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Rajgarh News: राजगढ़ में दिग्विजय सिंह की नागर के खिलाफ व्यूहरचना, पूर्व विधायक ममता का भी मिल रहा साथ

Wed, 24 Apr 2024 02:38 PM IST
Rajgarh bureau राजगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 24 Apr 2024 02:38 PM IST
सार

Rajgarh Lok Sabha Seat: मध्यप्रदेश की राजगढ़ लोकसभा सीट पूरे देश में हॉट सीट बनी हुई है। कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को प्रत्याशी बनाया है। उनका मुकाबला भाजपा के दो बार के सांसद रोडमल नागर से है।  

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Digvijay Singh vs Rodmal Nagar in Rajgarh, Digvijay gets support from Ex BJP MLA Mamlta Meena
राजगढ़ में दिग्विजय सिंह दे रहे नागर को चुनौती। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश की सबसे चर्चित सीट राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र में इस बार के लोकसभा चुनाव में कुछ अलग हैं। मैदान में भाजपा की और से जहां पिछले दस वर्षों से सांसद रोडमल नागर है वही कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है। ये मुकाबला टक्कर का नजर आ रहा है। दोनों ही पार्टियों ने जोर-आजमाइश बढ़ा दी है। 

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राजगढ़ सीट पर 2014 से भाजपा का कब्जा है। रोडमल नागर यहां से दो बार से सांसद हैं। भाजपा ने उन्हें तीसरी मर्तबा फिर से मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को प्रत्याशी बनाया तो यह सीट चर्चा का विषय बन गई है। दिग्विजय सिंह ने पदयात्रा की है तो भाजपा के बड़े-बड़े दिग्गज नेताओं ने राजगढ़ में प्रचार तेज कर दिया है। भाजपा प्रत्याशी रोडमल नागर ने 2014 में कांग्रेस के सांसद नारायण सिंह आमलावे को हराया और 2019 में मोना सुस्तानी को लगभग चार लाख मतों से हराया था। मोदी लहर में रोडमल नागर दो बार सांसद बने और अब तीसरी बार फिर मैदान में हैं। नागर का दावा है कि उन्होंने क्षेत्र में जो विकास कार्य किए हैं, उनके आधार पर जनता उन्हें तीसरी बार संसद भेजेगी। हालांकि, विरोधी उन पर आरोप लगाते हैं कि उन्होंने कुछ भी नहीं किया। पार्टी में भी उनके टिकट को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई थी।  राजगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार तनवीर वारसी ने कहा कि निश्चित तौर पर यह दिग्विजय सिंह का आखिरी चुनाव होगा। उन्होंने राजगढ़ के लिए जो बोया है, वह निश्चित तौर पर काटने ही राजगढ़ आए हैं। हालांकि, वरिष्ठ पत्रकार धर्मराज सिंह परमार ने कहा कि दिग्विजय सिंह को भाजपा राम के नाम पर घेर रही है। हकीकत यह है कि राम किसी एक दल के नहीं हो सकते। राजगढ़ में मोदी लहर से ज्यादा राम की लहर हावी हो सकती है। हालांकि, एक और वरिष्ठ पत्रकार कमल वर्मा इस बात से सहमत नहीं हैं। वर्मा का कहना है कि दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री रहते हुए दलितों को जमीन के पट्टे वितरित किए थे। उन पर दिग्विजय का प्रभाव आज भी है। इसका फायदा उन्हें हो सकता है।  
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ना-ना करते प्रत्याशी बने दिग्विजय
कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह पहले तो चुनाव न लड़ने की बात करते रहे, लेकिन फिर पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी बनाया तो अनुशासित सिपाही की तरह मैदान पकड़ लिया। लगभग 33 वर्षो बाद राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बने हैं। उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार के विरुद्ध पदयात्रा शुरू की और ग्रामीणों से मेल-मुलाकात और ईवीएम की जगह मतपत्र से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की। साथ ही 384 प्रत्याशियों को मैदान में उतारने का कैंपेन भी शुरू किया था। हालांकि, इसमें वे नाकाम ही रहे। दिग्विजय राजगढ़ से 1984 में सांसद रह चुके हैं। 1989 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 1991 में उपचुनाव में वे राजगढ़ सांसद बने। उसके बाद 1993 में मुख्यमंत्री। तभी से राजगढ़ जिला दिग्विजय सिंह का गढ़ कहलाता है।  
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भाजपा के बड़े नेताओं के दौरे
दिग्विजय सिंह को राजगढ़ में घेरने के लिए भाजपा के बड़े नेताओं के दौरे बढ़ गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर एक के बाद एक जुबानी हमले हुए। 15 अप्रैल को राजगढ़ में भाजपा प्रत्याशी की नामांकन सभा में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तो दिग्विजय सिंह को रामद्रोही,और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने आतंकवादियों को गले लगाने वाला तक बता दिया। दिग्विजय ने इसकी शिकायत चुनाव आयोग और राजगढ़ कोतवाली थाने में भी की थी। 

भाजपा की पूर्व विधायक का मिला साथ
राजगढ़ संसदीय क्षेत्र की आठ विधानसभाओं में से एक है चाचौड़ा विधानसभा सीट। यहां से भाजपा की सांसद रही ममता मीणा का टिकट 2023 में कट गया था। उन्होंने आम आदमी पार्टी का दामन थामा और चुनाव लड़ा। उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस बार इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी के तौर पर दिग्विजय को ममता का भी समर्थन है। दोनों संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कर चुके हैं। ममता मीणा रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी रघुवीर सिंह मीणा की पत्नी हैं, जो इस समय आम आदमी पार्टी में है। ममता को दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह का विरोधी माना जाता है। इसके बाद भी इस समय ममता का समर्थन दिग्विजय को मिल रहा है। 

दिग्विजय भी घिरे आरोपों से
भाजपा की सभाओं में दिग्विजय को राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा पर सवाल उठाने की वजह से घेरा जा रहा है। नागर अपनी सभाओँ में जनता से माफी मांगते हैं। भूल सुधारने के साथ ही इलाके में विकास की गंगा बहाने का वादा कर रहे हैं। दिग्विजय सिंह पर भी आरोप हैं कि मुख्यमंत्री रहते हुए राजगढ़ में लगने वाली फैक्टरी को वे राघौगढ़ ले गए। 


विधानसभा चुनावों में भाजपा का दबदबा
दिसंबर में हुए विधानसभा चुनावों में राजगढ़ लोकसभा सीट में शामिल आठ में से छह विधानसभा सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। आठों सीटों पर मिले वोटों में कांग्रेस 1.71 लाख वोटों से पीछे दिख रही है। 2018 की बात करें तो राजगढ़ की इन आठ विधानसभा सीटों पर कांग्रेस को भाजपा से 97 हजार वोट ज्यादा मिले थे। इसके बाद भी 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने चार लाख के अंतर से सीट जीती थी। 

(राजगढ़ से अब्दुल अंसारी की रिपोर्ट)

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