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Ratlam News: दो भाइयों और भतीजे को उम्रकैद, जमीन बंटवारे की रंजिश में लाठियों से पीट-पीट कर की थी हत्या

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रतलाम Published by: रतलाम ब्यूरो Updated Sun, 08 Mar 2026 08:05 PM IST
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सार

जमीन विवाद में रामचंद्र गरवार की लाठियों से पीटकर हत्या करने के मामले में अदालत ने सगे भाई तैलिया, चचेरे भाई गोबा और भतीजे राजू गरवार को दोषी ठहराया। तीनों को बीएनएस धारा 103 में आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई। मामले में एफएसएल, पोस्टमार्टम और मृत्युकालीन बयान अहम सबूत बने।

Two brothers and a nephew were sentenced to life imprisonment for beating them to death with sticks
हत्या के मामले में मिली सजा
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विस्तार

जमीन विवाद के चलते एक व्यक्ति की लाठियों से पीटकर हत्या करने के मामले में न्यायालय ने मृतक के सगे भाई, चचेरे भाई और भतीजे को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश रामदेव की अदालत ने आरोपी तैलिया गरवार (49), गोबा गरवार (52) और राजू गरवार (24) निवासी ग्राम उमरबट्टा को बीएनएस की धारा 103 के तहत आजीवन कारावास और तीन-तीन हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया। साथ ही बीएनएस की धारा 109 के तहत सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास और दो-दो हजार रुपए जुर्माने की सजा भी सुनाई गई। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

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अपर लोक अभियोजक समरथ पाटीदार के अनुसार 21 मई 2025 की रात रामचंद्र गरवार अपनी पत्नी ऐता उर्फ एतरीबाई के साथ घर के बाहर सो रहे थे। इसी दौरान जमीन बंटवारे की पुरानी रंजिश को लेकर आरोपी तैलिया गरवार, गोबा गरवार और राजू गरवार लाठियां लेकर उनके घर पहुंचे और रामचंद्र पर जानलेवा हमला कर दिया। हमले में रामचंद्र गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि बीच-बचाव करने आई उनकी पत्नी भी घायल हो गईं।
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शोर सुनकर रामचंद्र के छोटे भाई पेमा और जमाई राजेश मौके पर पहुंचे, तब तक आरोपी वहां से फरार हो गए। घायल रामचंद्र और ऐता बाई को उपचार के लिए पहले रावटी के सरकारी अस्पताल और बाद में मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। उपचार के दौरान रामचंद्र की मौत हो गई। मामले में रावटी थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी दीपक मंडलोई ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त लाठियां और खून लगे कपड़े बरामद किए थे।

न्यायालय के निर्णय के प्रमुख आधार

  • घटना के बाद घायल अवस्था में रामचंद्र द्वारा दिया गया बयान और उसका वीडियो न्यायालय ने मृत्युकालीन कथन माना।
  • पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टर ने मृतक के शरीर पर 16 चोटें पाई।
  • आरोपियों से जब्त लाठियों, कपड़ों और मृतक के कपड़ों में एफएसएल जांच में समान डीएनए मिला।
  • पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. प्रदीप मिश्रा ने चोटें आरोपियों से बरामद लाठियों जैसे हथियार से होना बताया।


प्रकरण को पुलिस अधीक्षक ने सनसनीखेज श्रेणी में चिन्हित किया था। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाह, 68 दस्तावेज और 33 आर्टिकल प्रस्तुत किए गए, जिसके आधार पर न्यायालय ने फैसला सुनाया।

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