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Sehore News: निजी स्कूलों पर कसा शिकंजा, फीस छुपाई तो अब खैर नहीं! कलेक्टर का आदेश- पोर्टल पर दिखाएं हर शुल्क

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: सीहोर ब्यूरो Updated Wed, 01 Apr 2026 01:26 PM IST
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सार

अभिभावकों के लिए राहत भरी खबर है। निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर अब प्रशासन ने शिकंजा कस दिया है। सीहोर कलेक्टर ने पारदर्शिता लाने के लिए सभी शुल्क ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य किया है।

Sehore: Crackdown on private schools, hide fees and face action; collector orders full disclosure on portal
निजी स्कूलों पर प्रशासन ने कसी नकेल
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विस्तार

सीहोर में निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर अब लगाम कसने की तैयारी हो गई है। कलेक्टर बालागुरू के. ने स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि जिले के सभी निजी विद्यालय शैक्षणिक सत्र 2026-27 की संपूर्ण फीस और शुल्क संबंधी जानकारी शासन के निर्धारित पोर्टल पर 10 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य रूप से अपलोड करें, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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सीहोर जिले के हजारों अभिभावकों की वह पीड़ा, जो हर साल अप्रैल में नई किताबें और फीस की पर्चियां लेते समय सामने आती है, उसे कम करने के लिए प्रशासन ने पहल की है। कलेक्टर बालागुरू के. ने समस्त निजी विद्यालयों के लिए कड़े निर्देश जारी करते हुए शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने का प्रयास किया है।
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कलेक्टर के आदेश के तहत सभी निजी विद्यालयों को ट्यूशन फीस, विकास शुल्क, परीक्षा शुल्क सहित सभी शुल्कों की विस्तृत जानकारी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। समय सीमा का पालन नहीं करने वाले स्कूलों पर फीस विनियमन अधिनियम के तहत अर्थदंड लगाया जाएगा। यह जुर्माना विद्यालयों की छात्र संख्या के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में तय किया गया है।

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अभिभावकों को मिलेगी राहत
गौरतलब है कि हर साल अप्रैल में अभिभावकों पर मनमानी फीस का बोझ बढ़ जाता था। कहीं स्मार्ट क्लास शुल्क तो कहीं डेवलपमेंट फंड के नाम पर अतिरिक्त राशि वसूली जाती थी। अब पोर्टल पर शुल्क प्रदर्शित होने से अभिभावक पहले ही पूरी फीस संरचना देख सकेंगे और अनियमितता होने पर शिकायत भी कर सकेंगे।

फर्जी किताबों पर भी कार्रवाई
कलेक्टर ने फर्जी और डुप्लीकेट आईएसबीएन नंबर वाली किताबों के मामले को भी गंभीरता से लिया है। ऐसे मामलों की जांच के लिए 15 अप्रैल 2026 तक विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। गड़बड़ी मिलने पर संबंधित प्रकाशक और विक्रेताओं पर भी कार्रवाई होगी।

जांच समितियां गठित
आदेशों के पालन के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर जांच समितियां बनाई गई हैं। ये समितियां फीस अपलोड और किताबों की जांच की निगरानी करेंगी, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। कलेक्टर बालागुरू के. ने स्पष्ट कहा है कि शिक्षा के नाम पर किसी भी तरह की अनियमितता या शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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