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श्मशान घाट तक नसीब नहीं हुआ: तिरपाल के नीचे हुआ बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार; बारिश में बेबस दिखा पूरा गांव
Wed, 12 Aug 2026 12:13 PM IST
रायसेन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायसेन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायसेन
Published by: रायसेन ब्यूरो
Updated Wed, 12 Aug 2026 12:13 PM IST
सार
रायसेन के बेगमगंज तहसील के पिपलिया खुर्द गांव में श्मशान घाट नहीं होने के कारण 75 वर्षीय काशी बाई का अंतिम संस्कार मूसलाधार बारिश के बीच तिरपाल और छातों के सहारे करना पड़ा। ग्रामीणों ने गांव में श्मशान घाट, शेड और पक्के रास्ते की मांग उठाई है।
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छाते और तिरपाल के सहारे अंतिम संस्कार
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
रायसेन में मूसलाधार बारिश और कीचड़ से लथपथ रास्तों के बीच बेगमगंज तहसील के ग्राम पिपलिया खुर्द में एक तस्वीर ने पूरे गांव को झकझोर दिया। गांव में श्मशान घाट न होने के कारण ग्रामीणों को बरसते पानी में तिरपाल और छातों के सहारे बुजुर्ग महिला काशी बाई का अंतिम संस्कार करना पड़ा। इस घटना के बाद गांव में मूलभूत सुविधाओं की कमी और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, पिपलिया खुर्द निवासी 75 वर्षीय काशी बाई का सोमवार रात निधन हो गया था। मंगलवार सुबह से ही इलाके में तेज बारिश हो रही थी। गांव में श्मशान घाट न होने के कारण परिवार और ग्रामीणों के सामने शव के अंतिम संस्कार को लेकर दुविधा खड़ी हो गई।
तिरपाल लगाकर अंतिम संस्कार किया
पास में कोई पक्का स्थान न होने से ग्रामीणों ने खेत के किनारे खुले स्थान पर ही तिरपाल बांधा, छाते लगाए और उसी में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की। बारिश के कारण लकड़ियां भी गीली हो गईं, जिससे अंतिम संस्कार में काफी देर लगी।
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20 साल से गांव में काम पूरा नहीं हो सका
ग्रामीणों का कहना है कि हर बार बारिश या धूप में इसी तरह खुले में अंतिम संस्कार करना पड़ता है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भी इसी परेशानी से गुजरना पड़ता है। पिपलिया खुर्द बेगमगंज विधानसभा क्षेत्र में आता है। ग्रामीणों का आरोप है कि 20 साल से अधिक समय से प्रदेश में एक ही सरकार है और क्षेत्र से पूर्व कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं, बावजूद इसके गांव में आज तक श्मशान घाट, शेड या पक्का रास्ता नहीं बन पाया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जीते जी सड़क, पानी और स्वास्थ्य की समस्या है और मरने के बाद सम्मानजनक अंतिम संस्कार की जगह भी नहीं है। उनकी मांग है कि हर गांव में कम से कम एक श्मशान घाट, चारदीवारी और शेड जरूर बनना चाहिए। इस घटना के बाद सियासत भी गरमा गई। विपक्ष ने इसे सरकार की नाकामी बताया और कहा कि विकास के दावों के बीच गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं।
क्या बोले एसडीएम?
बेगमगंज एसडीएम ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही राजस्व और पंचायत विभाग की टीम को गांव भेजा गया था। ग्रामीणों से चर्चा कर श्मशान घाट के लिए भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
ये भी पढ़ें- MP News: भारी बारिश और उफनती नदियों के बीच एसडीईआरएफ-होमगार्ड ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया
पिपलिया खुर्द की यह घटना अकेली नहीं है। रायसेन जिले के कई गांवों में आज भी श्मशान की पक्की व्यवस्था नहीं है। बरसात में कीचड़, गर्मी में धूप और ठंड में खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करना ग्रामीणों की मजबूरी बन गया है। काशी बाई का अंतिम संस्कार तो तिरपाल के नीचे हो गया, लेकिन इस तस्वीर ने एक बार फिर याद दिलाया कि विकास तब तक अधूरा है, जब तक गांव का आखिरी व्यक्ति भी सम्मान के साथ विदा न हो सके।
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जानकारी के अनुसार, पिपलिया खुर्द निवासी 75 वर्षीय काशी बाई का सोमवार रात निधन हो गया था। मंगलवार सुबह से ही इलाके में तेज बारिश हो रही थी। गांव में श्मशान घाट न होने के कारण परिवार और ग्रामीणों के सामने शव के अंतिम संस्कार को लेकर दुविधा खड़ी हो गई।
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तिरपाल लगाकर अंतिम संस्कार किया
पास में कोई पक्का स्थान न होने से ग्रामीणों ने खेत के किनारे खुले स्थान पर ही तिरपाल बांधा, छाते लगाए और उसी में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की। बारिश के कारण लकड़ियां भी गीली हो गईं, जिससे अंतिम संस्कार में काफी देर लगी।
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20 साल से गांव में काम पूरा नहीं हो सका
ग्रामीणों का कहना है कि हर बार बारिश या धूप में इसी तरह खुले में अंतिम संस्कार करना पड़ता है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भी इसी परेशानी से गुजरना पड़ता है। पिपलिया खुर्द बेगमगंज विधानसभा क्षेत्र में आता है। ग्रामीणों का आरोप है कि 20 साल से अधिक समय से प्रदेश में एक ही सरकार है और क्षेत्र से पूर्व कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं, बावजूद इसके गांव में आज तक श्मशान घाट, शेड या पक्का रास्ता नहीं बन पाया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जीते जी सड़क, पानी और स्वास्थ्य की समस्या है और मरने के बाद सम्मानजनक अंतिम संस्कार की जगह भी नहीं है। उनकी मांग है कि हर गांव में कम से कम एक श्मशान घाट, चारदीवारी और शेड जरूर बनना चाहिए। इस घटना के बाद सियासत भी गरमा गई। विपक्ष ने इसे सरकार की नाकामी बताया और कहा कि विकास के दावों के बीच गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं।
क्या बोले एसडीएम?
बेगमगंज एसडीएम ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही राजस्व और पंचायत विभाग की टीम को गांव भेजा गया था। ग्रामीणों से चर्चा कर श्मशान घाट के लिए भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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पिपलिया खुर्द की यह घटना अकेली नहीं है। रायसेन जिले के कई गांवों में आज भी श्मशान की पक्की व्यवस्था नहीं है। बरसात में कीचड़, गर्मी में धूप और ठंड में खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करना ग्रामीणों की मजबूरी बन गया है। काशी बाई का अंतिम संस्कार तो तिरपाल के नीचे हो गया, लेकिन इस तस्वीर ने एक बार फिर याद दिलाया कि विकास तब तक अधूरा है, जब तक गांव का आखिरी व्यक्ति भी सम्मान के साथ विदा न हो सके।
