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MP: कलेक्टर की चौखट पर पहुंचे नगरपालिका के रिटायर्ड कर्मचारी, लापरवाही से अटकी ग्रेच्युटी-बीमा राशि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: सीहोर ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2026 12:19 PM IST
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सार
सीहोर नगरपालिका में रिटायर हो चुके कर्मचारियों को ग्रेच्युटी, अवकाश नगदीकरण, बीमा राशि, जीपीएफ और समयमान वेतनमान एरियर का भुगतान समय पर नहीं मिल रहा है। आर्थिक तंगी का हवाला देकर नगरपालिका प्रशासन कर्मचारियों को किश्तों में भुगतान कर रहा है, जबकि कई कर्मचारियों को महीनों बाद भी राशि नहीं मिली।
रिटायरमेंट पर सम्मान नहीं, खाली हाथ विदाई
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विस्तार
सीहोर नगरपालिका में वर्षों तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट अब सम्मान नहीं, बल्कि आर्थिक संकट और परेशानी का कारण बनता जा रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि नौकरी पूरी होने के बाद उन्हें ग्रेच्युटी, अवकाश नगदीकरण, बीमा राशि, जीपीएफ और समयमान वेतनमान एरियर जैसी जरूरी रकम समय पर नहीं मिल रही। हालत यह है कि रिटायरमेंट के बाद भी बुजुर्ग कर्मचारी नगरपालिका दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
‘नगरपालिका का खजाना खाली’ बताकर टाला जा रहा भुगतान
नगरपालिका परिषद सीहोर आर्थिक तंगी का हवाला देकर कर्मचारियों के भुगतान में देरी कर रही है। कर्मचारियों का कहना है कि नौकरी के दौरान हर महीने वेतन से नियमित कटौती होती रही, लेकिन रिटायरमेंट के समय उनका पैसा देने में लगातार देरी की जा रही है। कई कर्मचारियों को एकमुश्त भुगतान नहीं किया जा रहा, बल्कि किश्तों में रकम दी जा रही है। वहीं कुछ कर्मचारियों को महीनों बाद भी कोई भुगतान नहीं मिला है। इससे रिटायर्ड कर्मचारियों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।
जीवनभर नौकरी के बाद भी बुढ़ापे में सहारे का संकट
बीते अप्रैल महीने में नगरपालिका परिषद सीहोर से दो कर्मचारी रिटायर हुए। इनमें स्थायी कर्मचारी कमल परिहार और विनियमित कर्मचारी नंदकिशोर महेश्वरी शामिल हैं। दोनों को रिटायरमेंट के समय कोई बड़ी राशि नहीं मिली। कमल परिहार ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि जिंदगी के सबसे अहम साल नगरपालिका को दे दिए, लेकिन विदाई के समय हाथ खाली हैं। उन्होंने कहा कि अगर समय पर भुगतान मिल जाता तो कोई छोटा-मोटा रोजगार शुरू कर लेते, लेकिन अब महंगाई के दौर में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बताया कि वे पेंशन के पात्र भी नहीं हैं, इसलिए रिटायरमेंट राशि ही उनका एकमात्र सहारा थी। लेकिन भुगतान नहीं मिलने से उनका भविष्य अधर में लटक गया है।
अफसरशाही और बाबूगिरी से कर्मचारी नाराज
रिटायर्ड कर्मचारियों का आरोप है कि नगरपालिका कार्यालय में अफसरों और बाबुओं की मनमानी चल रही है। हर बार नई फाइल, नया बहाना और नई तारीख देकर कर्मचारियों को टाल दिया जाता है। कर्मचारियों का कहना है कि नौकरी के दौरान उनसे समय पर काम और अनुशासन की उम्मीद की जाती थी, लेकिन जब उनके अधिकारों की बारी आई तो पूरा सिस्टम उदासीन हो गया। इससे कर्मचारियों में नाराजगी और निराशा लगातार बढ़ रही है।
जनसुनवाई तक पहुंचा मामला
नगरपालिका की कार्यप्रणाली से परेशान होकर रिटायर्ड कर्मचारी राजेश सूर्यवंशी ने कलेक्टर जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि अवकाश नगदीकरण राशि, बीमा कटौती राशि और शासन द्वारा देय चतुर्थ समयमान वेतनमान एरियर का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि कई बार नगरपालिका कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद कोई अधिकारी उनकी सुनवाई नहीं कर रहा। हर बार केवल आश्वासन देकर वापस भेज दिया जाता है। जनसुनवाई में मामला पहुंचने के बाद भी कर्मचारियों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद कम दिखाई दे रही है।
ये भी पढ़ें- बरगी क्रूज हादसे का मामला अब हाईकोर्ट पहुंचा, दो याचिकाएं दायर, तीन अन्य की तैयारी
किश्तों में भुगतान को मजबूरी बता रहा प्रशासन
नगरपालिका प्रशासन अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर बताते हुए किश्तों में भुगतान करने की बात कह रहा है। नगरपालिका सीएमओ सुधीर सिंह ने कहा कि यह एक स्वायत्तशासी संस्था है और कर्मचारियों का वेतन व अन्य भुगतान टैक्स वसूली पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि जनता समय पर टैक्स जमा नहीं करती, जिससे नगरपालिका का खजाना खाली रहता है। जैसे-जैसे राशि आती है, कर्मचारियों को किश्तों में भुगतान किया जाता है।
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‘नगरपालिका का खजाना खाली’ बताकर टाला जा रहा भुगतान
नगरपालिका परिषद सीहोर आर्थिक तंगी का हवाला देकर कर्मचारियों के भुगतान में देरी कर रही है। कर्मचारियों का कहना है कि नौकरी के दौरान हर महीने वेतन से नियमित कटौती होती रही, लेकिन रिटायरमेंट के समय उनका पैसा देने में लगातार देरी की जा रही है। कई कर्मचारियों को एकमुश्त भुगतान नहीं किया जा रहा, बल्कि किश्तों में रकम दी जा रही है। वहीं कुछ कर्मचारियों को महीनों बाद भी कोई भुगतान नहीं मिला है। इससे रिटायर्ड कर्मचारियों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।
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जीवनभर नौकरी के बाद भी बुढ़ापे में सहारे का संकट
बीते अप्रैल महीने में नगरपालिका परिषद सीहोर से दो कर्मचारी रिटायर हुए। इनमें स्थायी कर्मचारी कमल परिहार और विनियमित कर्मचारी नंदकिशोर महेश्वरी शामिल हैं। दोनों को रिटायरमेंट के समय कोई बड़ी राशि नहीं मिली। कमल परिहार ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि जिंदगी के सबसे अहम साल नगरपालिका को दे दिए, लेकिन विदाई के समय हाथ खाली हैं। उन्होंने कहा कि अगर समय पर भुगतान मिल जाता तो कोई छोटा-मोटा रोजगार शुरू कर लेते, लेकिन अब महंगाई के दौर में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बताया कि वे पेंशन के पात्र भी नहीं हैं, इसलिए रिटायरमेंट राशि ही उनका एकमात्र सहारा थी। लेकिन भुगतान नहीं मिलने से उनका भविष्य अधर में लटक गया है।
अफसरशाही और बाबूगिरी से कर्मचारी नाराज
रिटायर्ड कर्मचारियों का आरोप है कि नगरपालिका कार्यालय में अफसरों और बाबुओं की मनमानी चल रही है। हर बार नई फाइल, नया बहाना और नई तारीख देकर कर्मचारियों को टाल दिया जाता है। कर्मचारियों का कहना है कि नौकरी के दौरान उनसे समय पर काम और अनुशासन की उम्मीद की जाती थी, लेकिन जब उनके अधिकारों की बारी आई तो पूरा सिस्टम उदासीन हो गया। इससे कर्मचारियों में नाराजगी और निराशा लगातार बढ़ रही है।
जनसुनवाई तक पहुंचा मामला
नगरपालिका की कार्यप्रणाली से परेशान होकर रिटायर्ड कर्मचारी राजेश सूर्यवंशी ने कलेक्टर जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि अवकाश नगदीकरण राशि, बीमा कटौती राशि और शासन द्वारा देय चतुर्थ समयमान वेतनमान एरियर का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि कई बार नगरपालिका कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद कोई अधिकारी उनकी सुनवाई नहीं कर रहा। हर बार केवल आश्वासन देकर वापस भेज दिया जाता है। जनसुनवाई में मामला पहुंचने के बाद भी कर्मचारियों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद कम दिखाई दे रही है।
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किश्तों में भुगतान को मजबूरी बता रहा प्रशासन
नगरपालिका प्रशासन अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर बताते हुए किश्तों में भुगतान करने की बात कह रहा है। नगरपालिका सीएमओ सुधीर सिंह ने कहा कि यह एक स्वायत्तशासी संस्था है और कर्मचारियों का वेतन व अन्य भुगतान टैक्स वसूली पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि जनता समय पर टैक्स जमा नहीं करती, जिससे नगरपालिका का खजाना खाली रहता है। जैसे-जैसे राशि आती है, कर्मचारियों को किश्तों में भुगतान किया जाता है।

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