पन्ना टाइगर रिजर्व: तीन माह में तीन बाघों की मौत से हड़कंप, गश्ती के दौरान दिखा बाघ का शव तो प्रबंधन चौंका
पन्ना टाइगर रिजर्व की किशनगढ़ कोर रेंज में एक वयस्क नर बाघ का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। शुरुआती जांच में सभी अंग सुरक्षित पाए गए और बाहरी चोट के निशान नहीं मिले। तीन महीने में बाघ की यह तीसरी मौत है। पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद मौत का कारण स्पष्ट होगा।
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मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध पन्ना टाइगर रिजर्व (पीटीआर) से एक बार फिर झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पार्क प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था और वन्यजीवों की निगरानी प्रणाली को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है। शनिवार को किशनगढ़ कोर रेंज के अंतर्गत आने वाली बृजपुरा बीट के एक बेहद दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में एक वयस्क नर बाघ का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ है। पिछले महज तीन महीनों के भीतर इस नेशनल पार्क में बाघ की मौत की यह तीसरी बड़ी घटना है, जिससे वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के आला अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह जब वन विभाग की पेट्रोलिंग पार्टी नियमित गश्त पर निकली थी, तभी टीम को बृजपुरा बीट की एक ऊंची पहाड़ी पर एक वयस्क बाघ जमीन पर लेटा हुआ दिखाई दिया। घने जंगल और दुर्गम रास्ता होने के कारण शुरुआती दौर में वनकर्मियों को लगा कि बाघ सामान्य रूप से आराम कर रहा है। हालांकि, काफी समय बीत जाने के बाद भी जब बाघ के शरीर में कोई हलचल महसूस नहीं हुई, तो गश्ती दल सतर्क हो गया। टीम ने पूरी एहतियात बरतते हुए एक सुरक्षित दूरी से दूरबीन के जरिए निगरानी की। जब शक गहराया और टीम मौके पर पहुंची, तो पता चला कि बाघ की मौत हो चुकी थी।
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अंगों की सुरक्षा और प्रारंभिक जांच
घटना की खबर फैलते ही पन्ना टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारी और डॉक्टरों की टीम मौके के लिए रवाना हुई। चूंकि घटनास्थल मुख्य मार्ग से काफी दूर था, इसलिए अधिकारियों को करीब तीन से चार किलोमीटर का सफर पैदल तय करके वहां पहुंचना पड़ा। पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक वीरेंद्र कुमार पटेल ने बताया कि शुरुआती जांच के बाद मृत बाघ के सभी अंग पूरी तरह से सुरक्षित पाए गए हैं। बाघ के शरीर पर किसी भी प्रकार के बाहरी घाव, चोट या किसी अन्य वन्यजीव के साथ आपसी संघर्ष (टेरिटोरियल फाइट) के कोई निशान नहीं मिले हैं। इसके साथ ही घटनास्थल के आसपास भी किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि या इंसानी दखल के सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि, वन विभाग प्रथम दृष्टया इसे प्राकृतिक मौत मानकर चल रहा है, लेकिन मौत के असली कारणों का सटीक खुलासा पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।
तीन महीने में तीन मौतें सुरक्षा पर खड़े हुए गंभीर सवाल
पन्ना टाइगर रिजर्व को देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में बाघ पुनर्स्थापना की सबसे सफल मिसाल माना जाता है, जहां बाघों की संख्या शून्य से बढ़कर 100 के पार पहुंच चुकी है। लेकिन हाल के महीनों में लगातार हो रही मौतों ने इस सफलता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। बता दें कि सबसे पहले गंगऊ क्षेत्र में मुख्य मार्ग के किनारे एक नर बाघ का कई दिन पुराना क्षत-विक्षत कंकाल मिला था, जिसकी भनक प्रबंधन को कई दिनों बाद लगी। इसके बाद तारा गांव से रेस्क्यू किए गए एक युवा नर बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी, जिसे रेडियो कॉलर भी पहनाया गया था। वहीं अब किशनगढ़ कोर रेंज में इस वयस्क बाघ का शव मिलने के बाद पीटीआर में हड़कंप मचा हुआ है। फिलहाल, पूरे मामले का सच अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक लैब की जांच पर टिका हुआ है, जिसके बाद ही साफ होगा कि यह वाकई प्राकृतिक मौत थी या इसके पीछे प्रबंधन की कोई बड़ी लापरवाही है।

पन्ना टाइगर रिजर्व में 3 माह में तीन बाघों की मौत से हड़कंप
