पांच दिवसीय एमपी दौरे पर राष्ट्रपति मुर्मू: इंदौर-बैतूल के बाद ओंकारेश्वर पहुंचीं; ग्वालियर-कूनो भी जाएंगी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पांच दिवसीय मध्य प्रदेश दौरे पर इंदौर, बैतूल और ओंकारेश्वर पहुंचीं। बैतूल में उन्होंने जनजातीय सशक्तिकरण, आधुनिक शिक्षा, डिजिटल संसाधनों और प्राकृतिक खेती पर जोर दिया। दौरे के दौरान वे जबलपुर, ग्वालियर और कूनो नेशनल पार्क भी जाएंगी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 18 से 22 जून तक पांच दिनी मध्य प्रदेश यात्रा पर गुरुवार सुबह इंदौर पहुंचीं। यहां देवी अहिल्या विमानतल पर उनकी अगवानी राज्यपाल मंगु भाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की। यहां से वे बैतूल पहुंची। यहां उन्होंने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण महासम्मेलन में भाग लिया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि जनजातियों का प्रकृति से सामंजस्य आज दुनिया के प्रेरणादायी है। बैतूल के बाद राष्ट्रपति मुर्मू तीर्थनगरी ओंकारेश्वर पहुंचीं।
विशेष विमान से इंदौर आईं, हेलिकॉप्टर से बैतूल गईं
गुरुवार सुबह विशेष विमान से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दिल्ली से इंदौर आईं। विमानतल पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने उनका स्वागत किया। कुछ देर विमानतल पर रुकने के बाद वे वायुसेना के हेलिकॉप्टर से बैतूल के लिए रवाना हुईं। इंदौर एयरपोर्ट के पांच किलोमीटर क्षेत्र को नो-फ्लाइंग जोन घोषित किया गया था। उनका विमान सुबह 9:25 बजे एयरपोर्ट पहुंचा। राष्ट्रपति के मध्य प्रदेश दौरे से पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट की, जिसमें लिखा कि संस्कृति, संस्कार और कला की पावन धरा मध्य प्रदेश में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का मध्य प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक स्वागत करता हूं।
जनजातीय युवाओं को आधुनिक शिक्षा और डिजिटल संसाधनों से जोड़ना जरूरी, बैतूल में बोलीं राष्ट्रपति
राष्ट्रपति मुर्मू ने बैतूल में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय संस्थान द्वारा आयोजित आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण महासम्मेलन में शिरकत की। इसे संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने जनजातीय समाज के समग्र विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन पर आधारित विकास मॉडल की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि देश के जनजातीय समुदायों ने सदियों से प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जिया है और यही परंपरा आज दुनिया के लिए प्रेरणा बन सकती है। बदलते समय के साथ जनजातीय युवाओं को आधुनिक शिक्षा, तकनीकी ज्ञान, कौशल विकास और डिजिटल संसाधनों से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि विकास की इस प्रक्रिया में उनकी सांस्कृतिक पहचान, परंपराएं और आध्यात्मिक मूल्य सुरक्षित रहना चाहिए।
प्राकृतिक खेती भविष्य की जरूरत
राष्ट्रपति ने प्राकृतिक खेती को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। ऐसे में प्राकृतिक खेती न केवल कृषि क्षेत्र को नई दिशा दे सकती है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया अनेक चुनौतियों, तनाव और संघर्षों का सामना कर रही है। ऐसे दौर में आध्यात्मिक मूल्यों, सामाजिक सद्भाव और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना मानवता को नई दिशा दे सकती है। महासम्मेलन में राज्यपाल मंगुभाई पटेल, केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उईके, प्रभारी मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग मौजूद रहे।
पढ़ें: ATS की बड़ी कार्रवाई में अब तक छह गिरफ्तारी; पाकिस्तानी कनेक्शन भी उजागर
तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में राष्ट्रपति का भव्य स्वागत
राष्ट्रपति मुर्मू बैतूल से हेलिकॉप्टर के माध्यम से तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर पहुंचीं। कड़े सुरक्षा प्रबंधों और पारंपरिक आत्मीयता के बीच उनका भव्य स्वागत किया गया। ओंकारेश्वर पहुंचने पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल तथा प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री धर्मेंद्र भावसिंह लोधी ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका आत्मीय स्वागत किया। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर ओंकारेश्वर को विशेष रूप से सजाया गया था। पूरे नगर में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। ओंकारेश्वर में रात्रि विश्राम के बाद शुक्रवार को वे यहां आयोजित सिकल सेल जागरूकता कार्यक्रम में शामिल होंगी।
जबलपुर, ग्वालियर और श्योपुर भी जाएंगी राष्ट्रपति
शुक्रवार को सुबह 11.30 बजे राष्ट्रपति ओंकारेश्वर से रवाना होकर 12.15 बजे इंदौर एयरपोर्ट पहुंचेंगी। यहां से वे 12.25 बजे पश्चिम बंगाल के कलाईकुंडा के लिए रवाना हो जाएंगी। इसके बाद 20 जून को शाम 6.20 बजे राष्ट्रपति जबलपुर पहुंचेंगी और सर्किट हाउस में रात्रि विश्राम करेंगी। 21 जून सुबह 7.20 बजे वे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य कार्यक्रम में शामिल होंगी। इसके बाद दोपहर 1.20 बजे रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगी। जबलपुर से राष्ट्रपति दोपहर 1.20 बजे ग्वालियर रवाना होगी और दोपहर 2.20 बजे पहुंचेंगी। यहां से हेलीकॉप्टर से कूनो नेशनल पार्क जाएंगी। दोपहर 3.35 बजे कूनो गेस्ट हाउस पहुंचेगी। कूनो में वे रात्रि विश्राम करेंगी। 22 जून की सुबह राष्ट्रपति सुबह 6.30 बजे कूनो नेशनल पार्क का भ्रमण करेंगी और इसके बाद सुबह 10.20 बजे कूनो नेशनल पार्क हेलीपेड से प्रस्तान कर सुबह 11.05 बजे ग्वालियर एयरपोर्ट पहुंचेगी। सुबह 11.15 बजे राष्ट्रपति ग्वालियर से दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगी।
राष्ट्रपति ने की पूजा अर्चना
इधर गुरुवार देर शाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पवित्र तीर्थस्थल ओंकारेश्वर और द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल ममलेश्वर मंदिर में दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने दोनों मंदिरों में विधि-विधान से पूजा की तथा भगवान शिव का अभिषेक किया। ममलेश्वर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश से पहले राष्ट्रपति मुर्मु ने नंदी महाराज की प्रतिमा पर बेलपत्र अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद मुख्य गर्भगृह में मंदिर के पुजारियों ने वैदिक रीति-रिवाजों और मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव का अभिषेक एवं पूजन कराया। इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु ने देशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और कल्याण की कामना की।
