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Sagar News: काले हिरण शिकार मामले में अदालत सख्त, आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर जेल भेजा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
Published by: सागर ब्यूरो
Updated Sat, 27 Dec 2025 02:12 PM IST
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सार
काले हिरण के शिकार के मामले में गिरफ्तार किए मुख्य आरोपी समेत तीन अन्य लोगों की जमानत याचिका न्यायालय ने खारिज कर दी। बचाव पक्ष की ओर से मानवीय आधार पर जमानत की मांग की गई थी।
फाइल फोटो
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विस्तार
जिले के राहतगढ़ वन क्षेत्र में काले हिरण के शिकार मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने शनिवार को सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य आरोपी डॉक्टर वसीम खान सहित तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश सुधांशु सक्सेना की अदालत ने अपराध की प्रकृति को गंभीर मानते हुए आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता फिरोज खान ने दलील दी कि डॉ. वसीम खान केवल एक जन्मदिन की पार्टी में शामिल होने सागर आए थे और उन्हें षड्यंत्र के तहत फंसाया गया है। अधिवक्ता ने आरोपी की 9 वर्षीय पुत्री और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए मानवीय आधार पर जमानत की मांग की थी।
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वन विभाग की ओर से लोक अभियोजक ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि काला हिरण वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की 'शेड्यूल-1' में शामिल है, जो इसे बाघ के समान उच्च संरक्षण प्रदान करता है। विभाग ने कोर्ट के समक्ष आरोपियों के खिलाफ पुख्ता और तकनीकी साक्ष्य पेश किए, जिन्हें प्राथमिक तौर पर अपराध की पुष्टि के लिए पर्याप्त माना गया।
इस मामले में वन विभाग की जांच अब स्थानीय स्तर से निकलकर बड़े नेटवर्क की ओर मुड़ गई है। ट्रेनी आईएफएस अधिकारी जयप्रकाश ने बताया कि मामले में कुछ नए संदिग्धों के नाम सामने आए हैं, जिनके मोबाइल नंबर ट्रेस किए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच के संकेत मिल रहे हैं कि इस शिकार के पीछे एक संगठित सिंडिकेट का हाथ हो सकता है। पुलिस की मदद से कॉल डिटेल्स खंगाली जा रही हैं, जिससे आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां संभव हैं।
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सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता फिरोज खान ने दलील दी कि डॉ. वसीम खान केवल एक जन्मदिन की पार्टी में शामिल होने सागर आए थे और उन्हें षड्यंत्र के तहत फंसाया गया है। अधिवक्ता ने आरोपी की 9 वर्षीय पुत्री और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए मानवीय आधार पर जमानत की मांग की थी।
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इस मामले में वन विभाग की जांच अब स्थानीय स्तर से निकलकर बड़े नेटवर्क की ओर मुड़ गई है। ट्रेनी आईएफएस अधिकारी जयप्रकाश ने बताया कि मामले में कुछ नए संदिग्धों के नाम सामने आए हैं, जिनके मोबाइल नंबर ट्रेस किए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच के संकेत मिल रहे हैं कि इस शिकार के पीछे एक संगठित सिंडिकेट का हाथ हो सकता है। पुलिस की मदद से कॉल डिटेल्स खंगाली जा रही हैं, जिससे आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां संभव हैं।

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