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Shivpuri News: केंद्रीय मंत्री के शुभारंभ से पहले ही उखड़ने लगी डामर की सड़क, जांच की मांग उठी; जानें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी
Published by: शिवपुरी ब्यूरो
Updated Wed, 07 May 2025 06:21 PM IST
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सार
Shivpuri: ग्रामीणों का कहना है कि राठखेड़ा से बसई तक लगभग 3.5 किलोमीटर लंबी डामर सड़क बनाई गई है, लेकिन इसकी गुणवत्ता बेहद खराब है। सड़क पर बिछाई गई डामर की लेयर बेहद पतली है और जगह-जगह से उखड़ने लगी है।
केंद्रीय मंत्री के लोकार्पण से पहले उखड़ी नई सड़क
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विस्तार
जिले के पवा स्थित रैपी नदी पर पीडब्ल्यूडी द्वारा नवनिर्मित पुल और सड़क निर्माण कार्य सवालों के घेरे में आ गया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया 9 मई को अपने शिवपुरी दौरे के दौरान इस पुल और सड़क का लोकार्पण करेंगे, लेकिन कार्यक्रम से पहले ही सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि राठखेड़ा से बसई तक लगभग 3.5 किलोमीटर लंबी डामर सड़क बनाई गई है, लेकिन इसकी गुणवत्ता बेहद खराब है। सड़क पर बिछाई गई डामर की लेयर बेहद पतली है और जगह-जगह से उखड़ने लगी है। ग्रामीणों ने इस घटिया निर्माण कार्य की जांच कराने की मांग की है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि पुल निर्माण के साथ ही नई सड़क भी डाली गई थी, लेकिन पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क की थिकनेस निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है, जिससे डामर कुछ ही दिनों में टूटने लगी है।
पढ़ें: एयर अटैक और गैस रिसाव के कारण 40 मिनट में किया गया बचाव, हर स्थिति से निपटने के लिए ग्वालियर तैयार
इस मामले में जब पीडब्ल्यूडी के सब इंजीनियर रविंद्र शर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य निविदा की शर्तों के अनुसार कराया गया है। डामरीकरण की परत 20 एमएम की होनी थी, वही डाली गई है। एक जगह डामर जरूर उखड़ा है, जिसे ठीक कराया जा रहा है। फिलहाल ग्रामीणों की मांग है कि लोकार्पण से पहले सड़क की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच हो, ताकि भविष्य में किसी दुर्घटना या असुविधा से बचा जा सके।
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ग्रामीणों का कहना है कि राठखेड़ा से बसई तक लगभग 3.5 किलोमीटर लंबी डामर सड़क बनाई गई है, लेकिन इसकी गुणवत्ता बेहद खराब है। सड़क पर बिछाई गई डामर की लेयर बेहद पतली है और जगह-जगह से उखड़ने लगी है। ग्रामीणों ने इस घटिया निर्माण कार्य की जांच कराने की मांग की है।
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स्थानीय लोगों ने बताया कि पुल निर्माण के साथ ही नई सड़क भी डाली गई थी, लेकिन पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क की थिकनेस निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है, जिससे डामर कुछ ही दिनों में टूटने लगी है।
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इस मामले में जब पीडब्ल्यूडी के सब इंजीनियर रविंद्र शर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य निविदा की शर्तों के अनुसार कराया गया है। डामरीकरण की परत 20 एमएम की होनी थी, वही डाली गई है। एक जगह डामर जरूर उखड़ा है, जिसे ठीक कराया जा रहा है। फिलहाल ग्रामीणों की मांग है कि लोकार्पण से पहले सड़क की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच हो, ताकि भविष्य में किसी दुर्घटना या असुविधा से बचा जा सके।

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