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Rajgarh News: खिलचीपुर के जगन्नाथ मंदिर में लौटी रौनक, विवाद के बाद प्रतिमाओं की वापसी से गूंजे भक्ति का स्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगढ़
Published by: राजगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 24 Mar 2026 09:38 PM IST
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सार
राजगढ़ के खिलचीपुर जगन्नाथ मंदिर में प्रतिमाएं विवाद के बाद वृंदावन से पुलिस सुरक्षा में वापस लाई गईं और पुनः स्थापित की गईं। पुजारी की असुरक्षा के चलते प्रतिमाएं ले जाई गई थीं। वापसी पर भक्ति माहौल लौटा। प्रशासन के आश्वासन से श्रद्धालुओं का विश्वास बहाल हुआ।
खिलचीपुर में फिर जगी आस्था जगन्नाथ मंदिर में प्रतिमाओं की वापसी
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विस्तार
राजगढ़ जिले के खिलचीपुर स्थित जगन्नाथ मंदिर में बीते कुछ दिनों से चल रहे घटनाक्रम के बाद सोमवार को एक बार फिर आस्था और श्रद्धा की भव्य वापसी देखने को मिली। भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा जी की प्रतिमाएं पुलिस सुरक्षा के बीच वृंदावन से वापस लाई गईं और पूरे विधि-विधान के साथ मंदिर में पुनः विराजमान की गईं। प्रतिमाओं की वापसी के साथ ही मंदिर परिसर, जो कुछ दिनों से सूना पड़ा था, अचानक श्रद्धालुओं की भीड़ और भक्ति के माहौल से जीवंत हो उठा।
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सोमवार देर शाम जैसे ही भगवान की प्रतिमाएं मंदिर पहुंचीं, वैसे ही सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ पड़े। “हरे रामा-हरे कृष्णा” के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भगवान का स्वागत किया। इसके बाद सामूहिक भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें ढोल-मंजीरों और तालियों की धुन पर भक्त भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए। शाम करीब 7 बजे विशेष आरती का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी संख्या शामिल हुई। दीपों की रोशनी और भक्ति संगीत के बीच आयोजित आरती ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। देर रात तक मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और दर्शन का सिलसिला जारी रहा। कई दिनों बाद मंदिर में लौटे इस उल्लास ने स्थानीय लोगों के चेहरों पर संतोष और खुशी की झलक साफ दिखाई दी।
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ये था मामला
दरअसल, इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि कुछ दिन पहले शुरू हुई थी, जब मंदिर के पुजारी विष्णुदास सखा ने खुद को असुरक्षित महसूस करते हुए गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि मंदिर परिसर के आसपास कुछ असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता था, जहां नशाखोरी जैसी गतिविधियां भी होती थीं। पुजारी द्वारा इसका विरोध किए जाने पर उन्हें धमकियां दी गईं और कथित तौर पर उनके साथ मारपीट भी की गई। पुजारी ने यह भी आरोप लगाया था कि उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। लगातार मिल रही धमकियों और असुरक्षा के माहौल से परेशान होकर उन्होंने गुरुवार रात एक बड़ा कदम उठाया और भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा जी की प्रतिमाएं अपने साथ लेकर वृंदावन के लिए रवाना हो गए। अगली सुबह जब श्रद्धालु मंदिर पहुंचे तो गर्भगृह खाली मिला। भगवान की प्रतिमाएं नदारद होने से लोग स्तब्ध रह गए और पूरे नगर में मायूसी छा गई। इस घटना ने न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत किया, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए।
वीडियो में बताई पीड़ा
इस बीच पुजारी विष्णुदास सखा का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें उन्होंने अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने बताया कि उन्हें गालियां दी गईं, धमकाया गया और यहां तक कि मारपीट भी की गई। उन्होंने कहा कि वे अपनी इच्छा से मंदिर नहीं छोड़ रहे हैं, बल्कि परिस्थितियों के कारण मजबूर हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस हरकत में आए। खिलचीपुर पुलिस और नगर के कुछ प्रमुख लोग वृंदावन पहुंचे, जहां पुजारी से बातचीत की गई और उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया। काफी समझाइश के बाद पुजारी प्रतिमाओं के साथ वापस आने के लिए राजी हो गए। इसके बाद पुलिस टीम की मौजूदगी में प्रतिमाओं को सुरक्षित रूप से खिलचीपुर लाया गया।
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प्रतिमाओं की पुनः स्थापना
सोमवार को पूरे विधि-विधान और धार्मिक परंपराओं के अनुसार प्रतिमाओं की पुनः स्थापना की गई। इस आयोजन ने न केवल मंदिर में पूजा-अर्चना की नियमित व्यवस्था को बहाल किया, बल्कि श्रद्धालुओं के मन में भी विश्वास को मजबूत किया। खिलचीपुर का यह जगन्नाथ मंदिर स्थानीय आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। नगर की सरकारी भूमि पर श्रीराम पेट्रोल पंप के पास स्थित संत सोहन दास महाराज के आश्रम परिसर में वर्ष 2021 में रामनवमी के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा जी की प्रतिमाओं की स्थापना की गई थी। ये प्रतिमाएं जगन्नाथ पुरी से लाई गई थीं और वृंदावन के संत गोलोक वृंदावन दास महाराज के मार्गदर्शन में विधि-विधानपूर्वक स्थापित की गई थीं। स्थापना के बाद से यह मंदिर धीरे-धीरे धार्मिक गतिविधियों का केंद्र बन गया। यहां नियमित रूप से भजन-कीर्तन, आरती और विभिन्न धार्मिक आयोजन होते रहे हैं। हर वर्ष जगन्नाथ रथ यात्रा भी बड़े उत्साह के साथ निकाली जाती है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु भाग लेते हैं। पिछले पांच वर्षों से वृंदावन से आए पुजारी विष्णुदास सखा यहां सेवा कर रहे थे। वे मंदिर परिसर में ही रहते थे और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान की सेवा में लगे रहते थे। स्थानीय लोग उन्हें एक सरल, शांत और समर्पित पुजारी के रूप में जानते हैं।

खिलचीपुर में फिर जगी आस्था जगन्नाथ मंदिर में प्रतिमाओं की वापसी

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