक जर्जर मकान की छत गिरने से मां-बेटे की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे में मृतकों की पहचान निलेश धनोतिया और उनकी माता सोसर बाई के रूप में हुई है।
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मध्य प्रदेश के नीमच जिले के सिंगोली नगर में मंगलवार तड़के एक दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया। जर्जर मकान की छत की पट्टियां अचानक भरभराकर गिर गईं, जिससे मलबे के नीचे दबकर एक बुजुर्ग महिला और उनके बेटे की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसर गया। हादसे में जान गंवाने वाले युवक स्थानीय स्तर पर समाचार पत्र वितरण का कार्य करते थे। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक व्यवस्था और आवास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
देर रात हुआ हादसा, मलबे में दबे मां-बेटे
जानकारी के अनुसार सिंगोली निवासी निलेश धनोतिया और उनकी माता सोसर बाई अपने मकान में मौजूद थे। देर रात अचानक मकान की जर्जर छत की पट्टियां भरभराकर नीचे गिर गईं। छत गिरने से दोनों मलबे के नीचे दब गए। हादसा इतना भयावह था कि आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी। घटना के बाद क्षेत्र में चीख-पुकार मच गई और पूरे इलाके में शोक का माहौल बन गया।
समाचार पत्र वितरक थे निलेश धनोतिया
मृतक निलेश धनोतिया सिंगोली नगर में समाचार पत्र वितरण (हॉकर) का कार्य करते थे। वे प्रतिदिन सुबह लोगों तक समाचार पहुंचाने का काम करते थे। उनकी असमय मौत की खबर से नगर में शोक की लहर फैल गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि निलेश मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे और लंबे समय से इस कार्य से जुड़े हुए थे।
प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर परिजनों और लोगों के आरोप
हादसे के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि निलेश और उनका परिवार कई वर्षों से सुरक्षित आवास के लिए प्रयास कर रहा था। उनका कहना है कि परिवार ने कई बार नगर परिषद के अधिकारियों से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान स्वीकृत कराने की मांग की थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनकी मांगों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि प्रशासनिक स्तर पर नहीं हुई है।
नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने सिंगोली नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि नगर परिषद लंबे समय से प्रभारी व्यवस्था के भरोसे संचालित हो रही है, जिससे कई प्रशासनिक और विकास संबंधी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि नगर परिषद में उपयंत्री को ही मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। नागरिकों का आरोप है कि पूर्णकालिक प्रशासनिक व्यवस्था के अभाव में कई योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर नहीं पहुंच पा रहा है।
हादसे के बाद लोगों में आक्रोश
मां-बेटे की मौत के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश का माहौल है। क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते परिवार को सुरक्षित आवास उपलब्ध हो जाता, तो संभवतः यह हादसा टाला जा सकता था। घटना के बाद लोग प्रशासन से जवाबदेही तय करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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पुलिस और प्रशासन ने शुरू की जांच
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि मकान की स्थिति क्या थी और संबंधित योजनाओं के संबंध में क्या तथ्य सामने आते हैं।
कई सवाल छोड़ गया दर्दनाक हादसा
सिंगोली में हुई यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण सवाल भी छोड़ गई है। जर्जर मकानों में रह रहे लोगों की सुरक्षा, आवास योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचना और स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही जैसे मुद्दे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
फिलहाल पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है और लोग मृतक मां-बेटे को श्रद्धांजलि दे रहे हैं, जबकि प्रशासन मामले की जांच में जुटा हुआ है।

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