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ओंकारेश्वर में दो दिन बाजार पूरी तरह ठप: होटल-दुकानें बंद रहने से दर्शनार्थियों को हुई भारी परेशानी

Mon, 19 Oct 2026 12:41 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर Published by: प्रिया वर्मा Updated Mon, 19 Oct 2026 12:41 PM IST
सार

स्थानीय नागरिक परिषद के आह्वान पर दो दिन ओंकारेश्वर बंद रहने से दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को फूल, प्रसाद और जरूरी सामान तक नहीं मिल सका। इस बंद ने स्थानीय कारोबारियों की मांगों के साथ तीर्थयात्रियों की सुविधाओं का मुद्दा भी सामने ला दिया है।

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Omkareshwar Markets Shut for Two Days: Closed Shops and Hotels Leave Pilgrims Facing Major Inconvenience
बाजार बंद होने से भटकने को मजबूर श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में स्थानीय नागरिक परिषद के आह्वान पर दो दिवसीय बंद का व्यापक असर दिखाई दिया। स्थानीय दुकानदारों, होटल संचालकों, गेस्ट हाउस संचालकों, ऑटो चालकों और अन्य व्यापारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में प्रतिष्ठान बंद रखकर आंदोलन को सहयोग दिया। बाजार बंद रहने से जहां स्थानीय कारोबार प्रभावित हुआ, वहीं भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन करने देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्थिति यह रही कि श्रद्धालुओं को भगवान को अर्पित करने के लिए फूल और प्रसाद तक नहीं मिल सके।

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आम दिनों में श्रद्धालुओं की भीड़, दुकानों की चहल-पहल और धार्मिक गतिविधियों से गुलजार रहने वाली नगरी में बंद के दौरान सन्नाटा पसरा नजर आया। बस स्टैंड से मंदिर तक पहुंचने और जरूरी सामग्री मिलने में भी श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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पहली बार आए, बंद देखकर निराशा हुई
दिल्ली से पहली बार ओंकारेश्वर पहुंचीं साईं दीपा ने कहा कि यहां आने पर पता चला कि स्थानीय लोगों का विरोध प्रदर्शन चल रहा है। उन्होंने कहा कि तीर्थनगरी में ऐसा माहौल देखकर अच्छा नहीं लगा। सरकार को यहां के लोगों की समस्याओं पर विचार करना चाहिए और उनके व्यवसाय को बेहतर बनाने के लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही श्रद्धालुओं के लिए भी अच्छी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि उन्हें परेशानी न हो। 
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भगवान को चढ़ाने प्रसाद तक नहीं मिला
दिल्ली से आए आकाश गर्ग ने बताया कि भगवान को अर्पित करने के लिए प्रसाद की दुकानें बंद होने के कारण उन्हें प्रसाद नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि यहां कई दुकानें पीढ़ियों से संचालित हो रही हैं और स्थानीय परिवार वर्षों से तीर्थनगरी की धार्मिक गतिविधियों में योगदान देते आए हैं। प्रशासन को स्थानीय लोगों की समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के बीच बातचीत से बीच का रास्ता निकाला जाए, ताकि स्थानीय लोगों की मांगों का निराकरण हो और श्रद्धालुओं की सुविधाएं भी प्रभावित न हों। 

दो दिवसीय बंद ने स्थानीय समस्याओं के साथ तीर्थयात्रियों की सुविधाओं का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने ला दिया है।

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