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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Female cheetah KGP-11, which left Kuno and reached Morena was found injured; rescued and treatment is underway

Sheopur News: कूनो की मादा चीता KGP-11 घायल मिली, वन विभाग ने किया रेस्क्यू; मुरैना के जंगल में चली गई थी

Thu, 04 Jun 2026 08:42 PM IST
श्योपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर Published by: श्योपुर ब्यूरो Updated Thu, 04 Jun 2026 08:42 PM IST
सार

कूनो नेशनल पार्क की मादा चीता KGP-11 मुरैना के पहाड़गढ़ में घायल मिली। 31 मई तक स्वस्थ थी, 1 जून को जख्मी मिली। तेंदुए से संघर्ष की आशंका जताई गई है।

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Female cheetah KGP-11, which left Kuno and reached Morena was found injured; rescued and treatment is underway
कूनो की मादा केजीपी-11 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत की महत्वाकांक्षी चीता पुनर्वास परियोजना से जुड़ी चिंताजनक खबर सामने आई है। कूनो नेशनल पार्क की 23 माह की मादा चीता KGP-11 मुरैना जिले के पहाड़गढ़ वन क्षेत्र में घायल अवस्था में मिली है। वन विभाग की मॉनिटरिंग टीम ने तत्काल रेस्क्यू कर उसे कूनो के वन्यजीव अस्पताल पहुंचाया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार चल रहा है।

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वन अधिकारियों के अनुसार KGP-11 मादा चीता गामिनी और एक नर चीते की संतान है। ट्रैकिंग दल ने 31 मई को उसे पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय पाया था। उसकी चाल, शिकार क्षमता और व्यवहार सामान्य थे। लेकिन 1 जून की सुबह वह पहाड़गढ़ के जंगल में घायल अवस्था में मिली। शरीर पर गहरे घाव पाए जाने के बाद टीम ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर उसे कूनो पहुंचाया।

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प्रारंभिक जांच में वन्यजीव विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि KGP-11 किसी तेंदुए के हमले का शिकार हुई हो सकती है। पहाड़गढ़ क्षेत्र में तेंदुओं की मौजूदगी पहले से दर्ज है। हालांकि वन विभाग ने अभी तक आधिकारिक रूप से हमले की पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि जंगल में क्षेत्रीय संघर्ष सामान्य बात है और किसी अन्य बड़े मांसाहारी से टकराव में भी चीता घायल हो सकता है। घटना के कारणों की पुष्टि के लिए मौके से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और ट्रैप कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है।

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फिलहाल KGP-11 को कूनो के क्वारंटाइन बाड़े में रखा गया है। वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. राजेश वर्मा के नेतृत्व में टीम उसकी सेहत पर लगातार नजर रख रही है। घावों की ड्रेसिंग और एंटीबायोटिक उपचार शुरू कर दिया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक चीता की स्थिति स्थिर है, लेकिन उसे तनाव से दूर रखना आवश्यक है। विस्तृत जांच के लिए दोबारा बेहोश कर एक्स-रे और रक्त परीक्षण किए जाएंगे, ताकि किसी अंदरूनी चोट का पता लगाया जा सके।


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कूनो नेशनल पार्क के क्षेत्र संचालक ने बताया कि KGP-11 ने पिछले महीनों में लंबी दूरी तय की थी और वह कूनो की सीमा पार कर मुरैना तक पहुंच गई थी। सैटेलाइट कॉलर के जरिए उसकी लोकेशन लगातार मॉनिटर की जा रही थी। 31 मई तक सब सामान्य था, लेकिन अचानक घायल मिलने के बाद विभाग अलर्ट हो गया है और निगरानी दलों की संख्या बढ़ा दी गई है।

चीता परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि खुले जंगल में नए क्षेत्र की तलाश के दौरान चीतों का सामना स्थानीय परभक्षियों से होना स्वाभाविक है। यह पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है, लेकिन हर चीते की सुरक्षा परियोजना की सर्वोच्च प्राथमिकता है। KGP-11 गामिनी की संतान होने के कारण परियोजना के लिए विशेष महत्व रखती है। गामिनी भारत में जन्मी पहली पीढ़ी की मादा चीता है।

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि KGP-11 को पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद ही दोबारा जंगल में छोड़ा जाएगा। तब तक उसे क्वारंटाइन बाड़े में विशेष प्रोटोकॉल के तहत रखा जाएगा। केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मामले पर नजर बनाए हुए हैं।

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