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Indore News: बारिश-नमी से बढ़ा संक्रमण, अस्पतालों में लगी मरीजों की लाइनें, पीने का पानी भी दूषित आ रहा
Sat, 01 Aug 2026 07:21 AM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Sat, 01 Aug 2026 07:21 AM IST
सार
Indore News: शहर में मानसून के दौरान कई तरह के संक्रमण तेजी से फैल रहे हैं। दूषित पानी के सेवन से उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन के मरीज बढ़ रहे हैं। वायरल, डेंगू और मलेरिया भी पैर पसार रहे हैं।
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रहवासी क्षेत्रों में आ रहा गंदा पानी, अस्पतालों में लगी मरीजों की लाइनें।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
बारिश और नमी के कारण बैक्टीरिया और वायरस संक्रमण बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। शासकीय सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में हर दिन 40 से 50 मरीज किडनी संक्रमण और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। दूषित पानी, दस्त और डिहाइड्रेशन के कारण शहर के अन्य अस्पतालों में भी किडनी इन्फेक्शन के मामलों में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार दूषित जल के सेवन से शरीर में संक्रमण, उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन हो रहा है। इसकी वजह से शहर के जलस्त्रोतों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अभी भी शहर के कई हिस्सों में लगातार गंदा पानी आ रहा है। लोग पानी उबालकर या फिर उसमें दवाइयां डालकर पीने में उपयोग कर रहे हैं।
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कई दिनों से आ रहा गंदा पानी
स्कीम नंबर 54 में रहने वाले अरविंदर सिंह ने बताया कि हमारे यहां नलों में रोज गंदा पानी आ रहा है। कई बार नगर निगम के एप 311 और सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत कर चुके हैं। इसके बावजूद सुधार नहीं हो रहा है। अरविंदर ने बताया कि बारिश में पहले ही बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है और इस समय नगर निगम की लापरवाही जनता पर भारी पड़ सकती है।
बिना डॉक्टरी सलाह के दवाइयां लेना पड़ रहा भारी
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. पद्मिनी के अनुसार इन दिनों अस्पताल की ओपीडी में हर दिन 40 से 50 मरीज किडनी संक्रमण और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से अधिकतर मरीज पहले यूरिन इन्फेक्शन, उल्टी या दस्त से पीड़ित रहे हैं। समय पर सही इलाज न मिलने और बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से मनमर्जी से दवाइयां लेने के कारण लोग खुद ही किडनी की गंभीर बीमारियों को न्योता दे रहे हैं। साधारण इन्फेक्शन को सही इलाज न मिलने के कारण मरीज गंभीर बना लेते हैं, जिससे यह संक्रमण किडनी तक पहुंच जाता है।
मानसून की नमी में तेजी से पनप रहे बैक्टीरिया
चिकित्सकों का कहना है कि बारिश के मौसम में हवा में नमी का स्तर बढ़ जाता है, जिससे बैक्टीरिया और वायरस बहुत तेजी से पनपते हैं। दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन के कारण होने वाले संक्रमण का सीधा और घातक असर किडनी पर पड़ता है। लगातार दस्त और उल्टी होने से शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की भारी कमी हो जाती है, जिससे किडनी की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। ऐसे मरीज जो पहले से किडनी की बीमारी, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं, उनके लिए यह खतरा 2 से 3 गुना तक बढ़ जाता है।
लक्षणों को नजरअंदाज करना हो सकता है खतरनाक
विशेषज्ञों के मुताबिक पेशाब में जलन होना, कम पेशाब आना, तेज बुखार आना, कमर में दर्द होना, शरीर में अत्यधिक कमजोरी और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत किसी योग्य डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। शुरुआती दौर में ही सही इलाज मिलने से इस संक्रमण को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है। लोगों को बाहर के खान-पान से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। इसके साथ ही बच्चों, बुजुर्गों और खुद को भी बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी प्रकार की एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं नहीं देनी चाहिए।
पानी उबालकर पीएं, बिना परामर्श दवाओं का सेवन न करें
डॉ. पद्मिनी के अनुसार केवल स्वच्छ, उबला हुआ या फिल्टर किया गया पानी ही पीना चाहिए। खुले, बासी और कटे हुए खाद्य पदार्थों के सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए। बिना डॉक्टर की लिखित सलाह के किसी भी मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक दवाएं न लें। दस्त या उल्टी की शिकायत होने पर तुरंत ओआरएस का घोल और पर्याप्त मात्रा में पानी लें। पेशाब में जलन, तेज बुखार या कमर में दर्द महसूस होने पर बिना देरी किए डॉक्टर से जांच कराएं।
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चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार दूषित जल के सेवन से शरीर में संक्रमण, उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन हो रहा है। इसकी वजह से शहर के जलस्त्रोतों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अभी भी शहर के कई हिस्सों में लगातार गंदा पानी आ रहा है। लोग पानी उबालकर या फिर उसमें दवाइयां डालकर पीने में उपयोग कर रहे हैं।
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कई दिनों से आ रहा गंदा पानी
स्कीम नंबर 54 में रहने वाले अरविंदर सिंह ने बताया कि हमारे यहां नलों में रोज गंदा पानी आ रहा है। कई बार नगर निगम के एप 311 और सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत कर चुके हैं। इसके बावजूद सुधार नहीं हो रहा है। अरविंदर ने बताया कि बारिश में पहले ही बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है और इस समय नगर निगम की लापरवाही जनता पर भारी पड़ सकती है।
बिना डॉक्टरी सलाह के दवाइयां लेना पड़ रहा भारी
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. पद्मिनी के अनुसार इन दिनों अस्पताल की ओपीडी में हर दिन 40 से 50 मरीज किडनी संक्रमण और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से अधिकतर मरीज पहले यूरिन इन्फेक्शन, उल्टी या दस्त से पीड़ित रहे हैं। समय पर सही इलाज न मिलने और बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से मनमर्जी से दवाइयां लेने के कारण लोग खुद ही किडनी की गंभीर बीमारियों को न्योता दे रहे हैं। साधारण इन्फेक्शन को सही इलाज न मिलने के कारण मरीज गंभीर बना लेते हैं, जिससे यह संक्रमण किडनी तक पहुंच जाता है।
मानसून की नमी में तेजी से पनप रहे बैक्टीरिया
चिकित्सकों का कहना है कि बारिश के मौसम में हवा में नमी का स्तर बढ़ जाता है, जिससे बैक्टीरिया और वायरस बहुत तेजी से पनपते हैं। दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन के कारण होने वाले संक्रमण का सीधा और घातक असर किडनी पर पड़ता है। लगातार दस्त और उल्टी होने से शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की भारी कमी हो जाती है, जिससे किडनी की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। ऐसे मरीज जो पहले से किडनी की बीमारी, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं, उनके लिए यह खतरा 2 से 3 गुना तक बढ़ जाता है।
लक्षणों को नजरअंदाज करना हो सकता है खतरनाक
विशेषज्ञों के मुताबिक पेशाब में जलन होना, कम पेशाब आना, तेज बुखार आना, कमर में दर्द होना, शरीर में अत्यधिक कमजोरी और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत किसी योग्य डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। शुरुआती दौर में ही सही इलाज मिलने से इस संक्रमण को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है। लोगों को बाहर के खान-पान से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। इसके साथ ही बच्चों, बुजुर्गों और खुद को भी बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी प्रकार की एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं नहीं देनी चाहिए।
पानी उबालकर पीएं, बिना परामर्श दवाओं का सेवन न करें
डॉ. पद्मिनी के अनुसार केवल स्वच्छ, उबला हुआ या फिल्टर किया गया पानी ही पीना चाहिए। खुले, बासी और कटे हुए खाद्य पदार्थों के सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए। बिना डॉक्टर की लिखित सलाह के किसी भी मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक दवाएं न लें। दस्त या उल्टी की शिकायत होने पर तुरंत ओआरएस का घोल और पर्याप्त मात्रा में पानी लें। पेशाब में जलन, तेज बुखार या कमर में दर्द महसूस होने पर बिना देरी किए डॉक्टर से जांच कराएं।
