पन्ना टाइगर रिजर्व में खुशियों की दहाड़: धूंधुआ सेहा में बाघिन P-652 ने दिए दो शावकों को जन्म, गूंजी किलकारी
पन्ना टाइगर रिजर्व के ऐतिहासिक धूंधुआ सेहा क्षेत्र में बाघिन P-652 ने दो स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। लगभग 10 दिन के दोनों शावकों की वन विभाग विशेष निगरानी कर रहा है। यह घटना पन्ना के सफल बाघ संरक्षण अभियान और देश में टाइगर संरक्षण की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पन्ना टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद सुखद और गर्व की खबर सामने आई है। पन्ना के ऐतिहासिक प्रजनन स्थल धूंधुआ सेहा में एक बार फिर किलकारियां गूंज उठी हैं। बाघिन P-652 ने दो स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार दोनों शावकों की उम्र करीब 10 दिन बताई जा रही है। वन विभाग की विशेष निगरानी टीम लगातार उनकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है ताकि प्राकृतिक वातावरण में उनका सुरक्षित विकास सुनिश्चित किया जा सके। इस नई खुशखबरी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पन्ना टाइगर रिजर्व देश के सबसे सफल बाघ संरक्षण क्षेत्रों में अपनी पहचान लगातार मजबूत कर रहा है।
धुंधआ सेहा पन्ना के इतिहास में बेहद खास है
धूंधुआ सेहा का नाम पन्ना टाइगर रिजर्व के इतिहास में बेहद खास माना जाता है। यही वह स्थान है, जहां वर्ष 2010 में बाघिन T-1 ने चार शावकों को जन्म देकर पन्ना के बाघ पुनर्स्थापन कार्यक्रम को ऐतिहासिक सफलता दिलाई थी। उस समय पन्ना में बाघों की संख्या लगभग समाप्त हो चुकी थी, लेकिन सुनियोजित संरक्षण प्रयासों और वैज्ञानिक प्रबंधन के चलते आज यह क्षेत्र फिर से बाघों की सुरक्षित शरणस्थली बन चुका है। अब उसी धूंधुआ सेहा में बाघिन P-652 द्वारा दो नए शावकों को जन्म देना इस सफलता की नई कड़ी माना जा रहा है।
ये भी पढ़ें- पन्ना टाइगर रिजर्व में वर्चस्व की खूनी जंग: बाघ P-661 ने किया हमला, बाघिन P-151 की 17 माह की मादा शावक की मौत
पार्क प्रबंधन ने की पुष्टि
पन्ना टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वीरेंद्र पटेल ने बताया कि दोनों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं। उनकी सुरक्षा और देखरेख के लिए विशेष टीम तैनात की गई है, जो कैमरा ट्रैप और नियमित मॉनिटरिंग के माध्यम से हर गतिविधि पर नजर रख रही है। फिलहाल बाघिन अपने शावकों के साथ सुरक्षित है और उन्हें प्राकृतिक तरीके से पालन-पोषण कर रही है। वन विभाग इस दौरान किसी भी तरह के मानवीय हस्तक्षेप से बचते हुए पूरी सावधानी बरत रहा है।
प्रबंधन में खुशी की लहर
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि हर नए शावक का जन्म न केवल पन्ना टाइगर रिजर्व बल्कि पूरे देश के बाघ संरक्षण अभियान के लिए उत्साहजनक संकेत है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि बेहतर वन प्रबंधन, प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और सतत संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक परिणाम लगातार सामने आ रहा है। धूंधुआ सेहा से आई यह खुशखबरी एक बार फिर पन्ना को देश के सफलतम टाइगर संरक्षण मॉडल के रूप में स्थापित करती है।

दो शावकों के जन्म की पुष्टि पीटीआर प्रबंधन ने भी कर दी है।
