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शिवपुरी: दो साल के बेटे को साथ लेकर गांवों में ड्यूटी कर रहीं पटवारी संध्या शर्मा, कलेक्टर ने की सराहना

Thu, 29 Oct 2026 05:14 PM IST
शिवपुरी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी Published by: शिवपुरी ब्यूरो Updated Thu, 29 Oct 2026 05:14 PM IST
सार

शिवपुरी की पटवारी संध्या शर्मा अपने दो साल के बेटे को साथ लेकर गांवों में स्वामित्व योजना की जिम्मेदारियां निभा रही हैं। उनके समर्पण की कलेक्टर अर्पित वर्मा ने सराहना की है। उनका प्रयास काम और मातृत्व के बीच संतुलन की मिसाल है।

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Shivpuri's Patwari Sandhya Sharma has become an example amidst responsibilities
मां की जिम्मेदारी और सरकारी ड्यूटी साथ-साथ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकारी नौकरी में फील्ड ड्यूटी की अपनी चुनौतियां होती हैं। गांवों में लगातार भ्रमण, लोगों से संपर्क और दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बीच पारिवारिक जिम्मेदारियों के लिए समय निकालना भी आसान नहीं होता। शिवपुरी जिले की पटवारी संध्या शर्मा इन दिनों अपने काम को लेकर चर्चा में हैं। वह अपने दो साल के बेटे को साथ लेकर गांवों में पहुंच रही हैं और स्वामित्व योजना से जुड़ी जिम्मेदारियां निभा रही हैं। उनके इस प्रयास की जिला कलेक्टर आईएएस अर्पित वर्मा ने भी सराहना की है।

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शिवपुरी जिले के डोंगर हल्के में पदस्थ संध्या शर्मा को स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर काम करना होता है। इस दौरान उन्हें घर-घर पहुंचकर संपत्ति से संबंधित जानकारी जुटाने और आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया में सहयोग करने जैसी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। उनका दो साल का बेटा भी उनके साथ रहता है।

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ऐसे में उनके सामने सरकारी काम और बच्चे की देखभाल, दोनों को एक साथ संभालने की चुनौती रहती है। फील्ड में काम करने के दौरान परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं होतीं, लेकिन संध्या अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में जुटी हुई हैं। उनकी कार्यशैली ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ लोगों का ध्यान भी आकर्षित किया है।

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पटवारी संध्या शर्मा के प्रयासों की सराहना करते हुए शिवपुरी कलेक्टर अर्पित वर्मा ने उनके समर्पण को प्रेरणादायी बताया। उन्होंने मां की भूमिका और जनसेवा के दायित्व के बीच तालमेल को रेखांकित करते हुए उनके काम की प्रशंसा की।


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कलेक्टर की सराहना के बाद संध्या शर्मा की चर्चा और बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर भी लोग उनके प्रयासों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। हालांकि, इस पूरे मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि फील्ड में काम करने वाली महिला कर्मचारियों को कई बार ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जहां पारिवारिक जिम्मेदारियों और सरकारी दायित्वों के बीच संतुलन बनाना जरूरी हो जाता है।

संध्या शर्मा जिस स्वामित्व योजना के लिए काम कर रही हैं, उसका उद्देश्य ग्रामीण आबादी क्षेत्र में मकानों और अन्य पात्र संपत्तियों के अभिलेख तैयार कर लोगों को उनके संपत्ति संबंधी अधिकारों के दस्तावेज उपलब्ध कराने में मदद करना है। इस प्रक्रिया में सर्वेक्षण, जानकारी का सत्यापन और रिकॉर्ड तैयार करने जैसे काम महत्वपूर्ण होते हैं।

संपत्ति से संबंधित वैध दस्तावेज मिलने पर पात्र हितग्राहियों को अपने अधिकारों का प्रमाण रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा, नियमों और संबंधित वित्तीय संस्थान की शर्तों के अनुसार संपत्ति के दस्तावेज बैंकिंग और ऋण संबंधी जरूरतों में भी उपयोगी हो सकते हैं।

योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मैदानी अमले की भूमिका महत्वपूर्ण है। पटवारी ग्रामीणों से संपर्क स्थापित करने, रिकॉर्ड संबंधी जानकारी जुटाने और संबंधित प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने में अहम योगदान देते हैं।

संध्या शर्मा का मामला केवल एक कर्मचारी की प्रशंसा तक सीमित नहीं है। यह उन महिलाओं की कार्य परिस्थितियों को भी सामने लाता है, जिन्हें नौकरी के साथ छोटे बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। विशेषकर फील्ड में काम करने वाली महिलाओं के लिए यह संतुलन कई बार अतिरिक्त मेहनत और समय की मांग करता है।

ऐसे में कार्यस्थलों पर सहयोगपूर्ण वातावरण, जरूरत के अनुसार सुविधाएं और पारिवारिक जिम्मेदारियों के प्रति संवेदनशीलता महत्वपूर्ण हो जाती है। संध्या शर्मा के प्रयास को मिली सराहना इस व्यापक चर्चा का अवसर देती है कि सरकारी सेवाओं में महिलाओं के योगदान को पहचानने के साथ उनकी व्यावहारिक चुनौतियों को भी समझा जाए। फिलहाल, अपने छोटे बेटे को साथ लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी जिम्मेदारी निभा रहीं संध्या शर्मा ने अपने काम के जरिए लोगों का ध्यान खींचा है। कलेक्टर की प्रशंसा ने उनके प्रयासों को पहचान दी है।

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